Kapil Sibal praises PM Modi: देश की राजनीति में आमतौर पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हर मुद्दे पर तलवारें खिंची रहती हैं, लेकिन नई दिल्ली में संपन्न हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के नतीजों ने सबको हैरान कर दिया है। मोदी सरकार की नीतियों के सबसे मुखर और तीखे आलोचकों में गिने जाने वाले राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता के लिए खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की सराहना की है। सिब्बल का मानना है कि बेहद अलग-अलग और विरोधी हितों वाले देशों के बीच बिना किसी विवाद के ‘दिल्ली डिक्लेरेशन’ पर सर्वसम्मति बना लेना अपने आप में भारत की बहुत बड़ी कूटनीतिक कामयाबी है।
‘इतने बिखरे हितों के बीच साझा प्रस्ताव पास कराना चमत्कार जैसा’| Kapil Sibal praises PM Modi
दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कपिल सिब्बल ने कूटनीतिक पेचीदगियों का खुलकर विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि आज का ब्रिक्स कोई साधारण समूह नहीं रहा, बल्कि यह परस्पर विरोधी विचारधाराओं वाले मुल्कों का एक जटिल मंच बन चुका है। ऐसे में किसी एक प्रस्ताव पर सबकी मुहर लगवाना बेहद मुश्किल काम था।
सिब्बल ने वैश्विक समीकरणों को समझाते हुए कई अहम बातें रखीं:
- पश्चिम एशिया और अमेरिका का संतुलन: समूह में मिस्र, सऊदी अरब और यूएई जैसे देश हैं जिनके अमेरिका के साथ गहरे रिश्ते हैं, जबकि दूसरी ओर ईरान है जिसका अमेरिका और इजराइल से सीधा टकराव चल रहा है। साथ ही शिया-सुन्नी विभाजन जैसी संवेदनशील उलझनें भी हैं। ऐसे में किसी एक पक्ष को जिम्मेदार ठहराना नामुमकिन था।
- रूस और चीन के साथ भारत के हित: भारत न तो रूस से दूरी बना सकता है क्योंकि हमारी रणनीतिक साझेदारी और डिफेंस सिस्टम काफी हद तक उस पर निर्भर हैं, और न ही हम चीन के प्रभाव को पूरी तरह नजरअंदाज या स्वीकार कर सकते हैं।
- आतंकवाद और कूटनीति: सिब्बल ने प्रधानमंत्री के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि जैसा पीएम मोदी ने कहा, ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं है और न हो सकता है। अगर अमेरिका के खिलाफ खुला मोर्चा खोला जाएगा तो इससे वैश्विक आतंकवाद को ही बढ़ावा मिलेगा।
यशवंत सिन्हा के बाद सिब्बल ने भी माना सरकार का लोहा
कपिल सिब्बल विपक्ष के दूसरे ऐसे कद्दावर नेता बन गए हैं जिन्होंने खुले दिल से इस कूटनीतिक सफलता को स्वीकारा है। इससे पहले पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने भी अप्रत्याशित रूप से भारत की अध्यक्षता में संपन्न हुए इस सम्मेलन और साझा घोषणापत्र की तारीफ करते हुए इसे सरकार की शानदार उपलब्धि बताया था। सिब्बल ने स्पष्ट किया कि सीमा विवाद जैसे द्विपक्षीय मसले ऐसे बहुपक्षीय मंचों पर हल नहीं हो सकते, लेकिन इसके बावजूद किसी मुद्दे पर टकराव हुए बिना शिखर सम्मेलन का शांतिपूर्ण समापन होना भारत के कुशल नेतृत्व को दर्शाता है।
इतिहास की याद: मनमोहन सरकार के योगदान का भी किया जिक्र
हालांकि, मोदी सरकार की पीठ थपथपाने के साथ-साथ सिब्बल ने इतिहास के पन्नों को पलटना भी नहीं भुलाया। उन्होंने याद दिलाया कि 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन से शुरू हुआ यह सफर 2011 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद अब 11 देशों तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि यूपीए शासन के दौरान 2012 में जब नई दिल्ली में ब्रिक्स की बैठक हुई थी, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में ही ऐतिहासिक ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ (NDB) की नींव रखी गई थी। सिब्बल का यह बयान संतुलित रहा… जहां उन्होंने अतीत में यूपीए के योगदान को दर्ज कराया, वहीं वर्तमान में मोदी सरकार द्वारा साधे गए जटिल वैश्विक संतुलन को खुले दिल से सराहा।
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