45 मेट्रो स्टेशन बंद और 7000 हिरासतें: सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय से मांगा जवाब, इंटरनेट बहाल करने के आदेश| Supreme Court CJP protest

Nandani | Nedrick News New Delhi Published: 13 अक्टूबर 2026, 03:47 AM Updated: 13 अक्टूबर 2026, 03:47 AM
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Supreme Court CJP protest: शनिवार को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान शहर में मेट्रो बंद करने, इंटरनेट पर रोक लगाने और 7 हजार से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। रविवार को हुई विशेष सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने अपने 9 अक्टूबर के आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर गृह मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। कोर्ट ने अधिकारियों से हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि अदालत के आदेश की अवहेलना करने पर उनके खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

हालांकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने नोटिस जारी किए जाने पर आपत्ति जताई, लेकिन कोर्ट ने साफ किया कि अधिकारियों को यह बताना ही होगा कि प्रदर्शन के दौरान इतनी सख्त कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई।

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मेट्रो और रेल सेवा बंदी पर अदालत के तीखे सवाल| Supreme Court CJP protest

सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को स्पष्ट निर्देश दिया था कि सुरक्षा के नाम पर मेट्रो और रेल सेवाओं को पूरी तरह ठप नहीं किया जाना चाहिए और यदि कोई जरूरी पाबंदी लगानी हो तो उसकी एडवाइजरी पहले सार्वजनिक की जाए। इसके बावजूद शनिवार को करीब आधा दर्जन ट्रेनें रद्द हुईं और दिल्ली के 45 मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाई गईं।

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) से उन सभी स्टेशनों का नक्शा पेश करने को कहा, जहां एंट्री और एग्जिट बंद या सीमित किए गए थे। अदालत ने पूछा कि पहले 57 स्टेशन बंद करने की बात थी, फिर 45 स्टेशनों पर ही रोक क्यों लगाई गई और यात्रियों को हुई असुविधा का आकलन क्या है? इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि कुल 303 स्टेशनों में से केवल 45 पर एंट्री-एग्जिट सीमित किया गया था और शनिवार रात 10 बजे तक सभी स्टेशन खोल दिए गए थे, जिसके दौरान 7,981 ट्रेन ट्रिप सामान्य रूप से संचालित हुईं।

इंटरनेट बहाल रखने और गैर-जरूरी बैरिकेड हटाने का आदेश

सेंट्रल दिल्ली समेत कई इलाकों में 10 अक्टूबर को इंटरनेट बंद किए जाने पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई। अदालत ने निर्देश दिया कि दिल्ली में इंटरनेट सेवाएं चालू रखी जाएं और आम नागरिकों की आवाजाही को सामान्य किया जाए। कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट पर कोई भी रोक तय कानूनी नियमों के तहत ही हो सकती है, बिना ठोस आधार के सेवाएं ठप नहीं की जा सकतीं। साथ ही, ट्रैफिक को सुचारू बनाने के लिए बैरिकेडिंग की तत्काल समीक्षा करने और गैर-जरूरी बैरिकेड हटाने का आदेश दिया।

बिना बैज पुलिस कार्रवाई और 7000 से ज्यादा हिरासतों पर जवाब तलब

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने दलील रखी कि नागरिकों को संविधान के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन का मौलिक अधिकार है, लेकिन लोगों को तय स्थल पर पहुंचने से रोका गया और 7 हजार से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर जवाब मांगते हुए कहा कि पुलिस कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में होनी चाहिए। अदालत ने बिना नेम बैज के पुलिसकर्मियों द्वारा कार्रवाई करने, अत्यधिक बल प्रयोग और अवैध हिरासत के आरोपों पर अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है।

अब गृह मंत्रालय के अधिकारियों को हलफनामा दाखिल कर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को तय की गई है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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