स्टीव जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग, कोहली-अनुष्का हैं जिनके भक्त, नीमकरोली बाबा की अलौकिक कहानी…

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 16 Mar 2023, 12:00 AM | Updated: 16 Mar 2023, 12:00 AM

नीम करोली बाबा का पूरा नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था और वह
यूपी के ही अकबरपुर गांव के रहने वाले थे. उन्हें मात्र 17 वर्ष की अवधि में ही ज्ञान
प्राप्त हो गया था. उनका विवाह अल्पायु में भी हुआ था लेकिन उन्होंने अफने पत्नी
को कुछ समय बाद ही छोड़ दिया था.

ये है सबसे रोचक कहानी

नीम करोली बाबा को लेकर प्रचलित एक कहानी बताती है कि एक
बार नीम करोली बाबा बिना टिकट के फर्स्ट क्लास ट्रेन में सफर कर रहे थे. टिकट चेकर
ने बाबा के पास टिकट नहीं मिलने पर उन्हें अगले स्टेशन पर उतार दिया, जिसका नाम नीब
करौरी था. ट्रेन से उतरने के बाद बाबा नीम करोली ट्रेन से कुछ दूर जाकर जमीन पर
बैठ गए. अधिकारी ने ट्रेन आगे बढ़ाने का इशारा किया, लेकिन अनोखी बात यह थी कि
ट्रेन एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी और यह रेलवे समेत प्रशासन के लिए हैरानी की बात थी. उस क्षेत्र के मजिस्ट्रेट को जब इस घटना का ज्ञान हुआ, तब उसने अधिकारी को बाबा नीम करोली से माफी मांगने और सम्मानपूर्वक ट्रेन में बिठाने
का आदेश दिया. ऐसा करते ही ट्रेन चल पड़ी और तभी से उनका नाम बाबा नीम करौली पड़ गया.
बाबा नीम करोली ऐसे कई किस्से हैं, जिसमें उन्होंने चमत्कार किया है और इसलिए उनके भक्त उन्हें
हनुमान जी का अवतार मानते हैं.

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1958
में किया घर का त्याग
 

1958 में बाबा ने अपने घर को त्याग दिया और पूरे उत्तर भारत में
साधुओं की भांति विचरण करने लगे थे. उस दौरान लक्ष्मण दास, हांडी वाले बाबा और तिकोनिया वाले बाबा सहित वे कई नामों से
जाने जाते थे. गुजरात के
ववानिया मोरबी में तपस्या की तो वहां उन्हें तलईया बाबा के नाम से पुकारते लगे थे.

साल
1961 में पहली बार आए नैनीताल

उत्तराखंड के नैनीताल के पास कैंची धाम में बाबा नीम करौली 1961 में पहली बार यहां आए और उन्होंने अपने पुराने मित्र
पूर्णानंद जी के साथ मिलकर यहां आश्रम बनाने का विचार किया था. बाबा नीम करौली ने
इस आश्रम की स्थापना 1964 में की थी नीम करोली बाबा का समाधि
स्थल नैनीताल के पास पंतनगर में है. यह एक ऐसी जगह है जहां कोई भी मुराद लेकर जाए
तो वह खाली हाथ नहीं लौटता. यहां बाबा का समाधि स्थल भी है. यहां यहां बाबा नीम
करौली की भी एक भव्य मूर्ति स्थापित की गयी है. यहां हनुमानजी की मूर्ति भी है.

