Hardeep Puri Epstein photos controversy: बयानों की सच्चाई अब ताश के पत्तों की तरह बिखरती दिख रही है। कल तक अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से वन-टू-वन मुलाकात की बात को लगातार खारिज किया गया, लेकिन आज वायरल हुई एक तस्वीर ने उन तमाम दावों की पोल खोल दी है और कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
साथ ही उनका एक पुराना बयान भी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि वे एपस्टीन से किसी व्यक्तिगत संबंध के कारण नहीं, बल्कि इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) या इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज्म (ICM) के एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल (Delegation) के हिस्से के रूप में केवल तीन से चार बार मिले थे।
क्या है विवाद?
अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice – DoJ) द्वारा जारी जेफ्री एपस्टीन फाइल्स (Epstein Files) के तहत केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और दिवंगत अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की एक साथ तस्वीरें सामने आने के बाद भारत में सियासी विवाद खड़ा हो गया है।
बता दें कि ये तस्वीरें अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) द्वारा जारी की गई आधिकारिक एपस्टीन फाइल्स (डेटासेट 9) का हिस्सा हैं। इन तस्वीरों में हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन एक टेबल के आमने-सामने सोफे पर बैठे दिखाई दे रहे हैं और फ्रेम में कोई तीसरा व्यक्ति नजर नहीं आ रहा है।
विपक्ष का सवाल
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा सहित विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि जब मंत्री हरदीप पुरी पहले यह दावा कर चुके हैं कि वे एपस्टीन से हमेशा 3-4 बार एक ‘प्रतिनिधिमंडल’ (Delegation) के हिस्से के रूप में मिले थे, तो इन तस्वीरों में बाकी सदस्य कहां हैं और यह अकेले में हुई मुलाकात जैसी क्यों दिख रही है?
राहुल गांधी का सीधा हमला
तस्वीर सामने आने के बाद विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुंबई दौरे और इसी दौरान तस्वीर के सार्वजनिक होने की टाइमिंग को जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने लिखा—”रुबियो मुंबई पहुंचे। US DOJ ने एपस्टीन और पुरी की तस्वीर जारी की। प्रिय BJP और RSS कार्यकर्ताओं, आपको क्या लगता है – ये किस देश-विरोधी गद्दार को ब्लैकमेल कर रहे हैं?” कांग्रेस का आरोप है कि अमेरिका इन संवेदनशील दस्तावेजों का इस्तेमाल भारत सरकार पर कोई राजनीतिक दबाव बनाने या ब्लैकमेल करने के लिए कर रहा है।
पहली बार आया था नाम
गौरतलब है कि हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन के कथित कनेक्शन का मामला पहली बार नवंबर 2025 में तब गरमाया था, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी दस्तावेजों में मंत्री का नाम सामने आया था। उस दौरान बीजेपी और मंत्री की ओर से इन दावों को सिर्फ एक अनौपचारिक संदर्भ या ‘नेम-ड्रॉपिंग’ बताकर खारिज कर दिया गया था।
इसके बाद फरवरी 2026 में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा कुछ ईमेल जारी किए गए, जिस पर मंत्री ने संसद और प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि उन्होंने केवल आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ 3-4 बार ही मुलाकात की थी। लेकिन अब सामने आई एक्सक्लूसिव तस्वीरों ने इस पूरे घटनाक्रम को एक नया और गंभीर मोड़ दे दिया है।
पुराने ईमेल का विवाद (Hardeep Puri)
इससे पहले, अमेरिकी न्याय विभाग और आधिकारिक फाइल्स में साल 2014 और 2015 के ईमेल भी सामने आए थे। इनमें दिसंबर 2014 का एक ईमेल शामिल है, जिसमें हरदीप सिंह पुरी ने एपस्टीन के ‘द्वीप’ (Island) से लौटने का जिक्र करते हुए उन्हें किताबें देने और चर्चा करने की इच्छा जताई थी। पुरी ने बाद में सफाई दी थी कि सार्वजनिक जीवन में कई लोगों से मिलना होता है और उनका एपस्टीन के किसी भी आपराधिक कृत्य से कोई लेना-देना नहीं था।

दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका
अमेरिकी रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच में हरदीप सिंह पुरी का एपस्टीन के किसी भी आपराधिक नेटवर्क, यौन तस्करी या अवैध गतिविधियों से कोई संबंध या संलिप्तता नहीं पाई गई है। इस मामले में केवल उनकी पुरानी मुलाकातों के स्वरूप को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। इस बीच, केंद्रीय मंत्री की बेटी ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर चल रहे मानहानिकारक और अपमानजनक कंटेंट के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की है।












































