Punjab elections 2027: पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल के चचेरे भाई, रिटायर्ड मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों (बादल) ने अपने बेटे के साथ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली है। 78 साल के मेजर भूपिंदर सिंह बादल लंबे समय तक प्रकाश सिंह बादल के राजनीतिक सचिव रहे और पूर्व अकाली-बीजेपी सरकार में राज्य मंत्री का पद भी संभाल चुके हैं। चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की मौजूदगी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की हाजिरी में वे विधिवत बीजेपी में शामिल हुए। इस घटनाक्रम को अकाली दल और खासकर सुखबीर सिंह बादल के लिए एक बड़ा राजनीतिक व पारिवारिक झटका माना जा रहा है।
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1971 जंग के जांबाज और बादल परिवार से दशकों पुराना नाता| Punjab elections 2027
‘मेजर भूप’ के नाम से पहचाने जाने वाले भूपिंदर सिंह ढिल्लों का परिवार दशकों से पंजाब की राजनीति में दखल रखता आया है। उनके पिता स्वर्गीय गुरराज सिंह ढिल्लों बादल 1952 से 1958 तक शिरोमणि अकाली दल की ओर से राज्यसभा सांसद रहे थे। वे प्रकाश सिंह बादल के पिता रघुराज सिंह के छोटे भाई थे और उन्होंने प्रकाश सिंह बादल के शुरुआती सियासी सफर को गढ़ने में भी अहम भूमिका निभाई थी।
मेजर भूपिंदर सिंह खुद भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं और उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में हिस्सा लिया था। साल 1988 में सेना से रिटायर होने के बाद वे 1994 से सक्रिय राजनीति और चुनावी अभियानों में उतरे। बादल गांव में उनका पुश्तैनी मकान अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के पुराने आवास के ठीक पास स्थित है। साल 1997 से 2002 के दौरान अकाली सरकार में वे राज्य मंत्री रहे, और बाद में 2012 में भी उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा देकर तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का राजनीतिक सचिव बनाया गया था।
बगावत की पृष्ठभूमि: उपेक्षा की टीस और सैनी की मुलाकात
मेजर भूपिंदर सिंह के बीजेपी में आने की जमीन कुछ महीने पहले ही तैयार होने लगी थी। दरअसल, रीढ़ की हड्डी की सर्जरी के बाद जब वे चंडीगढ़ स्थित अपने घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे, तब हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी उनका हाल जानने पहुंचे थे। उस दौरान ढिल्लों ने यह कहकर नाराजगी जताई थी कि पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल तो कई बार मिलने आए, लेकिन सुखबीर बादल के परिवार की ओर से कोई सुध लेने नहीं आया। हालांकि बाद में सुखबीर बादल उनसे मिलने पहुंचे, लेकिन तब तक सियासी दूरियां बढ़ चुकी थीं।
लांबी सीट से चुनाव लड़ने की चर्चाएं
श्री मुक्तसर साहिब जिले की लांबी सीट लंबे समय से बादल परिवार का सबसे मजबूत गढ़ मानी जाती रही है, जहां से खुद प्रकाश सिंह बादल लंबे समय तक विधायक रहे। 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर आम आदमी पार्टी के गुरमीत सिंह खुड्डियां ने जीत दर्ज की थी, जबकि प्रकाश सिंह बादल दूसरे स्थान पर रहे थे। उस चुनाव में कांग्रेस तीसरे और बीजेपी चौथे स्थान पर रही थी।
अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि बीजेपी 2027 के चुनाव में लांबी विधानसभा क्षेत्र से मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों को अपना उम्मीदवार बना सकती है। लांबी इलाके में उनकी जमीनी पकड़ और लोगों से पुराना जुड़ाव रहा है। ऐसे में उनका बीजेपी में शामिल होना मालवा क्षेत्र में पार्टी के विस्तार और अकाली दल के पारंपरिक वोट बैंक में सेंधमारी के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।












































