Punjabi music industry: चाहे भारत हो या विदेश, और चाहे कोई भी इलाका या धर्म हो, पंजाबी गाने न बजें तो जश्न अधूरा लगता है। पंजाबी म्यूज़िक इंडस्ट्री—जो पारंपरिक धुनों से लेकर डांस म्यूज़िक तक हर चीज़ के लिए दुनिया भर में मशहूर है—को किसी परिचय की ज़रूरत नहीं है। आज, हो सकता है कि आप हिंदी गायकों से ज़्यादा पंजाबी गायकों को जानते हों। ग्रामीण लोक संगीत से रैप और हिप-हॉप तक का सफ़र आसान नहीं था, फिर भी कड़ी मेहनत, लगन और जुनून ने ‘पॉलीवुड’ को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया है। इस लेख में, हम पॉलीवुड के ग्लोबल सफ़र के बारे में जानेंगे—यह देखेंगे कि कैसे पंजाबी म्यूज़िक अपनी ग्रामीण लोक जड़ों से निकलकर एक ऐसी चीज़ बन गया है जिस पर पूरी दुनिया के लोग थिरकते हैं।
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पंजाबी संगीत का अजेय ग्लोबल सफर
पंजाब के संगीत को अलग अलग एरा में बांट सकते है, जिसमें सबसे पहला एरा है पांरपरिक संगीत का.. जो पंजाब में बैशाखी में खेतों के पकने के बाज, त्योहारों में, मेलों में महिलाओं से लेकर पुरुष तक गाते बजाते थे.. इस दौरान पंजाब के लोग तुंबी, घड़ा, अलघोजा और ढोल बजा कर संगीत दिया करते थे। लेकिन ये पूरी तरह से वोकल हुआ करते थे, मगर जब 1960-70 का दशक आया तब विनाइल रिकॉर्डस औऱ कैसेट से लोगो का परिचय हुआ.. जिसके बाद कुलदीप मानक, अमर सिंह चमकीला और गुरदास मान जैसे बेहतरीन कलाकारों ने पंजाब की पारंपरिक संगीत के पंजाब से निकाल कर भारत के दूसरे हिस्से से अवगत कराया था।
पंजाब के संगीत पारंपरिक संगीत में 1980 से 90 के दशक में नए संगीत यूके भांगड़ा वेव और फ्यूजन की शुरुआत हुई.. ये पहली बार हुआ था जब पंजाबी संगीत का ग्लोबल शिप्ट हुआ था.. यानि की पंजाबी संगीत ग्लोबली पहचाना जाने लगा था। हालांकि इस बदलाव की शुरुआत यूनाईडेट किंग़डम में हुई थी जब वहां रहने वाले पंजाबियों ने पारंपरिक संगीत में एक्सपेरिमेंट शुरु किया और उन्होंने भांगड़ा के साथ वेस्टर्न सिंथसाइज़र, ड्रम मशीन और पॉप म्यूजिक को एड करके नए म्यूजिक को जन्म दिया। यूके में भांगड़ा के साथ ब्रिटिश हिप हॉप, रेगुए और गराज को एड करके एशियन अंडरग्राउंड आंदोलन की शुरुआत की थी। इससे ये हुआ कि भांगड़ा विद पॉप म्यूजिक आ गया.. जिसने सुनने वालो के पैर खुद ही थिरकने लगे। ये लोगो को अपनी तरफ ज्यादा अट्रेक्ट करते थे, ब्रिटेन के बाद कनाडा ने भी पॉप पंजाबी म्यूजिक को बढ़ावा दिया।
जिसके बाद आया साल 2000 का दौर.. ये वो दौर था जब पंजाबी संगीत अपने नए आयाम पर पहुंचे। यहां पहली बार पंजाबी संगीत ने बॉलीवुड पर अपना कब्जा जमाना शुरु किया.. रैप से तौर पर पंजाबी सिंगर हनी सिंह ने पंजाबी संगीत को एक नए और जोशिले अंदाज में पेश किया, जिसने भाषाओं की सारी दीवार तोड़ दी और बहुत लोकप्रियता हासिल की । नजीता ये हुआ कि पंजाबी फिल्मों में ही नहीं बल्कि हिंदी फिल्मों में भी लगभग पंजाबी गानों, हिपहॉप औऱ रिमिक्स गानो शामिल किये जाने लगे। पंजाबी भाषा बिल्कुल आम बोलचाल की भाषा जैसी ही हो गई। जिसके बोल लोगो की जुबान पर आसानी से चढ़ने लगे। नतीजा ये हुआ कि आज पंजाबी संगीत बॉलीवुड के संगीत की रीढ़ की हड्डी बन चुका है। पंजाबी संगीत के इतने फेमस औऱ पसंद किये जाने के पीछे का एक बड़ा कारण है इसका मिट्टी से जुड़ा होना.. यानि कि भले ही संगीत में हिप हॉप ट्रैप म्यूजिक शामिल होता है कि लेकिन गानो के बोल अब भी पंजाबी मिट्टी से ही निकलते है। सिंगर्स ठेठ पंजाबी बोली का इस्तेमाल करते है, जिससे पंजाबी संगीत की आत्मा बनी रहती है.. औऱ लोगो को ये एक दूसरे से कनेक्ट आसानी से कर लेती है। जहां ढोल अब भी बजते है, लेकिन उसके साथ बेस, ट्रैप बिट्स और लो फाई वाइब्स को जोड़ने के बाद ये संगीत पारंपरिक के साथ साथ पूरी तरह से आज के ट्रेंड के अनुसार ही हो जाते है। पंजाबी संगीत आज जिस मुकाम पर है, वहां तक असल में कोई और भारतीय संगीत पहुंचा ही नही है.. जो पंजाब के संगीत के प्रति उनके क्रेज और अपनी परंपरा को बनाये रखने की भूख को दर्शाता है।












































