Gurdwaras in Uttar Pradesh: सिख गुरुद्वारों की इमारत भले ही छोटी या बड़ी हो, लेकिन उनकी भव्यता में रोई कमी नहीं होती। आप किसी छोटे गुरु द्वारे के दर्शन किजिय या किसी बड़े गुरुद्वारे के.. दोनो के नियमों से लेकर परंपरा तक एक समान है। जहां केवल आपको शांति और सूकून के अलावा कुछ महसूस नहीं होता है। सूकून और शांति के करीब ले जाने वाले ऐसे ही 5 गुरुद्वारें उत्तर प्रदेश में भी मौजूद है। ये गुरुद्वारे जो सिख गुरूओं के आगमन और उनके पावन चरणों के यूपी की धरती पर पड़ने की याद दिलाता है। अपने इस लेख में हम 5 ऐसे ही बड़े और नामी पावन गुरुद्वारों के बारे में जानेंगे.. जो यूपी में सिख धर्मों की लौ को और मजबूत बनायें हुए है।
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1. गुरुद्वारा तप अस्थान पक्की संगत साहिब
सिखो के नौवे गुरु गुरु तेगबहादुर जी ने अपने परिवार के साथ सिख धर्म के प्रचार के लिए ऐसी कई यात्राओं पर गए थे जहां पहले गुरु नानक देव जी यात्रा पर गए थे। इस दौरान गुरु साहिब की मां माता नानकी भी उनके साथ थी औऱ उन्होने प्रयागराज में ही पोते की चाह की थी। इस स्थान को गुरु साहिब के आने के उपलक्ष्य में भाई मती दास जी, भाई सती दास जी, भाई दयाला जी, भाई गुरबख्श जी और बाबा गुरदित्ता जी ने मिलकर पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ करके प्रकाश किया था। कहा जाता है कि जब गुरु नानक देव जी यहां यात्रा पर आये थे तब इस स्थान को प्रयाग कहा जाता था। काफी लंबे समय तक यहां एक छोटी सी इमारत ही थी लेकिन 1965 में महंत प्रीतम सिंह गुरुद्वारे का जीर्णोधार करवाया, यहां 2 मंजिला सफेद पत्थर से सजी इमारत है। वहीं गर्भग्रह एक सपाट छत वाला आयातकार हॉल है,वहीं दरबार साहिब भी सफेद संगमरमर से बना हुई एक ऊंचा सिंहासन है जिसमें श्री गुरुग्रंथ साहिब विराजमान है। यहां आने वाले सभी लोगो को लिए लंगर की सुविधा और रहने आराम करने के भी पुख्ता इंतजाम किये गए है। सिख धर्म को मानने वालों के लिए ये स्थान बेहद अहम माना जाता है।
2. गुरुद्वारा गुरु का ताल
नौवे गुरु गुरु तेग बहादुर के दिल्ली आगमन और उने शहीद होने की याद को ताजा कर देता है आगरा के नेशनल हाइवे 19 पर मौजूद गुरुद्वारा गुरु का ताल। आगरा का सिकंदरा क्षेत्र, जहां मुगल बादशाह अकबर का मकबरा मौजूद है, वहीं पास में मौजूद है गुरुद्वारा गुरु का ताल.. गुरु का ताल.. यानि की वो तालाब जो गुरु साहिब का है। इस गुरुद्वार का पूरा नाम गुरूद्वारा दपख निवारण गुरु का ताल है। ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक यहां पर सफेद संगमरमर और मुगल शैली के लाल बलुआ पत्थर से मिश्रित एक ताल बनाया गया था, जिसे मुगल बादशाह जहागींर ने बनवाया था, ताकि बारिश के पानी का जमा किया जा सकें.. लेकिन जब 1675 में गुरु तेग बहादुर औंरगजेब के आदेश के बाद दिल्ली आए तो वो यहां तालाब के पास भी रूके थे.. उन्होंने इस ताल में स्नान किया था, औऱ संगतो को प्रवचन दिया था। यहां मुगल सैनिकों ने उन पर पल पल नजर रखी थी.. और करीब 9 दिनों तक वो यहां रहे थे। इसी स्थान पर उन्होंने कश्मीरी पंडितो की धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण देने की बात स्वीकार की थी। गुरु साहिब के शहीद होने के बाद सिखो के लिए ये स्थान बेहद पवित्र हो गया। हालांकि 1970 में इस स्थान पर सफेद संगमरमर से गुरुद्वारा का निर्माण कराया गया, जो 24 घंटे सातों दिन खुला रहता है। यहां 24 घंटे लंगर सेवा होती हैवहीं गुरुद्वारे के अंदर आगंतुको के लिए किफायती सराय बनायें गए है। ये बेहद भव्य और एक शांत गुरुद्वारा है, जहां केवल भारत से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी आने वालो को मुफ्त में प्रवेश दिया जाता है।
