कनाडा में सिखों की पहचान बने ये 5 ऐतिहासिक गुरुद्वारे, जानिए कब और कैसे हुई स्थापना – Gurdwaras in Canada

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Gurdwaras in Canada: हम सभी जानते है कि भारत के बाद कनाडा ही एक ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा पंजाबी रहते है। आज के समय में पंजाबियों में कनाडा जाने की होड़ काफी है.. वजह वहां पंजाबियों के लिए काफी स्कोप है, करीब एक सदी से भी ज्यादा वहां सिखों और पंजाबियों का दबदबा रहा है। आकड़ो की माने तो इस वक्त कनाडा में करीब 8 लाख सिख आबादी है.. जो यहां कि इकॉनोमी में बहुत बड़ा योगदान दे रही है, और जहां सिखों की इतनी तादाद में आबादी हो वहां भला सिख गुरुद्वारे की अपनी ही शान रहती है। कनाडा में सिखों का इतिहास 100 साल से भी ऊपर का है, वहीं यहां ऐतिहासिक सिख गुरुद्वारे भी है जो 100 साल से भी ज्यादा पुराने है। अपने इस लेख में हम कनाडा के 5 प्रमुख गुरुद्वारों के बारे में जानेंगे।

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गुरुनानक सिख गुरुद्वारा 

कनाडा में सिख धर्म के लोगो ने 19वी सदी की शुरुआत में ही आना शुरु किया था.. और वो पहली बार ब्रिटिश कोलंबियां में ही बसने लगे थे.. लेकिन वहां का भव्य गुरुनानक सिख गुरुद्वारा साल 1970 में सिख संगतो ने बनवाया है। इसकी शुरुआत एक छोटे से किराये के घर से हुई थी, लेकिन समय के साथ ये एक लैंडमार्क बन गया है। यहां सिख यूथ के लिए स्पेशल पंजाबी भाषा स्कूल बनाया गया है, जहां गुरमुखी लीपी सिखाई जाती है, वहीं कीर्तन की क्लासेस ली जाती है और गतका सिख मार्शल आर्टस की ट्रेनिंग दी जाती है। ये गुरुद्वारा सुबह 3 बजे खुलता है और रात को 10 बजे तक संगत के लिए खुला रहता है।

गुरु सिख मंदिर एबॉट्सफोर्ड

1902 में खालसा दीवान सोसाइटी के गठन के बाद उन्होंने कई गुरुद्वारो का निर्माण करवाया, लेकिन कनाडा में सबसे पहला गुरुद्वारा 1911 में ब्रिटिश कोलंबिया के एबॉट्सफोर्ड में बनवाया गया था। ये गुरुद्वारा लड़की का बनवाया गया था, जिसकी लकड़ी सिख संगतो ने लकड़ी मिलों से गुरुद्वारे वाले स्थान तक पहुंचाया था। ये कनाडा का ऐतिहासिक और सबसे पुराना सिख गुरुद्वारा है, जो संरक्षित है, हालांति 1983 में इसकी जीर्णोधार किया गया है। ये सुबह 9 बजे खुलता है औऱ शाम को 6 बजे बंद हो जाता है।

गुरुद्वारा दशमेश दरबार अल्बर्टा

दसवे गुरु गुरु गोबिंद सिहं को समर्पित गुरुद्वारा दशमेश दरबार कैलबरी का सबसे पुराना और ऐतिहासिक गुरुद्वारा माना जाता है। ये गुरुद्वारा साल 1976 में बनवाया गया था। इस गुरुद्वारे में एक सिख म्यूजियम बना हुआ है, जिसमें सिखो की महान धार्मिक विरासत औऱ उनके इतिहास से जुड़ी चीजे संरक्षित करके रखी गई है। ये गुरुद्वारा रोज सुबह 3 बजे खुलता है औऱ रात को 9 बजे बंद हो जाता है। कैलगरी में भारी संख्या में सिख आबादी है, जो हर बुधवार को होने वाले गतका सेशन के लिए सैकड़ो की संख्या में जमा होती है। सिख मार्शल आटर्स की कला को सीखने और उनके जज्जे को करीब से देखने के लिए ये गुरुद्वारा सबसे बेहतर है।

गुरूद्वारा नानकसर एडमॉन्टन अल्बर्टा

कनाडा के अल्बर्टा के एडमॉन्टन में स्थिति गुरुनानक सिख सेंटर, पहले सिख गुरु गुरु नानक देव जी को समर्पित है। इसे साल 1977 में बनवाया गया था। रोजाना होने वाले गुरबाणी और भजनो के अलावा हर पूर्णिमा को इसे विशेष तरीके से सजाया जाता है, जिस कारण यहां बाकि दिनो के मुकाबले पूर्णिमा के दिन भीड़ ज्यादा होती है। ये गुरुद्वारा रोजाना सुबह 4 बजे खुलता है और रात 9 बजे बंद हो जाता है।

खालसा दीवान सोसाइटी गुरुद्वारा

साल 1912 में खालसा दीवान सोसाइटी द्वारा बनाया गया वैंकुवर शहर का ऐतिहासक गुरुद्वारा.. जो कनाडा के सबसे पुराने गुरुद्वारों की सूचि में शामिल है। इस गुरुद्वारे को स्थानीय लोग रोस स्ट्रीट गुरुद्वारे के नाम से बुलाते है। 1970 में सिख आबादी के बढ़ने के बाद इस गुरुद्वारे को स्थानांनतरित करके रॉस स्ट्रीट लाया गया। ये एक बेहद विशाल इमारत है जिसे मशहूर कनाडाई वास्तुकार आर्थर एरिक्सन ने डिजाइन किया था। ऐतिहासिक रूप से ये गुरुद्वारा कई सिख आंदोलनो का साक्षी रहा है। जिसका ये मुख्य केंद्र भी रहा था। जैसे कि कोमागाटा मारू और सिखो को वोट देने के अधिकारी की लड़ाई.. ये गुरुद्वारा सुबह 4 बजे संगतो के लिए खोला जाता है और रात को 8 बजे बंद हो जाता है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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