Lawrence Bishnoi gang minors: देश के अंडरवर्ल्ड और जरायम की दुनिया में पिछले कुछ सालों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुंबई की पुरानी अंडरवर्ल्ड गैंगवार जहां अब इतिहास बन चुकी है, वहीं उत्तर भारत से उभरा लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट आज देश भर की सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। कभी बड़े कारोबारियों से करोड़ों की फिरौती वसूलना, कभी सरेआम गोलीबारी, तो कभी फिल्म स्टार्स को धमकियां इस गिरोह का नाम लगातार चर्चा में बना रहता है। हाल ही में अक्टूबर 2026 में मुंबई के जुहू इलाके में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग ने इस नेटवर्क को एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में ला खड़ा किया है।
इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को धर दबोचा। शुरुआत में मीडिया में यह खबर फैली कि पकड़ा गया एक आरोपी महज 17 साल का नाबालिग है। हालांकि, 19 अक्टूबर को मुंबई पुलिस ने स्थिति साफ करते हुए स्पष्ट किया कि हिरासत में लिए गए तीनों आरोपी बालिग हैं। सबसे छोटा आरोपी 18 साल का है, जबकि बाकी दोनों की उम्र 22 साल है। भले ही टाइगर श्रॉफ केस में नाबालिग के शामिल होने का दावा खारिज हो गया हो, लेकिन इससे वह गंभीर सवाल खत्म नहीं होता जो लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों को परेशान कर रहा है आखिर लॉरेंस बिश्नोई गैंग में इतनी बड़ी संख्या में कम उम्र के लड़के और किशोर क्यों जुड़ रहे हैं?
700 से ज्यादा युवाओं का नेटवर्क, कोई पक्का आंकड़ा नहीं| Lawrence Bishnoi gang minors
लॉरेंस गैंग में कुल कितने सदस्य हैं, इसका कोई पुख्ता और आधिकारिक सरकारी आंकड़ा मौजूद नहीं है। हालांकि पुलिस और खुफिया एजेंसियों के अनुमान के मुताबिक, देशभर में इस सिंडिकेट के पास 700 से ज्यादा सक्रिय या जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले युवा सहयोगी हैं।
जांच में यह बात लगातार सामने आई है कि यह गिरोह अपने ज्यादातर ऑपरेशंस के लिए 17 से 25 साल के युवाओं का इस्तेमाल करता है। कई बार ऐसे किशोरों को आगे किया जाता है जिनका पहले से कोई बड़ा आपराधिक इतिहास नहीं होता। पुलिस की भाषा में कहें तो ‘क्लीन रिकॉर्ड’ वाले इन लड़कों पर शक करना मुश्किल होता है। पंजाब, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों से युवाओं को बरगलाकर इस दलदल में धकेलने की बात कई मामलों में सामने आई है, हालांकि राज्यों के हिसाब से इसका कोई तय पैमाना नहीं है।
नाबालिगों को मोहरा बनाने का पुराना पैटर्न
कानून के जानकारों का मानना है कि गैंग्स अक्सर किशोरों का इस्तेमाल एक सोची-समझी रणनीति के तहत करते हैं। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत नाबालिगों को बालिगों जैसी कड़ी सजा और जेल नहीं होती, बल्कि उन्हें बाल सुधार गृह भेजा जाता है। वहीं दूसरी तरफ, ये लड़के सोशल मीडिया पर दिखने वाली ‘गैंगस्टर लाइफ’ के झूठे ग्लैमर, हथियार हाथ में लेने के शौक और कुछ हजार रुपयों के लालच में आसानी से फंस जाते हैं।
आइए सिलसिलेवार ढंग से नजर डालते हैं उन प्रमुख मामलों पर, जहां इस सिंडिकेट से किशोरों के जुड़ने या उनके पकड़े जाने के गंभीर आरोप लगे:
- अक्टूबर 2022 (सलमान खान को निशाना बनाने की साजिश): पंजाब पुलिस के मोहाली स्थित खुफिया मुख्यालय पर मई 2022 में हुए आरपीजी (RPG) हमले की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने एक नाबालिग और अर्शदीप सिंह को पकड़ा था। पुलिस ने तब यह सनसनीखेज दावा किया था कि इस नाबालिग को बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की कथित रेकी और हमले की साजिश में भी शामिल किया गया था।
