टाइम नहीं है का बहाना कहीं पड़ न जाए भारी: डॉक्टरों ने बताया कैसे बिजी लाइफस्टाइल बन रहा है साइलेंट किलर| Busy Lifestyle Health Risks

Nandani | Nedrick News Ghaziabad Published: 26 अगस्त 2026, 02:22 AM Updated: 26 अगस्त 2026, 02:22 AM
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Busy Lifestyle Health Risks: सुबह से शाम तक स्क्रीन के आगे बैठकर काम निपटाना और फिर यह कहना कि ‘एक्सरसाइज का तो वक्त ही नहीं मिलता‘… यह आज के दौर का कड़वा सच बन चुका है। हम में से ज्यादातर लोग जानबूझकर सेहत को नजरअंदाज नहीं करते, बल्कि काम के बोझ तले सही खान-पान, नींद और थोड़ी-बहुत फिजिकल एक्टिविटी खुद-ब-खुद पीछे छूट जाती है। यही सुस्त दिनचर्या अब साइलेंट किलर का रूप ले चुकी है।

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छोटी-छोटी लापरवाहियां बन रहीं नया ‘नॉर्मल’| Busy Lifestyle Health Risks

व्यस्त दिनचर्या के चलते समय पर खाना न खाना, भूख लगने पर रेडी-टू-ईट जंक फूड से पेट भर लेना, काम का प्रेशर खत्म करने के लिए नींद की बलि चढ़ा देना और वर्कआउट को अनिश्चित समय के लिए टाल देना आजकल आम बात हो गई है। शुरुआत में ये आदतें बहुत मामूली लगती हैं, लेकिन धीरे-धीरे यही हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे एक ‘साइलेंट किलर’ मानते हैं, जो बिना किसी बड़े शुरुआती लक्षण के शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा होता है।

दिक्कत वक्त की नहीं, प्राथमिकताओं के चुनाव की है

डॉक्टरों के मुताबिक, ज्यादातर लोगों के पास असल में समय की नहीं, बल्कि सही और व्यवस्थित आदतों की कमी होती है।

  • दिन में महज 10 से 15 मिनट टहलना
  • तय समय पर पौष्टिक भोजन करना
  • 7 से 8 घंटे की भरपूर और गहरी नींद लेना

ये कोई ऐसे मुश्किल काम नहीं हैं जिनके लिए घंटों का अलग से इंतजाम करना पड़े। लेकिन चूंकि इन छोटी-छोटी आदतों का फायदा तुरंत दिखाई नहीं देता, इसलिए लोग इन्हें आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं। इसके विपरीत ऑफिस के काम का तुरंत आउटपुट मिलता है, जिससे हम अनजाने में सेहत से समझौता कर बैठते हैं। ब्लड प्रेशर का बढ़ना, शुगर लेवल बिगड़ना और मेटाबॉलिज्म का सुस्त पड़ना शुरुआती दौर में कोई चेतावनी नहीं देते, लेकिन जब तक लक्षण उभरते हैं, तब तक शरीर को बड़ा नुकसान पहुंच चुका होता है।

‘बिजी’ होने का कतई मतलब ‘एक्टिव’ होना नहीं है

अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर उनका दिन भर का शेड्यूल पैक है तो वे एक्टिव हैं। हकीकत यह है कि आज का वर्क कल्चर बेहद निष्क्रिय (Sedentary) हो चुका है। दिन के 8 से 10 घंटे लगातार स्क्रीन के सामने कुर्सी पर बैठकर बिताना शरीर को नुकसान पहुंचाता है। कम फिजिकल मूवमेंट की वजह से शरीर शुगर और फैट को सही तरीके से प्रोसेस नहीं कर पाता, जिससे फैटी लिवर, टाइप-2 डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

तनाव, नींद की कमी और हार्मोन्स का खतरनाक चक्र

कम नींद शरीर के हार्मोनल बैलेंस को पूरी तरह बिगाड़ देती है, जिससे हर वक्त थकान और बेवजह ज्यादा भूख लगने की समस्या होने लगती है। लगातार बना रहने वाला तनाव शरीर में कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) के स्तर को बढ़ा देता है, जो पेट के आसपास जिद्दी फैट जमा करने का मुख्य कारण बनता है। यह एक खतरनाक चक्र बन जाता है कम नींद से तनाव, तनाव से गलत खान-पान और फिर मेटाबॉलिज्म की बर्बादी। अगर आज हमने सेहत के लिए थोड़ा समय नहीं निकाला, तो कल मजबूरी में इलाज के लिए वक्त और पैसा दोनों गंवाना पड़ेगा।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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