3. गुरुद्वारा नजरबाग
आयोध्या का एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा नजरबाग, जिसे गुरुनानक गोबिंद धाम के नाम से भी जाना जाता है। इतिहासकारों की मानें तो 17वी शताब्दी में दसवे गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी खुद आयोध्या की यात्रा पर आये थे, जहां राजा मान सिंह जब उनसे मिले तो उनकी शख्सियत से इतने भावविभोर हो उठे कि उन्होंने गुरु साहिब को एक बाग उपहार में दिया और साथ ही काफी सारे नजराने भी.. इस कारण इस बगीचे का नाम नजरबाग पड़ गया। इस स्थान पर पहले गुरु गुरु नानक देव जी भी यात्रा के दौरान आये थे। इस कारण सिखो के लिए ये स्थान बेहद खास है। दो गुरुओ के आगमन के सम्मान में यहां गुरुद्वारा बनवाया गया। यहां आने वाले श्रद्धालु बंदरो को चना जरूर खिलाते है.. ऐसा करने से गुरु जी की कृपा होती है.. ये गुरुद्वारा राम मंदिर से करीब 2 किलोमीटर दूर ही है.. जो कि 24 घंटे खुला रहता है
4. गुरुद्वारा नानकपुरी
गुरुद्वारा नानकपुरी असल में टांडा क्षेत्र में है, लेकिन पहले ये बरेली क्षेत्र के अंतर्गत आता था। जन्मसाकी के मुताबिक ये स्थान पहले गुरु गुरु नानक द्वारा किए गए चमत्कार की याद में बनाया गया है। कहा जाता है कि गुरु साहिब यहां अपनी उदासी के दौरान आये थे, तब यहां पर रुहेला पठानों का कब्जा था, जो कि बेहग क्रूर होते थे, वो बच्चो की तस्करी किया करते और लोगो को गुलाम बनाते थे। इन लोगो को सबक सिखाने के लिए खुद गुरु साहिब बच्चा बन कर वहां पहुंचे तो उन्हें भी तस्करो ने पकड़ लिया औऱ एक व्यापारी को बेच दिया। व्यापारी ने गुरु जी ने पानी लाने को कहा.. लेकिन गुरु जी ने जैसे ही पात्र छुआ, इलाके के सभी नदी नालो का पानी सूख गया। चारो तरफ हाहाकार मच गया और लोग एक जगह इकट्ठा होकर प्रार्थना करने लगे। तब गुरु साहिब ने अपनी पहचान जाहिर करते हुए कहा कि बच्चो की तस्करी बंद करनी होगी.. उन्हें प्रताड़ित करना बंद करना होगी, तभी पानी वापिस आयेगा। पठानो ने अपनी गलती मानी और वादा किया कि वो सब गंदा काम छोड़ देंगे। जिसके बाद यहां पानी बहने लगा। गुरुद्वारे का मूल ढांचा 1958 में बना है। ये 24 घंटे खुला रहता है। गुरूद्वारे के पास वो नदी भी है जिसका पानी सूख गया था। यहां बच्चों के लिए मुफ्त स्कूल चलता है..वहीं आपदा के समय भी ये लोग एकजुट होकर खड़े रहते है।
5. गुरुद्वारा श्री संकट हरण दुख निवारण
कानपुर का सबसे पहला और पुराना गुरुद्वारा, गुरुद्वारा श्री संकट हरण दुख निवारण। जिसे चिंताहरण दुखनिवारण गुरुद्वारा भी कहा जाता है। गुरु नानक देव जी की याद में सरसैया घाट रोड पर पवित्र गंगा किनारे बना ये गुरुद्वारा यहां आने वाले भक्तों के सभी दुखों को हरने वाला गुरुद्वारा है। जो भी भक्त सच्चे मन से यहां मत्था टेकता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते है। ये गुरुद्वारा 24 घंटे खुला रहता है, जहां हर वक्त लंगर होता रहता है। इस गुरुद्वारे में सभी धर्मों के, सभी समुदाय के लोग मत्था टेकने आते है।












