- फरवरी 2023 (गैंग में भर्ती होने की होड़): उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शिव विहार से पुलिस ने एक 17 वर्षीय लड़के को पकड़ा। उसने सोशल मीडिया पर अपनी दबंगई और हथियारों के वीडियो केवल इसलिए पोस्ट किए थे ताकि लॉरेंस बिश्नोई गैंग का ध्यान अपनी तरफ खींच सके और वह गिरोह का हिस्सा बन सके।
- मई 2023 (रंगदारी सिंडिकेट में किशोर): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई कर आठ लोगों को पकड़ा, जिनमें तीन नाबालिग थे। अधिकारियों ने तब खुलासा किया था कि युवाओं को ताकत, हथियार और झूठी धौंस का लालच देकर भर्ती किया जाता है। जान जोखिम में डालकर गोलीबारी करने वाले इन नए लड़कों को महज 10 से 15 हजार रुपये थमाए जाते हैं, जबकि रंगदारी के करोड़ों रुपये विदेश और बड़े आकाओं की जेब में जाते हैं।
- दिसंबर 2023 (होटल के बाहर फायरिंग): दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज में एक बड़े होटल के बाहर फायरिंग का जिम्मा एक 15 साल के किशोर और 23 साल के अनीश को सौंपा गया था। पुलिस के अनुसार, इन्हें जेल से अनमोल बिश्नोई के इशारे पर निर्देश दिए जा रहे थे।
- फरवरी 2024 (जयपुर बाल सुधार गृह): जयपुर के एक सुधार गृह से 23 किशोरों के भागने की घटना में एक ऐसे लड़के की भूमिका की जांच की गई, जो हाल ही में 18 साल का हुआ था और पहले बिश्नोई गैंग से जुड़ी गोलीबारी में पकड़ा जा चुका था।
- मई 2024 (सात राज्यों में स्पेशल सेल की छापेमारी): दिल्ली, राजस्थान, यूपी, पंजाब, हरियाणा, बिहार और मध्य प्रदेश में एक साथ की गई कार्रवाई में 10 आरोपी पकड़े गए, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल था। इनके पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए थे।
- जनवरी 2026 (बुराड़ी में कथित शूटर): दिल्ली के बुराड़ी से पुलिस ने हथियारों के साथ 19 साल के युवक के साथ एक 17 साल के लड़के को पकड़ा, जिन पर राजधानी में हुई फायरिंग की घटनाओं में शूटर की भूमिका निभाने का आरोप लगा।
- जुलाई 2026 (पुणे में 50 करोड़ की फिरौती): पुणे के फुरसुंगी में एक कारोबारी से 50 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और गोदाम के बाहर फायरिंग करने के मामले में तीन लोगों की गिरफ्तारी के साथ एक 17 वर्षीय किशोर को हिरासत में लिया गया। इस मामले में भी कॉल करने वाले ने खुद को लॉरेंस गैंग से जुड़ा बताया था।
अपराध की इस अंधी सुरंग में क्यों खिंच रहे हैं युवा?
पुलिस जांच और समाजशास्त्रियों के विश्लेषण में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि सोशल मीडिया आज के दौर में अपराध का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है। इंस्टाग्राम रील्स और फेसबुक पोस्ट्स पर गैंगस्टरों की रील्स, गन कल्चर और लग्जरी कारों का प्रदर्शन नाबालिगों को आसानी से आकर्षित करता है।
जल्दी अमीर बनने का सपना, इलाके में अपनी धौंस जमाने की चाहत और यह नासमझी कि वे कानून की पकड़ से बच जाएंगे, किशोरों को इस अंधे कुएं में धकेल देती है। गिरोह के बड़े सरगना भी इन लड़कों को ‘डिस्पोजेबल’ यानी ‘इस्तेमाल करो और फेंको’ के तरीके से काम पर लगाते हैं। जब तक इन लड़कों को समझ आता है कि उनका इस्तेमाल हो चुका है, तब तक उनकी जिंदगी पुलिस रिकॉर्ड्स और अदालतों के चक्करों में बर्बाद हो चुकी होती है।














































