अरुणाचल पर चीन को भारत का दो टूक जवाब, नक्शे में 27 जगहों को भारतीय नाम से दर्ज किया| BRICS Summit 2026

Nandani | Nedrick News Arunachal Pradesh Published: 11 अगस्त 2026, 04:41 AM Updated: 11 अगस्त 2026, 04:41 AM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

BRICS Summit 2026: अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच चल रहे विवाद के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी स्थिति साफ कर दी है। भारत सरकार ने सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे को अपडेट करते हुए अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा से जुड़े 27 महत्वपूर्ण स्थानों को भारतीय नामों के साथ दर्ज किया है। इनमें पहाड़ी दर्रे, झीलें, बस्तियां और 1962 के भारत-चीन युद्ध से जुड़ा एक युद्ध स्मारक भी शामिल है।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश को ‘जंगनान’ या ‘दक्षिण तिब्बत’ बताता रहा है और वहां के अलग-अलग स्थानों के नाम चीनी भाषा में बदलने की कोशिश करता रहा है। भारत पहले भी साफ कर चुका है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है और चीन की ओर से नाम बदलने से जमीन पर स्थिति नहीं बदल सकती।

और पढ़ें: मैं बाबा बागेश्वर तो नहीं हूं… PM मोदी की इस बात पर खूब हंसे IIT छात्र, फिर दिया जिंदगी का बड़ा मंत्र| PM Modi IIT Delhi Speech

चीन की नाम बदलने की रणनीति का जवाब| BRICS Summit 2026

चीन ने 2017, 2021 और 2023 में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के लिए अपने नाम जारी किए थे। भारत ने हर बार इन दावों को खारिज किया। अब आधिकारिक नक्शे में संबंधित जगहों को भारतीय नामों से दर्ज करना इसी रुख को और मजबूत करता है।

सरकार के मुताबिक, नक्शे में इन जगहों की स्पष्ट पहचान होने से न सिर्फ प्रशासनिक रिकॉर्ड बेहतर होगा, बल्कि लोगों के बीच भी इन स्थानों को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। सीमा विवाद वाले इलाकों में किसी जगह का नाम और उसकी आधिकारिक पहचान काफी मायने रखती है। ऐसे में यह अपडेट केवल नक्शे में कुछ नाम जोड़ने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि भारत की क्षेत्रीय और प्रशासनिक स्थिति का भी संकेत है।

नक्शे में कौन-कौन सी जगहें शामिल हुईं?

अपडेट किए गए नक्शे में चार प्रमुख पहाड़ी दर्रों द्जो ला, रिजा ला, पुकुर ला और थग ला को शामिल किया गया है। इनमें थग ला का खास रणनीतिक और ऐतिहासिक महत्व है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के शुरुआती दौर में यहां संघर्ष हुआ था। इसके अलावा सांबो सरोवर को भी भारतीय नाम के साथ नक्शे में दर्ज किया गया है।

बाकी स्थानों में लॉन्गजू, माजा, बीसा, बड़ा कुंदुन, छोटा कुंदुन, धन बारी, प्रीतनगर, बुद्धमंदिर, जयरामपुर, तेरीतनगर, रामनगर, जसवंत गढ़, सागर, पद्मा, ज्योतिनगर, बैसाखी, छोटा रोपुक, बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा और कामलंग नगर शामिल हैं। इसके साथ ही शेर-ए-थापा मेमोरियल को भी नक्शे में जगह दी गई है। यह स्मारक 1962 के युद्ध में बहादुरी दिखाने वाले हवलदार शेर-ए-थापा की याद में बनाया गया है।

कई जगहों का 1962 के युद्ध से पुराना रिश्ता

इनमें से कई जगहें पहले से सैन्य नक्शों में दर्ज थीं, लेकिन अब उन्हें आधिकारिक राजनीतिक नक्शे में भी शामिल किया गया है। लॉन्गजू एलएसी से जुड़ा इलाका है और 1959 में भारत-चीन के शुरुआती सीमा टकरावों में से एक का केंद्र रहा था। वहीं थग ला सीधे तौर पर 1962 के युद्ध से जुड़ा है।

पूर्वी अरुणाचल का जयरामपुर भी अहम है। यह लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण इलाका है और म्यांमार सीमा की दिशा में संपर्क को मजबूत करता है। दूसरी ओर, जसवंत गढ़ 1962 के संघर्ष और भारतीय सैनिकों की बहादुरी की याद दिलाता है।

इन जगहों को आधिकारिक नक्शे में शामिल किए जाने से पूर्वी सेक्टर की रणनीतिक अहमियत भी सामने आती है। इस इलाके में 1962 के दौरान भारी लड़ाई हुई थी और चीन के क्षेत्रीय दावे आज भी विवाद का हिस्सा हैं। तवांग के आसपास का इलाका भी इसी वजह से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

बातचीत जारी, लेकिन दावे पर समझौता नहीं

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर सैन्य और कूटनीतिक बातचीत का सिलसिला जारी है। 6 अगस्त को नई दिल्ली में भारत-चीन सीमा मामलों पर कार्यकारी तंत्र (WMCC) की 36वीं बैठक हुई। इसमें दोनों देशों ने एलएसी की स्थिति की समीक्षा की और सीमा पर शांति तथा स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया।

ऐसे में नक्शे का यह अपडेट एक खास संदेश देता है। भारत एक तरफ चीन के साथ बातचीत और सीमा पर शांति की कोशिश जारी रख रहा है, वहीं दूसरी तरफ अरुणाचल प्रदेश पर अपने क्षेत्रीय दावे से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

BRICS से पहले क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

यह घटनाक्रम सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले सामने आया है। 12 और 13 सितंबर को प्रस्तावित इस सम्मेलन में अगर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो 2019 के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी।

2020 के पूर्वी लद्दाख संकट के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव रहा है। हालांकि, हाल के समय में भारत और चीन संबंधों में धीरे-धीरे स्थिरता लाने की कोशिश कर रहे हैं। BRICS सम्मेलन में वैश्विक मुद्दों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग पर चर्चा होगी, लेकिन दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का मुद्दा पृष्ठभूमि में अहम बना रहेगा।

और पढ़ें: ईरान-इजरायल तनाव के बीच मोदी-नेतन्याहू की सीधी बात, मिडिल ईस्ट संकट पर भारत की नजर! India Israel relations news

Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

Recent News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds