कांग्रेस ने बाबा साहेब को भारत रत्न देने में 32 साल क्यों लगा दिए?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 16 अक्टूबर 2023, 05:30 AM Updated: 16 अक्टूबर 2023, 05:30 AM
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14 अप्रैल, 1990 को बाबा साहेब की पत्नी सविता अम्बेडकर ने भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति आर रमण के हाथों बाबा साहेब को मिला भारत रत्न अवार्ड लिया. 31 मार्च 1990 को भारत सरकार ने बाबा साहेब को मारनोपरांत भारत रत्न देने की घोषणा की थी. भारत सरकारों ने बाबा साहेब के मरने के 32 साल बाद भारत रत्न से नवाजा था. कांग्रेस ने उनके कामों को हमेशा से अनदेखा किया गया था. बबा साहेब इतने बड़े समाज सुधारक, संविधान निर्माता के योगदान को अनदेखा कर, उनके कामों को भुला दिया गया. इस लेख में हम आपको बताएगे कि क्यों कांग्रेस ने बाबा साहेब को भारत रत्न देने में 32 साल दिए.

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बाबा साहेब को संविधान निर्माता कहा जाता है, हम 26 नवम्बर को सविधान  दिवस मानते आ रहे है संविधान जो लोग समाजिक, आर्थिक, धार्मिक तौर पर आजाद नहीं थे उनकी मुक्ति का द्वार माना जाता है. जिस इंसान ने संविधान जा निर्माण किया, उनके कामों को कांग्रेस हमेशा से नकारती और छुपाती आई है. बाबा साहेब की समाज सुधरने वाली छवि कांग्रेस को अच्छी नही लगती थी, कांग्रेस डरती थी कहीं बाबा साहेब आपने कामों से कांग्रेस पर भारी न पड़ जाये. इसीलिए कांग्रेस बाबा साहेब को संविधान सभा से दूर रखना चाहती थी.

संविधान सभा के शुरुवाती 295 सदस्यों में बाबा साहेब का नाम नहीं था. खेद की बात है कि वह अपनी क्रम भूमि बम्बई विधान सभा से चुन कर नहीं जा पाए. क्यों कि बाबा साहेब का कांग्रेस ने घोर विरोध किया था. उस समय वल्लभ भाई पटेल के कहने पर बम्बई के मुख्यमंत्री वीजी खेर ने बाबा साहेब को संविधान समिति में नहीं रखा. उन्हें बम्बई की अनुसूचित जाति संघ का भी साथ नहीं मिला था. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे जो समाज के पिछड़े वर्ग की चिंता करते थे . उनको लगता था कि बाबा साहेब का संविधान सभा ने शामिल होना बहुत जरूरी है. जिसके बाद जोगेंदर मंडल ने बंगाल से उन्हें सविधान सभा में आमंत्रित किया, लेकिन उसके बाद भारत और पाकिस्तान के अलग होने की वजह से जिस स्थान से बाबा साहेब निर्वाचित थे वह क्षेत्र पाकिस्तान में चला गया और बाबा साहेब को अपनी सीट छोडनी पड़ी. उसके बाद फिर से बाबा साहेब ने 1947 में संविधान सभा में फिर से निर्वाचित हुए और उन्होंने सविधान लिखने में अपना योगदान दिया. लेकिन कांग्रेस उनसे यह भी छिनना चाहते थे.

बाबा साहेब को स्वतंत्र भारत का पहला कानून मंत्री बनाया गया. जिसके बाद बाबा साहेब हिन्दू कोड बिल लेकर आए, लेकिन कांग्रेस ने उनका हिन्दू कोड बिल पारित नहीं होने दिया. जिसके बाद बाबा साहेब ने अपने पद से त्याग पत्र दे दिया था. जिससे कांग्रेस अपने मकशद में कामयाब हो गए थे. जिसके बाद बाबा साहेब ने कहा कांग्रेस का दोगलापन है. वह एक तरफ समाज सुधार वाली छवि कहते है दूसरी तरफ कांग्रेस पिछड़े वर्ग के बारे में सोचती तक नहीं है.

कांग्रेस का दोगलापन बाबा साहेब के आड़े हमेशा आता रहा था. कांग्रेस को चिंता थी कि कही बाबा साहेब की विचारधारा से जनता कांग्रेस को महत्व कम न देने लेगे. जिसक कारण जब बाबा साहेब की मृत्यु हुई थी तो उनके शव को कांग्रेस ने  मुंबई पहुच दिया था, क्यों कि कांग्रेस नहीं चाहती थी की उनका स्मारक दिल्ली में बने, उस समय दिल्ली राजनीति का हब होता था और गांधी का पहले से ही दिल्ली में स्मारक था, इसीलिए कांग्रेस ने अम्बेडकर का स्मारक भी दिल्ली नहीं बने दिया.

बाबा साहेब इतने महान विद्वान् थे, उन्हें उनके जीते जी भारत रत्न मिल जाना चाहिए था लेकिन कांग्रेस ने हमेशा उनके कामों को छुपाया और उनके कामों को उभर कर नहीं आने दिया. न उन्हें भारत रत्न दिया. उनके मृत्यु के 32 सालों बाद बाबा साहेब को भारत रत्न से नवाजा गया. 32 सालों बाद उनकी योगदान का फल मिला.

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