Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्ट्री कज़गम (टीवीके) सरकार पर सत्ता में आने के महज 100 दिन बाद ही भ्रष्टाचार का पहला बड़ा आरोप लगा है। मुख्यमंत्री विजय द्वारा अपना कार्यालय (सीएमओ) दूसरे भवन में शिफ्ट करने की योजना को लेकर राज्य की सियासत गर्मा गई है। विपक्षी द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (डीएमके) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों ने इस कदम को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं और टेंडर प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी का दावा किया है।
विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जनादेश हासिल कर सत्ता में आई विजय सरकार ने हमेशा से भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और पारदर्शी शासन देने का दावा किया था। हालांकि, अब इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा ने नए सीएमओ के लिए जारी किए गए 5.54 करोड़ रुपये के टेंडर में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए टीवीके सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।
क्या है पूरा विवाद? Tamil Nadu Politics
यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री विजय के उस फैसले के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने सीएम कार्यालय को फोर्ट सेंट जॉर्ज के मुख्य ब्लॉक से हटाकर पास ही स्थित ‘नमक्कल कविंगर मालीगई’ भवन में शिफ्ट करने का फैसला किया। हालांकि ये दोनों इमारतें एक ही सचिवालय परिसर के भीतर स्थित हैं, लेकिन टीवीके का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों और स्टाफ के काम करने के लिए अधिक जगह की जरूरत थी, इसलिए यह बदलाव किया गया। पार्टी का यह भी कहना है कि यह कदम मुख्यमंत्री के किसी निजी ऐशो-आराम के लिए नहीं उठाया गया है।
दूसरी तरफ, विपक्षी डीएमके और भाजपा का आरोप है कि नए कार्यालय का निर्माण और रेनोवेशन का काम टेंडर जारी होने से काफी पहले ही शुरू करा दिया गया था। भाजपा के राष्ट्रीय समन्वयक (डिजिटल लाइब्रेरी एंड डॉक्यूमेंटेशन) डॉ. असीर आचार्य ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि निर्माण कार्य शुरू होने के करीब एक महीने बाद पीडब्ल्यूडी ने टेंडर जारी किया।
बीजेपी का सीधा सवाल: काम पहले तो टेंडर बाद में क्यों?
डॉ. असीर आचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मुख्यमंत्री विजय ने राज्य की जनता से पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का वादा किया था, लेकिन हकीकत कुछ और ही दिख रही है। उन्होंने दावा किया कि नए कार्यालय के लिए नमक्कल कविग्नार मालीगई की पूरी 10वीं मंजिल आरक्षित की गई है और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) पिछले एक महीने से वहां रेनोवेशन का काम कर रहा था।
आचार्य के अनुसार, जब काम पहले से चल रहा था, तब अचानक इसी महीने की 12 तारीख को पीडब्ल्यूडी ने मुख्यमंत्री कार्यालय के तीन ब्लॉक बनाने के लिए ₹5.54 करोड़ का टेंडर जारी किया। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि जब काम पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों की देखरेख में महीने भर से चल रहा था, तो फिर एक महीने बाद यह टेंडर क्यों निकाला गया?
सरकार की सफाई: निजी आराम के लिए नहीं बन रहा ऑफिस
विपक्ष के इन तीखे हमलों के बीच टीवीके ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। तमिलनाडु के पीडब्ल्यूडी मंत्री और टीवीके के महासचिव आधव अर्जुन ने विपक्ष के दावों को पूरी तरह गलत करार दिया। मुख्यमंत्री विजय के करीबी माने जाने वाले अर्जुन ने स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नया कार्यालय मुख्यमंत्री की किसी व्यक्तिगत सुख-सुविधा या आराम के लिए नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।













































