यूपी चुनाव से पहले Priyanka Gandhi का महामास्टरस्ट्रोक, जानें कितनी सीटों पर किया बड़ा दावा!

Rajni | Nedrick News Ghaziabad Published: 20 अक्टूबर 2026, 10:40 PM Updated: 20 अक्टूबर 2026, 10:40 PM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

Priyanka Gandhi: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने आगामी चुनावों के मद्देनजर उत्तर प्रदेश की 150 विधानसभा सीटों की एक विशेष सूची तैयार की है। समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन की औपचारिक बातचीत से पहले कांग्रेस इन सीटों पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश करने की रणनीति बना रही है।

और पढ़ें: 2027 में किन-किन राज्यों में होने वाले हैं चुनाव, अभी सत्ता में किस की पार्टी | Assembly Elections 2027

क्या है Priyanka Gandhi का प्लान?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली में यूपी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक अहम बैठक की। प्रियंका गांधी का मुख्य उद्देश्य यह है कि जब समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के साथ सीट-बंटवारे (Seat-Sharing) की आधिकारिक बातचीत शुरू हो, तो कांग्रेस के पास इन 150 सीटों पर दावा ठोकने के लिए मजबूत और तार्किक आधार मौजूद हो।

तीन कैटेगरी में बांटी गईं सीटें

बैठक में यूपी कांग्रेस के नेताओं ने करीब 175 सीटों की शुरुआती सूची रखी थी, जिसे ए, बी और सी कैटेगरी में बांटा गया था। इसके बाद प्रियंका गांधी ने जातिगत समीकरण, भौगोलिक स्थिति, 2024 के लोकसभा चुनाव परिणाम और पिछले विधानसभा चुनावों के प्रदर्शन के आधार पर करीब 150 सीटों की लिस्ट फाइनल करने का निर्देश दिया है।

एक हफ्ते में आएगी रिपोर्ट

पार्टी की स्ट्रेटजी कमेटी एक हफ्ते के भीतर इन सभी सीटों की एक विस्तृत रिपोर्ट प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) को सौंपेगी। इस रिपोर्ट में प्रत्येक सीट का सामाजिक, जातिगत, महिला व युवा समीकरण और वहां कांग्रेस के जीतने की ठोस वजहें शामिल होंगी। इस आंतरिक सर्वे और रिपोर्ट के बाद, प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश के पार्टी सांसदों और पूरी टीम के साथ एक और समीक्षा बैठक करेंगी, ताकि जमीनी स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके।

क्या इस बार बनेगी बात

दोनों दलों के नेता अच्छी तरह जानते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनावों में मिलकर लड़ने से उन्हें यूपी में भारी सफलता मिली थी। भाजपा विरोधी वोटों को एकजुट रखने के लिए दोनों ही दल मिलकर चुनाव लड़ना चाहते हैं। कांग्रेस ने बातचीत की कमान सीधे प्रियंका गांधी वाड्रा को सौंपी है, जिनके अखिलेश यादव के साथ अच्छे राजनीतिक संबंध हैं।

इससे बातचीत में गति आने की उम्मीद है। कांग्रेस इस बार 2017 की तरह आखिरी वक्त का इंतजार नहीं कर रही है। पार्टी चुनाव से काफी पहले सीटों का आंतरिक सर्वे कर और 125 से 150 सीटों की लिस्ट तैयार कर तार्किक बातचीत के लिए मेज पर आ रही है।

पेंच कहां फंसा है?

गठबंधन की राह में जहां दोनों दलों के बीच पेंच फंसता नजर आ रहा है। जैसे कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम कम से कम 150 सीटों की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि 2017 के गठबंधन में भी कांग्रेस को 105 सीटें मिली थीं। वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) कांग्रेस को 80 से 100 से अधिक सीटें देने के मूड में नहीं दिख रही है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव स्पष्ट कर चुके हैं कि सीटों का बंटवारा सिर्फ संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि “जमीनी पकड़ और जीतने की क्षमता” के आधार पर ही तय होगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इमरान मसूद का कहना है कि सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि सीटों की क्वालिटी भी मायने रखती है। कांग्रेस ऐसी सीटें बिल्कुल नहीं चाहती जहां उसका जीतना नामुमकिन हो, जबकि सपा अपनी मजबूत और पहले से जीती हुई सीटें छोड़ने को आसानी से तैयार नहीं होगी।

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषकों

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह पूरी कवायद दोनों पार्टियों द्वारा अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत बनाए रखने की एक सोची-समझी ‘बार्गेनिंग स्ट्रेटजी’ (Bargaining Strategy) है।

विश्लेषकों का अनुमान है कि शुरुआती दौर में 150 सीटों की मांग करने के बाद, कांग्रेस अंत में 90 से 110 सीटों के सम्मानजनक समझौते पर सहमत हो सकती है, बशर्ते उन्हें उनकी पसंद की ‘क्वालिटी सीटें’ दी जाएं क्योंकि दोनों ही दल जानते हैं कि अलग होकर चुनाव लड़ने से सीधा फायदा भाजपा को होगा।

Rajni

rajni@nedricknews.com

Recent News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds