Gurdwaras in Tamil Nadu: सिख धर्म की नींव भले ही उत्तर भारत में पड़ी हो, लेकिन इसके फलने फूलने की कहानी, सिखो से गहराई से जुड़ाव की यादें दक्षिण भारत में भी काफी मिलती है.. गुजरात हो, महाराष्ट्र हो या तमिलनाडु.. सिख गुरु के आगमन, वहां उनके रहने और सिख धर्म के प्रचार प्रसार की कई धरोहरे मौजूद है.. पहले गुरु गुरु नानक देव जी ने अपनी उदासियों में न केवल इन राज्यों की यात्रायें की, बल्कि वहां उनके सम्मान में भक्तों ने ऐतिहासिक गुरुद्वारो का निर्माण कराया। जो वहां सिख धर्म के आने और उनकी विचारधारा को अपनाने के साक्षी बने..इन्ही में से एक राज्य है तमिलनाडु.. जहां गुरुसाहिब भाई मरदाना के साथ पहुंचे थे। ये कहानी है प्रसिद्ध हिंदू देवता जगन्नाथ पुरी के गुरुसाहिब के प्रति मोह की.. जहां उनके भजनो को सुनने के लिए वो खुद मंदिर की दूसरी दिशा में मुंह करके बैठ गए..अपने इस लेख में तमिलनाडु के 5 गुरुद्वारों के बारे में जानेंगे।
गुरुद्वारा सिंह सभा – Gurdwara Singh Sabha
कोयंबटूर का सबसे पहला और इतिहासिक गुरुद्वारा सिंह सभा की स्थापना 1969 में यहां रहने वाले 5-6 सिख परिवारो ने की थी। ये गुरुद्वारा आर एस पुरम में स्थित है, यहां रहने वाले सिख संगत इसकी देखभाल करते है, ये गुरूद्वारा यहां के विशाव दीवान हॉल और बहादुर हॉल नाम ते एक समुदायिक केंद्र के लिए काफी प्रचलित है। जो कि सभी धर्मो के लोगो के लिए समुदायिक कार्यक्रम करने के लिए फेमस है।हर रविवार को यहां गुरु का लंगर किया जाता है, साल 1988 से यहां मुफ्त डिस्पेंसरी चलती है. ये गुरुदवारा रोजाना सुबह 7 बजे खुलता है और 12 बजे बंद हो जाता है फिर शाम को 5 बजे खुल कर रात को 8.30 बजे बंद होता है, वहीं रविवार को सुबह 7 बडे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है।
गुरुद्वारा साहिब श्री गुरु नानक सतसंग सभा – Shri Guru Nanak Satsang Sabha
एयरफोर्स तांबरम-दक्षिणी चैन्नई में कैंप रोड पर वायुसेना स्टेशन के पास स्थित है गुरुद्वारा साहिब श्री गुरु नानक सतसंग सभा। जिसे एयरफोर्स गुरुद्वारा भी कहा जाता है। भले ही ये सैन्य क्षेत्र में हो लेकिन ये गुरुद्वारा सभी संगतो के लिए खुला रहता है। ये गुरुद्वारा सातों दिन खुला रहता है, भक्त सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक गुरु साहिब के आगे मत्था टेकने के लिए आ सकते है।
गुरुद्वारा साहिब चैन्नई कॉरपॉरेशन – Gurudwara Sahib, Chennai Corporation
तमिलनाडु का सबसे बड़ा गुरुद्वारा गुरुद्वारा साहिब श्री गुरु नानक सत संघ सभा.. जो कि चैन्नई कॉरपॉरेशन क्षेत्र में स्थिति है। इस गुरुद्वारे की स्थापना 1949 में मद्रास में रहने वाले सिखों ने की थी, हालांकि 1975 में यहां फिर से यहां विशाल और भव्य गुरुद्वारा स्थापित किया था। कॉरपॉरेशन में होने वाले सभी सिख कार्यक्रम इसी गुरुद्वारे में होते है। ये सफेद संगमरमर से बना हुआ है, जो की पारंपरिक वास्तुकला से सजा है।ये गुरुद्वारा सुबह 5 से रात को 9 बजे तक खुला रहता है।
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा – Gurdwara Sri Guru Singh Sabha
वेल्लौर के थोट्टापलायन क्षेत्र का सबसे विशाल और भव्य सिख गुरुद्वारा अपनी शांति और सेवा भावना के लिए केवल सिख संगतो के बीच ही नहीं बल्कि यहां के स्थानिय लोगो के बीच भी काफी प्रचलित है। इस गुरुद्वारे के बगल में सीएमसी अस्पताल है, जहां अलग अलग राज्यों से इलाज कराने आते है, वो लोग अक्सर इसी गुरुद्वारे में पड़ाव डालते है। ये गुरुद्वारा करीब 1970 के आसपास बनाया गया था, वहीं गुरुद्वारा सुबह 4 बजे खुलता है और रात 9 बजे बंद होता है।
श्री गुरु नानक धाम गुरुद्वारा साहिब रामेश्वरम – Shri Guru Nanak Dham Gurudwara
रामेश्वरम के प्रसिद्ध रामनाथ स्वामी मंदिर के करीब आधा किलोमीटर दूर स्थिति श्री गुरु नानक धाम गुरुद्वारा साहिब, गुरु नानक देव जी की दूसरी उदासी के दौरान 1511 में श्रीलंका से रामेश्वरम आने औऱ 19 दिनो तक ठहर कर धर्म का प्रचार करने की निशानी है। यहीं पर स्थित है बाउली साहिब, जो गुरुसाहिब द्वारा मीठे पानी की बाउली की उत्पत्ति करने का साक्षी है। इस गुरुद्वारे को 1766 में हैदराबाद के निजाम के यहां प्रधानमंत्री रहे राजा चंदू लाल ने करवाया था। जिसके बाद 2005 में राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला ने यहां का दौरा किया था, और उन्होंने इसका आधुनिक और भव्य रूप तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। श्री गुरु नानक धाम गुरुद्वारा साहिब रोजाना सुबह 5 बजे खुलता है औऱ रात को 9 बजे बंद हो जाता है। यहां बाहर से आने वाले आगंतुको के लिए विशेष रहने का प्रबंध है। ये है तमिलनाडु के 5 भव्य गुरुद्वारे, जो सिख धर्म की महानता और सेवा भाव के प्रतीक के रूप मे खड़ा है।













































