Gurjant Singh: 27 मार्च 2026 में नई दिल्ली में हॉकी खिलाड़ियों के सम्मानित करने के लिए हॉकी इंडिया पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया था, जहां 31 साल के फॉरवर्ड खिलाड़ी गुरजंत सिंह ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। ये पल एक तरफ गर्वित महसूस कराने वाला था, तो वहीं गुरजंत सिंह के सन्यास के ऐलान ने सबको थोड़ा भावुक कर दिया था। बतौर जूनियर खिलाड़ी भारत को दो बार गोल्ड दिलाने वाले, दो बार कांस्य दिलाने वाले खिलाडी, जिन्होंने हॉकी में एक बड़ी पहचान बनाई.. अपने इस लेख में हम इस बेहतरीन हॉकी खिलाड़ी के बारे में बात करेंगे.. जिन्हें उनके खेल के लिए हमेशा याद रखा जायेंगा।
ओलंपिक पदक विजेता हॉकी खिलाड़ी Gurjant Singh
26 जनवरी 1995 को अमृतसर के खलहेरा में जन्में गुरजंत सिंह विक्र एक सिख किसान परिवार से आते है। उनके पिता बलदेव सिंह एक किसान है और उनकी मां सुखजिंदर कौर एक हाउस मेकर थी। सुखजिंदर का बचपन गांव की मिट्टी में ही पलकर बीता, वो खलहेरा के सरकारी स्कूल में ही पढ़ते थे, जब उन्हें पहली बार हॉकी के बारे में पता चला। हॉकी के प्रति उनका लगाव हुआ अपने चाचा और एक राष्ट्रीय हॉकी प्लेयल हरदेव सिंह चहल को देखकर। मात्र 10 साल की ही उम्र में गुरजंत ने चंडीगढ़ के हॉकी और फुटबॉल एकेडमी में दाखिला ले लिया.. जहां उन्होंने जूनियर टीम में डेब्यू से पहले साल 2011 तक ट्रेनिंग ली थी, जिसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में दाखिला ले लिया.. और वो जिला स्तर पर हॉकी स्पार्धाओं में भाग लेने लगे। लेकिन उन्होंने हॉकी की ट्रेनिंग के लिए जालंधर के सुरजीत हॉकी अकेडमी में दाखिला ले लिया।
ढाका एशिया कप में गोल्ड मेडल जीता
यहां उन्होंने अटैकिंग गेम औऱ सर्कल एंट्री का प्रशिक्षण लिया। उनकी प्रतीभा को देखते हुए 2016 में उन्हें मैन हॉकी जूनियर वर्ल्ड कप में खेलने का मौका मिला और टीम में उनकी बेहतरीन परफोर्मेंस के दम पर लखनऊ में टीम ने गोल्ड मैडल जीता था। ये उनके करियर में बड़ी उपलब्धि थी और 2017 में उन्हें जल्द ही सिनियर टीम का हिस्सा बनने का मौका मिला.. और 2017 में भी ढाका में आयोजित हुए एशिया कप में भी भारत ने गोल्ड मेडल जीता.. गुरजंत ने अपनी परफोर्मेंस के दम पर 2017 में पहली बार शुरु हुए FIH PRO LEAGUE में अपनी जगह मजबूत कर ली और यहां खेले जाने वाले मैचों में वो फोरवर्ड लाइन में प्रैस लगाने औऱ बतौर पोचर के रूप में स्थापित होने में सफल हुए।
गुरजंत सिंह की उपलब्धिया
2021 में जब टोक्यों ओलंपिक हुए तब गुरजंत की भूमिका काफी अहम रही। उन्होंने सर्कल के अंदर से गोल दागा, भारत ने तब कांस्य पद जीता था लेकिन ये उपलब्धि बड़ी इसलिए मानी गई क्योंकि करीब 41 सालो के बाद भारत को हॉकी में ओलंपिक में कोई पदक जीता था.. उनकी इस उपलब्धि के कारण ही उन्हें भारत सरकार ने खेल के सबसे बड़े अवार्ड अर्जुन पुरुस्कार से सम्मानित किया था। इसके बाद तो गुरजंत की बेहतरीन परफोर्मेंस के दम पर 2022 में कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल, 2023 में ही एशिया गेम्स 2022 में गोल्ड, जीता और एशिया चैम्पियन ट्रोफी में गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम की हिस्सा रहे थे। 2024 में भारत ने अपनी उपलब्धि को बरकरार रखा और भारत ने स्पेन को हरा कर कांस्य पदक जीता था। गुरजंत ने सीनियर लेवल पर करीब 130 इंटरनेशनल मैच खेलें थे, जिसमें उन्होंने 6 बार भारत को मेडल जीतायें, जिसमें 3 गोल्ड मेडल, 2 कांस्य पदक, और 1 रजत पदक दिलाया था। 27 मार्च 2026 को हॉकी इंडिया अवार्ड सेरेमनी में 31 साल की उम्र में उन्होंने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी। उन्होंने 1 दिसंबर 2023 को टेनिस प्लेयर करमन कौर थांडी से शादी की थी.. गुरजंत सिंह 2015 में पंजाबी फिल्म अंग्रेज में भी कैमियो करते नजर आये थे।
इंटरनेशनल हॉकी से रिटायर
साल 2021 में उने अर्जुन पुरुस्कार से सम्मानित होने के बाद उनके सम्मान में खलेहरा में उनके GOVERNMENT PRIMARY SCHOOL का नाम बदल कर ओलंपियन गुरजंत सरकारी प्राइमरी स्कूल कर दिया गया। वहीं 2024 में पंजाब सरकार ने उन्हें पंजाब सिविल सर्विस अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया। गुरजंत इंटरनेशनल हॉकी से रिटायर हो चुके है लेकिन अब भी वो हॉकी इंडिया लीग में खेलते है और पंजाब के सूरमा हॉकी क्लब का हिस्सा है। वहीं जिन अकेडमी से उन्होंने ट्रेनिंग ली है वो अब वहां के खिलाड़ियों को हॉकी के गुर सिखाते है। हॉकी के प्रति वो आज भी पूरी तरह से समर्पित है। हॉकी में उनके दिये गए योगदान को हमेशा याद रखा जायेगा।












































