Agarkar Rohit Sharma controversy: टी20 वर्ल्ड कप 2024 और 2026 के खिताब, वनडे वर्ल्ड कप 2023 का फाइनल, चैंपियंस ट्रॉफी, 2 एशिया कप और एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल बतौर चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर के करीब तीन साल के कार्यकाल में भारतीय टीम की झोली ट्रॉफियों से भरी रही। इसके बावजूद अगरकर ने अपना कार्यकाल आगे न बढ़ाने का फैसला कर लिया और न ही क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें रोकने में कोई दिलचस्पी दिखाई। जहां कुछ महीने पहले तक माना जा रहा था कि वे 2027 के वनडे वर्ल्ड कप तक अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे, वहीं अचानक हालात ऐसे बदले कि 3 अक्टूबर को उनका सफर खत्म होने जा रहा है। सवाल उठता है कि आखिर बंद कमरों में ऐसा क्या हुआ कि इस शानदार दौर का इतना कड़वा अंत हुआ?
रोहित शर्मा के भविष्य पर खींचतान और बिगड़ी बात| Agarkar Rohit Sharma controversy
इस पूरे विवाद की पहली बड़ी चिंगारी इंग्लैंड दौरे के दौरान सुलगी। चयन समिति के भीतर यह सहमति बन चुकी थी कि रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर कड़ा फैसला लिया जाए। अगरकर ने साउथ जोन के चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा को यह जिम्मा सौंपा कि वे रोहित से बात करके उन्हें स्थिति समझाएं।
हालांकि, यह तरीका पूर्व कप्तान को बिल्कुल पसंद नहीं आया। उन्होंने इस मामले को सीधे बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों के सामने उठाया और नाराजगी जताई। जब इंग्लैंड दौरे के दौरान रोहित के संन्यास की अटकलें मीडिया में तैरने लगीं, तो बोर्ड सचिव देवजित सैकिया ने सार्वजनिक बयान देकर साफ कर दिया कि रोहित की जगह को कोई खतरा नहीं है। बोर्ड के इस यू-टर्न ने अगरकर को असहज कर दिया और उन्हें लगा कि उनके फैसलों को बैकअप नहीं मिल रहा है।
वीवीएस लक्ष्मण के साथ टकराव और तालमेल की कमी
रोहित विवाद तो सिर्फ शुरुआत थी; असल खाई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ नीतिगत मतभेदों के चलते गहरी हुई। दोनों दिग्गजों के बीच कई अहम मुद्दों पर राय अलग-अलग रही:
- एशियन गेम्स 2026 की टीम पर रार: पिछली बार की तरह अगरकर इस बार भी दूसरे दर्जे (बी-टीम) के खिलाड़ियों को भेजना चाहते थे। वहीं, इस अभियान की कमान संभाल रहे लक्ष्मण का मानना था कि श्रेयस अय्यर की कप्तानी में मजबूत मुख्य टीम भेजी जाए। आखिर में लक्ष्मण की बात मानी गई, जिससे खींचतान और बढ़ गई।
- इंडिया ए का शेड्यूल: सितंबर-अक्टूबर में इंडिया ए के मुकाबलों की शेड्यूलिंग को लेकर भी दोनों के बीच सहमति नहीं बन सकी। ईरानी कप से लेकर न्यूजीलैंड दौरे पर वनडे-टी20 सीरीज और टेस्ट मैचों के कार्यक्रम को तय करने के दौरान दोनों के विचार पूरी तरह अलग नजर आए।
फिटनेस, बार-बार चोटिल होते खिलाड़ी और रिव्यू मीटिंग से दूरी
सबसे बड़ा मनमुटाव खिलाड़ियों की फिटनेस और रिहैबिलिटेशन को लेकर पैदा हुआ। अगरकर और टीम मैनेजमेंट ने कई मौकों पर प्रमुख खिलाड़ियों के बार-बार चोटिल होने पर गंभीर सवाल खड़े किए। चूंकि खिलाड़ियों की रिकवरी और फिटनेस की सीधी जिम्मेदारी CoE के कंधों पर होती है, इसलिए दोनों पक्षों में अविश्वास बढ़ता चला गया।












































