Monu Betaurabala: इस कलयुगी दुनिया में जहां आए दिन घर कलह में कभी कथित तौर पर मां- बाप को पिटने मौत के घाट उतार देने की खबरें सामने आती है, इस बीच आई इस खबर में भावूक कर दिया। जब माँ गंभीर रूप से बीमार हुई डॉक्टरों की उम्मीदें धुंधली पड़ने लगीं और एक पूरा परिवार माँ की बीमारी के दर्द से टूट गया, तब एक बेटे की अटूट श्रद्धा और माँ के प्रति अगाध प्रेम ने एक चमत्कार को जन्म दिया। माँ के ठीक होते ही, इस कलयुगी श्रवण कुमार ने सिर्फ खुशियाँ नहीं मनाईं, आज के आधुनिक दौर में जहाँ अक्सर रिश्ते कमज़ोर पड़ते दिखते हैं,
वहीं एक बेटे का अपनी मां के लिए प्रेम की एक ऐसी दिल छू लेने वाली कहानी सामने आई है जो हर किसी को प्रेरित कर रही है। माँ की जानलेवा बीमारी के कारण एक हंसता-खेलता परिवार पूरी तरह से बिखरने की कगार पर था। लेकिन जब दुआओं और दवाओं ने असर दिखाया और माँ ठीक हुईं, तो बेटे ने अपनी मन्नत को पूरा करने में एक पल की भी देरी नहीं की। वह तुरंत 12 ज्योतिर्लिंगों की पावन यात्रा की ओर दौड़ पड़ा। यह यात्रा केवल आस्था की नहीं, बल्कि एक माँ के प्रति बेटे के निस्वार्थ प्रेम की जीती-जागती मिसाल है। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं कि एक माँ के प्यार और बेटे के समर्पण की यह कहानी आपकी आँखों में आँसू और दिल में उम्मीद जगा देगी।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियोज के मुताबिक, यह पूरा मामला बिहार के अररिया जिले के रहने वाले 19 वर्षीय युवा मोनू कुमार (Monu Betaurabala) से जुड़ा है। मोनू ने अपनी गंभीर रूप से बीमार माँ के ठीक होने की खुशी में देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए दौड़कर यात्रा करने का एक बेहद कठिन संकल्प लिया है।
कुछ समय पहले मोनू की माँ लालती देवी गंभीर रूप से बीमार हो गई थीं। माँ के गले में मछली का कांटा फंसने और अन्य जटिलताओं के कारण स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि वे जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थीं। डॉक्टरों की उम्मीदें भी धुंधली पड़ने लगी थीं। उस कठिन समय में मोनू ने भगवान शिव से प्रार्थना की थी कि यदि उनकी माँ पूरी तरह स्वस्थ हो जाती हैं, तो वे किसी गाड़ी या शॉर्टकट का सहारा लिए बिना, अपने पैरों के दम पर दौड़ते हुए देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करेंगे।
ऐसे हुई यात्रा की शुरुआत (Monu Betaurabala)
दवाओं और दुआओं के असर से जब उनकी माँ की तबीयत में सुधार हुआ और वे ठीक हो गईं, तो मोनू ने अपनी मन्नत पूरी करने का फैसला किया। उन्होंने 15 मार्च 2026 को पटना (बिहार) से अपनी इस अनोखी और कठिन आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत की। इस सफर में वे सभी सुख-सुविधाओं को छोड़कर सिर्फ अपने हौसले और महादेव की भक्ति के सहारे आगे बढ़ रहे हैं।
रोजाना 50 किलोमीटर दौड़कर अपनी मन्नत को कर रहे पूरा
मोनू कोई सामान्य यात्रा नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे बिना रुके हर दिन लगभग 50 किलोमीटर दौड़ते हैं। पिछले लगभग सात महीनों की निरंतर तपस्या के बाद, मोनू अब तक 8,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी दौड़कर तय कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम से शुरुआत करते हुए मल्लिकार्जुन, रामेश्वरम, भीमाशंकर और त्र्यंबकेश्वर सहित 5 से 6 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन पूरे कर लिए हैं और वे लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
कलयुग का श्रवण कुमार
मोनू (Monu Betaurabala) देश के जिस भी हिस्से या राज्य से गुजरते हैं, स्थानीय लोग उनके इस अद्भुत समर्पण को देखकर उनके स्वागत के लिए उमड़ पड़ते हैं। लोग उन्हें खाना, पानी देते हैं और उनका हौसला बढ़ाते हैं। इंटरनेट पर लोग उनकी तुलना पौराणिक चरित्र ‘श्रवण कुमार’ से कर रहे हैं। मोनू की माँ को अपने बेटे के इस कदम पर बेहद गर्व है और पूरा परिवार अब उनके सुरक्षित ढंग से इस विशाल संकल्प को पूरा करके घर लौटने की प्रार्थना कर रहा है।
मोनू कुमार की यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक मन्नत की पूर्ति नहीं है, बल्कि कलयुग के इस दौर में माता-पिता के प्रति निस्वार्थ प्रेम और सेवा की एक मिसाल है। जहाँ आज के समय में लोग अपनी व्यस्त जिंदगी में अपनों को भूलते जा रहे हैं, वहीं मोनू ने यह साबित कर दिया कि एक बेटे का अपनी माँ के लिए प्यार हर मुश्किल राह को आसान बना सकता है। पूरा देश आज मोनू के इस जज्बे को सलाम कर रहा है और उनके सुरक्षित घर लौटने की कामना कर रहा है।













































