Raghav Chadha Quit AAP: आम आदमी पार्टी के भीतर जारी राजनीतिक उठापटक अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने बड़ा बयान देकर सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें एक नए “आजाद समूह” में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर इसे ठुकरा दिया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के भीतर से बड़े पैमाने पर इस्तीफे और दलबदल की खबरों ने माहौल पहले से ही गर्म कर रखा है।
“आजाद समूह” का ऑफर और सीचेवाल का इनकार | Raghav Chadha Quit AAP
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, बलबीर सिंह सीचेवाल ने बताया कि शुक्रवार सुबह उन्हें राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी का फोन आया था। इस बातचीत में उन्हें बताया गया कि पंजाब के मुद्दों को संसद में मजबूती से उठाने के लिए एक नया “आजाद समूह” बनाया जा रहा है।
सीचेवाल के मुताबिक, उन्हें यह भी बताया गया कि इस समूह में पहले से ही 6-7 राज्यसभा सांसद हस्ताक्षर कर चुके हैं। लेकिन उन्होंने बिना किसी देरी के साफ कर दिया कि उनकी इस तरह के किसी भी समूह में शामिल होने की कोई इच्छा नहीं है।
“भाजपा में जाना बेवफाई है”—सीचेवाल का आरोप
सीचेवाल ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाल ही में जिन सांसदों ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामा है, उन्होंने पार्टी के साथ “बेवफाई” की है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इन नेताओं को राज्यसभा में इसलिए भेजा था ताकि वे पंजाब के मुद्दों को संसद में मजबूती से उठा सकें, लेकिन उन्होंने अपने दायित्व से पीछे हटकर राजनीतिक स्वार्थ को प्राथमिकता दी।
राघव चड्ढा और संदीप पाठक पर सवाल
सीचेवाल ने अपने बयान में खास तौर पर राघव चड्ढा और संदीप पाठक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन दोनों नेताओं ने पंजाब में पार्टी की राजनीतिक ताकत का पूरा लाभ उठाया, लेकिन आखिरकार पार्टी छोड़ने का फैसला किया, जो उन्हें चौंकाने वाला लगा। उनके अनुसार, यह सिर्फ राजनीतिक निर्णय नहीं बल्कि भरोसे और जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा कदम है।
राज्यसभा में बोलने का मौका न मिलने का दावा
सीचेवाल ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें राज्यसभा में बहस या विधेयकों पर बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अधिकतर समय राघव चड्ढा और संदीप पाठक ही चर्चा में हिस्सा लेते थे। सीचेवाल ने बताया कि वे केवल शून्यकाल या विशेष उल्लेख के जरिए ही अपने मुद्दे उठा पाते थे, जिससे वे अपने क्षेत्र और पंजाब के मुद्दों को पूरी तरह से नहीं रख पाते थे।
AAP को बड़ा झटका, 7 सांसदों का इस्तीफा
यह पूरा विवाद तब और गंभीर हो गया जब खबर आई कि आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए हैं। इस घटना ने न सिर्फ पार्टी बल्कि पंजाब की राजनीति में भी बड़ा राजनीतिक भूचाल ला दिया है। पार्टी के लिए यह झटका इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि राज्यसभा में उसकी संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है।
पंजाब की राजनीति में बढ़ी हलचल
इस घटनाक्रम के बाद पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। जहां एक तरफ आम आदमी पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा तेज हो गई है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे पार्टी नेतृत्व की कमजोरी के रूप में देख रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस विवाद के और भी बड़े राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।



























