Srinagar Secretariat controversy: क्या आपका पद किसी को अपमानित करने का अधिकार दे देता है, ये सवाल इस वक्त जनता के मन में उठ रहा है। श्रीनगर सिविल सचिवालय में एक सीनियर IAS अधिकारी और महिला JKAS अधिकारी के बीच हुई तीखी बहस के वायरल वीडियो ने जम्मू-कश्मीर के प्रशासनिक गलियारों में भूचाल ला दिया है।
‘मिशन यूथ’ की एक ऑनलाइन समीक्षा बैठक के दौरान सीनियर अधिकारी द्वारा कथित तौर पर अपशब्दों का इस्तेमाल किए जाने के बाद, अब यह मामला राजनीतिक तूल पकड़ चुका है और कर्मचारी संगठनों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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क्या था पूरा मामला
‘मिशन यूथ’ (Mission Youth) की एक ऑनलाइन समीक्षा बैठक के दौरान जब महिला जेकेएएस (JKAS) अधिकारी बीनिश वानी प्रशासनिक मुद्दों पर अपनी बात रख रही थीं, तब वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी कुमार राजीव रंजन ने उन्हें बार-बार टोकते हुए कथित तौर पर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया और उन पर चिल्लाते हुए तुरंत निलंबन (सस्पेंशन) की चेतावनी दे दी।
Mr. Kumar is so drunk in power. He’s not just demeaning the Nari Shakti woman officer but also demeaning the credibility of a reputed body, JKPSC. A fraud accused Kumar thinks he can humiliate anyone subordinate to him.
A shameful act is solely condemned. https://t.co/L4XzW9PtTC— Zubair Reshi (@zubair_reshi) October 15, 2026
निलंबन की धमकी (Srinagar Secretariat controversy)
जब जूनियर अधिकारी ने इन अपमानजनक शब्दों पर कड़ी आपत्ति जताई, तो वरिष्ठ अधिकारी ने तुरंत उनका सस्पेंशन ऑर्डर टाइप करने का निर्देश दे दिया, जिस पर महिला अधिकारी ने भी गरिमा के साथ अपनी बात रखी।
आरोपी अधिकारी का पक्ष
आरोपी आईएएस (IAS) अधिकारी कुमार राजीव रंजन ने कथित वीडियो के इंटरनेट पर आने के बाद अपनी सफाई में कहा है कि यह वीडियो वास्तविक नहीं है। उन्होंने आशंका जताई है कि इस क्लिप को एआई (AI) तकनीक की मदद से या गलत इरादे से मॉर्फ करके तैयार किया गया हो सकता है।
मामले ने लिया राजनीतिक मोड़
इस बीच मामले ने राजनीतिक मोड़ ले लिया है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से इस मामले को तुरंत केंद्र सरकार के सामने उठाने और आरोपी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी मुख्य सचिव को निर्देश देकर पीड़ित महिला अधिकारी को प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा देने की बात कही है। राजनेताओं और जेकेएएस (JKAS) फ्रेटरनिटी ने इस व्यवहार की कड़ी निंदा की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वरिष्ठता किसी को भी सहयोगियों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने का लाइसेंस नहीं देती।
कुल मिलाकर श्रीनगर सचिवालय (Srinagar Secretariat controversy) की इस घटना ने केवल दो अधिकारियों के बीच के विवाद को नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में ‘वर्कप्लेस कल्चर’ और महिला अधिकारियों के सम्मान से जुड़े एक बड़े सवाल को जन्म दे दिया है। लोकतंत्र और सुशासन में पद की गरिमा और आपसी सम्मान सबसे ऊपर होना चाहिए। हालांकि, आरोपी अधिकारी ने वीडियो को एआई-जनरेटेड और छेड़छाड़ किया हुआ बताया है, इसलिए अब सबकी नजरें प्रशासन द्वारा बैठाई गई उच्च स्तरीय जांच पर टिकी हैं। सच जो भी हो, लेकिन इस विवाद ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था में अब ‘साहबियत’ और बदसलूकी के लिए कोई जगह नहीं बची है।











































