Gurdwaras in Bangalore: कर्नाटक एक ऐसा प्रदेश ह, जो सिख संगतो के लिए बेहद अहम माना जाता है, खासकर कर्नाटक का बीदर शहर.. जहां खुद पहले गुरु गुरु नानक देव जी अपनी उदासियों के दौरान 1514 में पंहुचे थे। यहां गुरु साहिब ने न केवल सिख धर्म की पंरपराओं और मुल्यो के बारे में संगतो को बताया था बल्कि सूखे की मार झेल रहे लोगों के लिए एक मीठे पानी का झरना भी प्रकट किया था.. वहीं बीदर ही वो शहर है जहां से दसवे पातशाह गुरु गोबिंद सिंह जी के पंज प्यारों में से एक भाई साहिब सिंह बिलौंग करते थे। पहले गुरु से लेकर पंज प्यारे तक, कर्नाटक सिखो के लिए बेहद अहम है.. वहीं कर्नाटक की राजधानी बैंगलुरु को किसी पहचान की जरूरत नहीं है.. एक हाइटेक औऱ आईटी हब कहलाने वाले बैंगलुरु में सिख गुरुद्वारे सिखों की अध्यात्मिक मूल्यों को दर्शाते है। अपने इस लेख में हम बैंगलुरु के 5 गुरुद्वारों के बारे में जानेंगे।
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा – Gurdwara Sri Guru Singh Sabha
हमारी इस लिस्ट में सबसे पहला नाम है बैगलोर का एक भव्य और सफेद संगमरमर से बना गुरु गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा । बैगलोर के प्रसिद्ध खूबसूरत उल्सूर झील के किनारे स्थित ये गुरुद्वारा न केवल बैंगलोर का बल्कि कर्नाटक के भी पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारों में से एक है। इसकी स्थापना 1943 में बैगलोर में रहने वाले सिख परिवारों ने एक साथ मिलकर की थी और 13 अप्रैल 1945 वैसाखी के दिन ब्रिटिश अधिकारी ए. जी. रसेल ने इसका आधिकारिक तौर पर उदघाटन करके सिख संगतो के लिए गुरुद्वारा शुरू गया। झील के किनारे इस सफेद संगमरमर से बना ये गुरुद्वारा वास्तुकला का अनूठा संगम है। ये गुरुद्वारा सुबह 3:30 बजे खुलता है और रात को 9:00 बजे बंद होता है। वहीं रविवार को विशेष दीवान सजता है।
गुरुद्वारा साध संगत – Gurdwara Sadh Sangat
बैंग्लौर के जलाहल्ली वेस्ट में स्थिति गुरुद्वारा साध संगत हरे भरे पेड़ों और खुले मैदान के बीचो बीच बना हुआ है। वेस्टे के विपरीत ईस्ट में गुरुद्वारा वायुसेना में परिसर में बना है, जहां आम लोगो नहीं जा सकते है, इस कारण ईस्ट के रहने वाले सिख भी वेस्ट में ही गुरुद्वारा साध संगत में ही मात्था टेकने आते है। इस गुरुद्लारे को आजादी के बाद यहां रहने वाले सिख संगतो मे धीरे धीरे करके स्थापित किया है। जो कि फिलहाल 2 मंजिला है। रोजाना सुबह 4 बजे खुलने वाला ये गुरुद्वारा रात को 10 बजे तक खुला रहता है। साथ ही हर रविवार को बहुत बड़ा लंगर आयोजन किया जाता है ।
गुरुद्वारा कलगीधर – Gurudwara Kalgidhar
दसवे गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी को समर्पित गुरुद्वारा कलगीधर बैंगलौर के मराठहल्ली का बेहद भव्य गुरूद्वारा है। ये काफी आबादी वाला इलाका है, इस गुरुद्वारे का निर्माण साल 2000 में ज्ञानी महल सिंह द्वारा करवाया गया था। ये गुरुद्वारा सुबह 8 बजे खुलता है औऱ शाम को 7.30 बजे बंद हो जाता है। वहीं शनिवार औऱ रविवार को तो 7 बजे ही खुल जाता है। यहां सबसे खास बात है महीने के हर दूसरे शनिवार को होने वाला कीर्तन दरबार.. जिसमें भारी संख्या में सिख संगतें जमा होती है।
गुरुद्वारा साहिब – Gurdwara Sahib
बैंगलौर के संजय नगर में स्थित गुरुद्वारा साहिब अपने शांत वातावरण और आध्यात्मिक मूल्यों के लिए जाना जाता है। एयर फ़ोर्स अश्वथ नगर गेट के पास स्थिति ये गुरुद्वारा हर रविवार को विशेष दीवान और लंगर के लिए जाना जाता है। इस गुरुद्वारे को करीब 3 दशक पहले उन सिख संगतो ने बनवाया था, जो कि वायुसेना से रिटायर हो गए थे। ये गुरुद्वारा सुबह 6 जे खुलता है औऱ सुबह साढे 8 बजे बंद हो जाता है और फिर शाम को 6 बजे खोला जाता है और रात को 8 बजे बंद कर दिया जाता है। सुरक्षा कारणों से ये इतने कम समय के लिए खुलता है।
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा येलाहंका – Gurdwara Sri Guru Singh Sabha Yelahanka
बैंगलौर के उत्तरी हिस्से में स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा येलाहंका, को गुरुद्वारा सिंह सभा भारती नगर भी कहा जाता है। 2000 के दशक में बनाया गया है, जिसके इसके आसपास रहने वाले सिख संगतो ने ही बनाया था। ये गुरुद्वारा सुबह 6 बजे खुलता है औऱ रात को 8 बजे तक खुला रहता है। यहां बुजुर्गो के लिए दर्शन की विशेष सुविधाये है। एक विशाल और हवादार प्रार्थना सभा सफेद संगमरमर से बने इस गुरुद्वारे की चमक को और बढ़ा देती है। बता दें, आपको ये है बैंगलुरु के 5 फेमस गुरुद्वारे है।














































