Tarique Rahman India visit: बांग्लादेश के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव गहरा गया है। ढाका ने साफ संकेत दिया है कि इस दौरे के लिए अनुकूल माहौल बनना जरूरी है और इसके लिए भारत को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत अन्य आरोपियों के प्रत्यर्पण पर तेजी से कदम उठाने होंगे। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उन्होंने भारत से दोनों देशों के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते के तहत शेख हसीना और शहीद शरीफ उस्मान हादी की हत्या के आरोपियों को तुरंत सौंपने की मांग की है।
ढाका की ओर से इन मांगों को भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों के लिए ‘रेड लाइन’ माना जा रहा है। वहीं नई दिल्ली में भी यह समझा जा रहा है कि प्रत्यर्पण के इस अनुरोध पर भारत को अपना रुख स्पष्ट करना होगा। शेख हसीना को बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल द्वारा मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराया जा चुका है और स्थानीय अदालतों ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है। इसके अलावा उनकी पार्टी अवामी लीग पर भी प्रतिबंध लगाया जा चुका है। हसीना के प्रत्यर्पण की मांग सबसे पहले 2024 में तत्कालीन अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में उठी थी, जिसे फरवरी 2026 में सत्ता संभालने वाली बीएनपी (BNP) सरकार ने भी दोहराया है।
5 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस से बिगड़ी बात| Tarique Rahman India visit
दोनों देशों के बीच तारिक रहमान की भारत यात्रा के लिए 21 अगस्त की तारीख प्रस्तावित की गई थी। लेकिन 5 अगस्त को नई दिल्ली स्थित ‘फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया’ (FCC) में शेख हसीना द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बातचीत का माहौल बिगड़ गया। इस प्रेस वार्ता में हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की योजना बताई थी और अपनी हत्या की आशंका भी जताई थी।
ढाका ने इसे भारतीय सरकार की सहमति के रूप में देखा और कड़ा ऐतराज जताया। हालांकि भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के आयोजन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी और न ही वह हसीना के बयानों का समर्थन करती है।
कूटनीतिक स्तर पर विरोध और बैठकें
रिपोर्ट के अनुसार, जब हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस की जानकारी मिली थी, तब बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को फोन कर सीधा विरोध दर्ज कराया था। इसके साथ ही बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात कर चिंता जताई थी। बाद में तारिक रहमान और भारतीय उच्चायुक्त की मुलाकात में भी स्पष्ट कर दिया गया कि जब तक प्रत्यर्पण पर भारत की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक यह दौरा कठिन होगा।
‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति और क्षेत्रीय संतुलन
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे संप्रभु समानता, राष्ट्रीय सम्मान और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल न देने के सिद्धांत पर आधारित ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति को आगे बढ़ाएंगे। जून से ही दोनों देशों के बीच यात्रा को लेकर चर्चा चल रही थी, लेकिन अवैध प्रवासियों को हिरासत में लेकर वापस भेजने की खबरों से पहले ही तनाव बना हुआ था। इसके बाद तारिक रहमान अपनी पहली द्विपक्षीय यात्रा पर चीन गए, जिसे कूटनीतिक रूप से एक बड़ा संकेत माना गया।
तनाव कम करने के लिए भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ (R&AW) के प्रमुख पराग जैन ने 9 अगस्त को ढाका का दौरा कर सुरक्षा व खुफिया अधिकारियों से बातचीत की। फिलहाल दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान तलाश रहे हैं, लेकिन 21 अगस्त की प्रस्तावित तारीख को देखते हुए समय बहुत कम बचा है।
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