Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार सुबह उस वक्त अचानक हलचल मच गई, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को उनके अनशन स्थल से हटाने के लिए दिल्ली पुलिस ने विशेष अभियान चलाया। पिछले 20 दिनों से अनशन पर बैठे वांगचुक को शनिवार सुबह उनके अनशन के 21वें दिन पुलिस ने वहां से हटाकर सीधे सफदरजंग अस्पताल पहुंचा दिया। पूरी कार्रवाई इतनी सुनियोजित थी कि मौके पर मौजूद कई प्रदर्शनकारी शुरुआत में समझ ही नहीं पाए कि आखिर हो क्या रहा है।
सुबह-सुबह शुरू हुआ ऑपरेशन| Sonam Wangchuk Hunger Strike
शनिवार सुबह करीब 7 बजे जंतर-मंतर पर अचानक पुलिस की गतिविधियां बढ़ने लगीं। मौके पर पहले से मौजूद प्रदर्शनकारियों को कुछ समझ आता, उससे पहले ही बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, जिनमें कई सिविल ड्रेस में भी थे, मंच की ओर बढ़ गए। पुलिस ने सबसे पहले मंच को चारों तरफ से बड़ी सफेद चादरों से ढक दिया, ताकि कार्रवाई के दौरान भीड़ न जुटे और अनावश्यक अफरा-तफरी की स्थिति न बने। कुछ ही मिनटों बाद सोनम वांगचुक को मंच से नीचे उतारकर एंबुलेंस तक ले जाया गया। इस दौरान उन्होंने हाथ उठाकर अपने समर्थकों को अपनी मौजूदगी का संकेत भी दिया।
सफदरजंग अस्पताल में भर्ती, हालत स्थिर
जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद सोनम वांगचुक को सीधे सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में शुरुआती मेडिकल जांच के बाद जारी हेल्थ बुलेटिन में उनकी हालत स्थिर बताई गई है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय से अनशन पर रहने की वजह से उनकी लगातार निगरानी जरूरी है और मेडिकल टीम उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद बनी रणनीति
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हाईकोर्ट के आदेश के बाद वांगचुक को अनशन स्थल से हटाने की योजना बनाई गई। बताया जा रहा है कि दिल्ली के नए पुलिस आयुक्त के कार्यभार संभालने के बाद हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में पूरे ऑपरेशन की रणनीति तैयार की गई थी। कोशिश यही थी कि कार्रवाई पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे और किसी तरह का टकराव या हंगामा न हो।
कम प्रदर्शनकारी हों, इसलिए चुना गया सुबह का समय
सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों ने जानबूझकर सुबह का समय चुना, क्योंकि उस समय प्रदर्शनकारियों की संख्या सबसे कम रहती है। पुलिस ने उस वक्त का भी इंतजार किया, जब सोनम वांगचुक के करीबी सहयोगी अभिजीत दीपके कुछ देर के लिए प्रदर्शन स्थल से बाहर चले गए थे। इसके बाद ऑपरेशन शुरू किया गया। करीब 30 से 35 पुलिसकर्मी, जिनमें नई दिल्ली जिले की स्पेशल स्टाफ और स्थानीय पुलिस के जवान शामिल थे, सादे कपड़ों में बैरिकेडिंग के भीतर पहुंचे ताकि किसी को पहले से कार्रवाई की भनक न लगे।
तीन चरणों में पूरा हुआ पूरा अभियान
दिल्ली पुलिस ने इस पूरे ऑपरेशन को तीन चरणों में अंजाम दिया। पहले चरण में सिविल ड्रेस में मौजूद पुलिसकर्मियों ने मंच और आसपास के इलाके को अपने नियंत्रण में लिया और सोनम वांगचुक को सुरक्षित बाहर निकाला। दूसरे चरण में सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान बैरिकेडिंग के बाहर तैनात रहे। उनकी जिम्मेदारी थी कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित रखा जाए और किसी तरह का विवाद या झड़प न होने पाए।
तीसरे चरण में दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कंट्रोल प्वाइंट से पूरे ऑपरेशन की निगरानी करते रहे। एंबुलेंस और पुलिस वाहनों की आवाजाही पर भी लगातार नजर रखी गई।
एंबुलेंस के लिए पहले से था पूरा इंतजाम
जैसे ही सोनम वांगचुक को एंबुलेंस में बैठाया गया, ट्रैफिक पुलिस पहले से अलर्ट थी। एंबुलेंस के लिए पूरा रास्ता खाली कराया गया ताकि उन्हें बिना किसी देरी के सीधे सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया जा सके। दूसरी ओर, अस्पताल के अंदर और बाहर पहले से पुलिस बल तैनात कर दिया गया था और डॉक्टरों की टीम को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए थे।
बहुत सीमित अधिकारियों को थी जानकारी
पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी केवल चुनिंदा वरिष्ठ अधिकारियों तक ही सीमित रखी गई थी। इंस्पेक्टर स्तर तक के अधिकारियों को भी पूरी योजना पहले से नहीं बताई गई थी। उन्हें सिर्फ तय समय पर मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए गए थे। इसका मकसद ऑपरेशन की गोपनीयता बनाए रखना और बिना किसी बड़े विरोध के कार्रवाई पूरी करना था।
21वें दिन खत्म हुआ जंतर-मंतर का अनशन
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक बीते 20 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे। यह प्रदर्शन NEET पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा था। शनिवार सुबह उनके अनशन के 21वें दिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें वहां से हटाया और बाद में प्रदर्शनकारियों से भी शांतिपूर्वक जंतर-मंतर खाली करने की अपील की। फिलहाल वांगचुक अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी सेहत पर डॉक्टरों की लगातार नजर बनी हुई है।































