Thalapathy Vijay aviation tax: ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) को संभालने के लिए राज्यों ने आगे आकर बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। तमिलनाडु की थलपति विजय सरकार (सी. जोसेफ विजय) ने हवाई ईंधन (ATF) पर लगने वाले वैट (VAT) में भारी कटौती का ऐलान किया है। इसी राह पर चलते हुए गोवा सरकार ने भी एविएशन टरबाइन फ्यूल पर टैक्स घटा दिया है। तमिलनाडु ने चेन्नई एयरपोर्ट पर वैट की दर को 29% से घटाकर 16% कर दिया है, जबकि राज्य के बाकी सभी हवाई अड्डों पर इसे घटाकर महज 1% कर दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ, गोवा सरकार ने भी वैट को 15% से घटाकर 7% कर दिया है।
एयर इंडिया और इंडिगो ने फैसले का किया स्वागत| Thalapathy Vijay aviation tax
तमिलनाडु की उद्योग मंत्री विरुधई मागल कीर्थना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस राहत भरे फैसले की जानकारी साझा की। इस घोषणा के तुरंत बाद देश की प्रमुख एयरलाइंस ने दोनों सरकारों के इस कदम का खुले दिल से स्वागत किया। एयर इंडिया ने मुख्यमंत्री थलपति विजय और तमिलनाडु सरकार का आभार जताते हुए कहा कि टैक्स में इस कटौती से संचालन लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) को नियंत्रित करने में सीधी मदद मिलेगी। एयरलाइन ने साफ किया कि वह राज्य में अपना नेटवर्क मजबूत करने और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए काम करेगी। वहीं, इंडिगो ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईंधन पर टैक्स घटने से पूरे एविएशन सेक्टर को नई मजबूती मिलेगी।
Air India expresses its sincere gratitude to the Hon’ble Chief Minister of Tamil Nadu, @TVKVijayHQ and the Government of Tamil Nadu for reducing VAT on Aviation Turbine Fuel (ATF).
The reduction from 29% to 16% at Chennai Airport and to 1% at other airports in the State is a welcome step that will help lower operating costs and improve air connectivity.
We look forward to strengthening our network and serving the people of Tamil Nadu better.
@CMOTamilnadu
— Air India Newsroom (@AirIndia_News) October 24, 2026
अमेरिका-ईरान तनाव से आसमान छू रहे ईंधन के दाम
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दामों में जबरदस्त उछाल आया है। एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट की सदस्यता वाले संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) के मुताबिक, किसी भी विमानन कंपनी के कुल परिचालन खर्च में पहले ईंधन की हिस्सेदारी 30 से 40 फीसदी हुआ करती थी। कच्चे तेल में लगी आग के चलते यह खर्च अब बढ़कर 55 से 60 फीसदी तक पहुंच गया है।
कंपनियों की मुश्किलें सिर्फ महंगे ईंधन तक सीमित नहीं हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से विमानों की लीज, मेंटेनेंस और इंश्योरेंस के बिल भारी पड़ रहे हैं। इसके ऊपर पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने के कारण पश्चिमी देशों की तरफ जाने वाली उड़ानों को लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ अतिरिक्त ईंधन जल रहा है, बल्कि क्रू का खर्च भी काफी बढ़ गया है।
उड़ानों पर कटौती का खतरा और यात्रियों पर असर
एयरलाइंस की संस्था एफआईए ने पहले ही केंद्र सरकार से गुहार लगाई है कि एटीएफ पर एक्साइज ड्यूटी घटाई जाए, एयरपोर्ट पार्किंग और लैंडिंग चार्ज में छूट मिले और ईंधन दरों के लिए लागत आधारित मॉडल लाया जाए। संगठन ने आगाह भी किया था कि अगर वक्त रहते टैक्स में राहत नहीं मिली, तो घाटे में चल रहे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ानें घटानी या बंद करनी पड़ सकती हैं।
ऐसे नाजुक मोड़ पर तमिलनाडु और गोवा द्वारा वैट घटाने से एयरलाइंस को कुछ आर्थिक सांस लेने की जगह जरूर मिलेगी। हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि यात्रियों के लिए हवाई टिकट तुरंत सस्ते हो जाएंगे। किराए में कमी आएगी या नहीं, यह त्योहारों के सीजन, यात्रियों की मांग, रूट की दूरी और कंपनियों की कमर्शियल रणनीति पर निर्भर करेगा, लेकिन इतना तय है कि कई रूट्स पर उड़ानों के रद्द होने का खतरा जरूर टल जाएगा।













































