CJP Tiranga March: दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) की ओर से ‘तिरंगा मार्च’ का आवाहन किया गया है, जिसे लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। ‘नो परमिशन, 6,000 से ज्यादा जवान और कनॉट प्लेस में पूरी तरह से पाबंदी!’ आज दिल्ली का दिल यानी सीपी और उसके आसपास का इलाका एक बड़े टकराव का केंद्र बन चुका है।
एक तरफ CJP तिरंगा मार्च निकालने पर अड़ी है, तो दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने साफ कह दिया है कि कानून तोड़ने वालों पर सख्त एक्शन होगा और इलाके में धारा 163 लागू रहेगी। तो चलिए, इस लेख के जरिए विस्तार से जानते हैं कि सीपी और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं, कौन से रास्ते बंद हैं, और CJP आखिर किस बात को लेकर यह बड़ा प्रदर्शन कर रही है।
CJP Tiranga March की अनुमति नहीं
दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई है। हालांकि, पुलिस ने CJP के 11 लोगों को किसी अन्य सीमित या प्रतीकात्मक स्थान पर राष्ट्रगान गाने और तिरंगा फहराने का प्रस्ताव दिया था, जिसे CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ठुकरा दिया।
प्रशासनिक फैसला बनाम अदालती रुख
इस पूरे मामले में एक बड़ा कानूनी पेच भी सामने आया है। एक तरफ दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इस मार्च पर रोक लगाने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया और प्रदर्शन करने के अधिकार को पूरी तरह बाधित नहीं किया। अदालत का मानना है कि नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को दबाया नहीं जा सकता, हालांकि कोर्ट ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस को सौंपी है।
लेकिन दूसरी तरफ, कोर्ट द्वारा मार्च पर रोक न लगाने के ठीक बाद, NDMC ने ‘प्रशासनिक और सुरक्षा कारणों’ का हवाला देकर सेंट्रल पार्क को दो दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि जब अदालत ने मार्च पर सीधे तौर पर प्रतिबंध नहीं लगाया, तो क्या प्रशासन द्वारा मुख्य वेन्यू (सेंट्रल पार्क) को ही बंद कर देना अदालत की भावना के विपरीत नहीं है? CJP समर्थकों का आरोप है कि यह कदम अदालती रुख के बावजूद प्रदर्शन को रोकने की एक प्रशासनिक रणनीति है।
दोपहर 1 बजे AISF और AIYF का तिरंगा मार्च
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) और ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (AIYF) ने दोपहर 1 बजे ही अपने तिरंगा मार्च का आह्वान किया है। इन वामपंथी संगठनों का यह प्रदर्शन मुख्य रूप से रोजगार, शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का मुख्य विरोध प्रदर्शन शाम 5 बजे निर्धारित है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और अपने सह-संयोजकों की रिहाई की मांग को लेकर निकाला जा रहा है।
प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन दोनों अलग-अलग समय पर होने वाले मार्चों के दौरान कानून-व्यवस्था को बनाए रखना है, यही वजह है कि दोपहर से ही पूरे इलाके में भारी पुलिस बल मुस्तैद कर दिया गया है।
राजनाथ सिंह का बड़ा बयान
कनॉट प्लेस में CJP के मार्च को लेकर मचे घमासान के बीच देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीधे तौर पर CJP और कांग्रेस का नाम लेते हुए कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस और उसके राजनीतिक सहयोगी प्रत्यक्ष रूप से अपने समर्थक संगठनों के माध्यम से युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाने के बजाय राजनीतिक टकराव की दिशा में मोड़ रहे हैं।”
राजनाथ सिंह ने दावा किया कि कुछ लोग बांग्लादेश की हालिया घटनाओं से प्रेरणा लेकर भारत में भी ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) का खेल खेलना चाहते हैं और डंके की चोट पर सरकार गिराने की बात कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी चुनाव सुधार, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर नहीं है, बल्कि देश में अराजकता फैलाकर सत्ता हथियाने की एक सोची-समझी साजिश है।
रक्षा मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र किसी को भी अराजकता फैलाने या संवैधानिक संस्थाओं की साख पर चोट करने का लाइसेंस नहीं देता है।













