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भक्तों कि लिस्ट में हैं बड़े-बड़े नाम

नीम करोली बाबा के भक्तों में एप्पल के मालिक स्टीव जॉब्स,
फेसबुक के
मालिक मार्क जुकरबर्क और हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का नाम लिया जाता
है. हाल ही में भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज़ विराट कोहली भी अपनी पत्नी
अनुष्का शर्मा और बेटी वामिका के साथ नीम करोली बाबा के दर्शन करने पहुंचे थे.
जिसके दर्शन मात्र के बाद से ही ख़राब फॉर्म से जूझ रहे विराट के प्रदर्शन में भी
जबरदस्त बदलाव आया. रिचर्ड एलपर्ट
(रामदास) ने नीम करोली बाबा के चमत्कारों पर ‘मिरेकल ऑफ़ लव’ नामक एक किताब
लिखी इसी में ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ नाम से एक घटना का जिक्र है. बाबा हमेशा कंबल ही
ओढ़ा करते थे. आज भी लोग जब उनके मंदिर जाते हैं तो उन्हें कंबल भेंट करते हैं.

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15 जून को होता है कैंची धाम मेले का आयोजन

15 जून को देवभूमि कैंची धाम में मेले का आयोजन होता है और
यहां पर देश-विदेश से बाबा नीम करौली के भक्त आते हैं. इस धाम में बाबा नीम करौली
को भगवान हनुमान का अवतार माना जाता है. देश-विदेश से हजारों भक्त यहां हनुमान जी
का आशीर्वाद लेने आते हैं. बाबा के भक्तों ने इस स्थान पर हनुमान का भव्य मन्दिर
बनवाया. यहां 5 देवी-देवताओं के मंदिर हैं. इनमें हनुमानजी का भी एक मंदिर
है. बाबा नीम करोली हनुमानजी के परम भक्त थे और उन्होंने देशभर में हनुमानजी के कई
मंदिर बनवाए थे.

1950 में हनुमान गाढ़ी मंदिर आए थे बाबा

हनुमान गढ़ी मंदिर के प्रबंधक एमपी सिंह बताते हैं कि नीम
करौली महाराज 1950 में हनुमान गढ़ी आए थे. जिसके बाद बाबा ने अपने अनुयायियों
के साथ मिलकर यहां एक कुटिया का निर्माण किया. साथ ही कुटिया के समीप छोटे हनुमान
जी की मूर्ति की स्थापना की और 1953 में बाबा ने मंदिर में बड़े हनुमान जी की मूर्ति
स्थापित की. जिसके बाद बाबा ने 1955 में राम मंदिर का और 1956 से 1957 के बीच हनुमान
गढ़ी धाम में शिव जी का मंदिर भी बनवाया.

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हनुमानगढ़ी
में बाबा की चमत्कारी लीला

हनुमान गढ़ी मंदिर के प्रबंधक एमपी सिंह बताते हैं कि नीम
करौली महाराज 1950 में हनुमान गढ़ी आए थे. जिसके बाद बाबा ने अपने अनुयायियों
के साथ मिलकर यहां एक कुटिया का निर्माण किया. साथ ही कुटिया के समीप छोटे हनुमान
जी की मूर्ति की स्थापना की और 1953 में बाबा ने मंदिर में बड़े हनुमान जी की मूर्ति
स्थापित की. जिसके बाद बाबा ने 1955 में राम मंदिर का और 1956 से 1957 के बीच हनुमान
गढ़ी धाम में शिव जी का मंदिर भी बनवाया. इसके बाद बाबा
ने अपने सेवकों को कुटिया के समीप ही बड़े-बड़े गड्ढे खोदकर उसमें पूरी डालने को
कहा, लेकिन सेवक इस बात से हैरान हो गए कि आखिर बाबा इस वीरान जगह पर क्यों इतना बड़ा
भंडारा करवा रहे हैं. जब भंडारा शुरू हुआ तो अचानक हजारों की संख्या में बच्चों की
भीड़ उमड़ी और उन्होंने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया और प्रसाद ग्रहण करते ही सभी
बच्चे अचानक गायब हो गए. उन्होंने आगे बताया कि माना जाता है कि यह बच्चे वही थे,
जिन्हें शीतला
माता मंदिर के समीप दफनाया गया था और बाबा ने अपनी चमत्कारी लीला से सभी बच्चों की
आत्मा को मुक्ति प्रदान की.

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