Ankita Bhandari murder case: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ का नाम सामने आने के चार साल बाद यह मामला एक बार फिर देश की सियासत के केंद्र में आ गया है। केंद्र सरकार की ओर से वरिष्ठ भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किए जाने के फैसले के बाद विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस नियुक्ति को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक तीखा पत्र लिखा है। राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से अपील की है कि वे संविधान के अनुच्छेद 74(1) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करने और जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को पदभार न सौंपने की सलाह दें।
राष्ट्रपति को लिखे पत्र में राहुल गांधी ने क्या कहा? Ankita Bhandari murder case
राष्ट्रपति को भेजे अपने खत में राहुल गांधी ने पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा देते हुए लिखा कि सितंबर 2022 में महज 19 साल की अंकिता भंडारी की इसलिए बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उसने एक ‘वीआईपी’ मेहमान को स्पेशल सर्विस देने से मना कर अपनी गरिमा की रक्षा की थी।
राहुल ने कहा कि हत्या के मुख्य आरोपी पुलकित आर्य और उसके दोनों साथियों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा तो सुना दी है, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी यह बड़ा सवाल जस का तस बना हुआ है कि आखिर वह वीआईपी कौन था? राहुल ने लिखा कि अंकिता के माता-पिता समेत कई लोगों को यह शक है कि इस मामले के तार भाजपा नेता दुष्यंत गौतम से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक की आधिकारिक जांच रिपोर्ट्स में उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है और मामले की सीबीआई जांच अब भी जारी है।
‘राज्यपाल बनते ही मिल जाएगा कानूनी संरक्षण’
राहुल गांधी ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए खत में चिंता जताई कि राज्यपाल बनते ही किसी भी व्यक्ति को कानूनी संरक्षण मिल जाता है। संवैधानिक पद पर रहते हुए उनके खिलाफ कोई भी आपराधिक कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती। राहुल के मुताबिक, ऐसी स्थिति में सीबीआई की जांच सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह जाएगी और न्याय की उम्मीद टूट जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नियुक्ति से साफ होता है कि सरकार महिला सुरक्षा के मसले पर कितनी गंभीर है।
इंडिया गेट पर धरने पर बैठे माता-पिता, पहुंचे राहुल-प्रियंका
सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत गौतम के नाम का ऐलान होते ही अंकिता भंडारी के माता-पिता न्याय की गुहार लगाते हुए राजधानी के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गए। इस प्रदर्शन की खबर मिलते ही कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार के साथ खड़े होकर अपनी आवाज बुलंद की।
क्या था पूरा मामला?
ऋषिकेश के एक प्राइवेट रिसॉर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी सितंबर 2022 में अचानक लापता हो गई थी। बाद में 24 सितंबर को उसका शव चीला नहर से बरामद किया गया था। जांच में खुलासा हुआ था कि रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके साथियों ने वीआईपी को खुश करने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया था और इनकार करने पर उसे नहर में धक्का दे दिया था। मई 2025 में अदालत ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन ‘वीआईपी’ की पहचान को लेकर सीबीआई की जांच अब भी जारी है।











































