Top 5 Ghaziabad News: गाजियाबाद की बड़ी खबरों में आज हम बात करेंगे यूपी रोडवेज की उन एसी बसों की, जहां यात्री पूरा किराया देने के बाद भी भीषण गर्मी में सफर करने को मजबूर हैं। साथ ही रुख करेंगे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का, जहां पुलिस ने मुठभेड़ के बाद 25 लाख की सनसनीखेज लूट करने वाले दो शातिर बदमाशों को दबोच लिया है।
इसके अलावा, कथित रोड रेज मामले में पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अहम सुनवाई पर भी नज़र रहेगी। बात करेंगे प्रशासन की उस बड़ी लापरवाही की, जहां भ्रष्टाचार छिपाने के लिए पानी की टंकियों के जर्जर होने का 30 साल तक इंतजार किया गया।
और बुलेटिन के आखिर में आपको बताएंगे कि गाजियाबाद में मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को पक्के मकान देने की क्या प्रक्रिया है और आप इसके लिए कैसे आवेदन कर सकते हैं। तो चलिए इस लेख के जरिए इन सभी खबरों को विस्तार से जानते हैं।
किराया बढ़ने के बावजूद एसी बसों में यात्रियों की परेशानी
गाजियाबाद की पहली खबर यूपी रोडवेज बसों में लापरवाही को लेकर, जहां किराया बढ़ने के बावजुद भी एसी बसों में सफर करने वाले यात्रियों को पूरा किराया देने के बाद भी भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। कौशाम्बी और आनंद विहार जैसे प्रमुख डिपो से चलने वाली इन एसी बसों की खराब कूलिंग और तकनीकी दिक्कतों को लेकर पिछले डेढ़ महीने में 20 से अधिक शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जा रहा है कि डिपो में तैनात अधिकारियों के अनुसार, बेड़े की अधिकांश एसी बसें 5 से 6 साल पुरानी हो चुकी हैं। शुरुआती 2-3 साल ठीक चलने के बाद इन बसों के एसी सिस्टम कमजोर हो गए हैं, जो अत्यधिक गर्मी में पूरी तरह फेल हो रहे हैं। भीषण गर्मी और लगातार संचालन के कारण बसों के कंप्रेसर और गैस लीकेज की समस्याएं बढ़ गई हैं।
इस समस्या के संबंध में स्थानीय डिपो अधिकारियों द्वारा परिवहन निगम मुख्यालय को रिपोर्ट और सूचनाएं भी भेजी गई हैं ताकि बसों की मरम्मत या नए बेड़े को शामिल करने पर विचार किया जा सके। यदि आप इस रूट पर यात्रा करने वाले हैं, तो उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (UPSRTC) के आधिकारिक हेल्पलाइन या शिकायत पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
एक्सप्रेसवे पर कारोबारी से लूट करने वाले बदमाशों के पैर में लगी गोली (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की दूसरी खबर पुलिस बड़ी कामयाबी को लेकर, जहां दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) पर मेरठ के ई-वेस्ट कारोबारी से 24.85 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट करने वाले दो बदमाशों को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। वेव सिटी थाना क्षेत्र के राजा जी रोड पर हुई इस पुलिस मुठभेड़ में दोनों बदमाशों के पैर में गोली लगी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जा रहा है कि गाजियाबाद अर्थला निवासी सद्दाम और मेरठ के लिसाड़ी गेट निवासी आसिफ पुलिस जवाबी फायरिंग में दोनों बदमाशों घायल हो गए है। बदमाशों के पास से लूटी गई रकम में से 5 लाख रुपये कैश, बिना नंबर की स्प्लेंडर बाइक और .315 बोर के दो अवैध तमंचे व कारतूस बरामद किए गए हैं। इन बदमाशों ने 21 अगस्त की रात को हाईटेक कॉलेज के पास कारोबारी गिलमान की थार गाड़ी को स्कॉर्पियो से ओवरटेक करके रोका था।
बदमाशों ने “हमारी लड़की गायब है, तुम अपहरण करके ले जा रहे हो” का झूठा बहाना बनाकर चेकिंग के नाम पर पिस्टल तानी और कैश लूट कर फरार हो गए थे। पुलिस जांच के अनुसार, ये बदमाश कारोबारी के दिल्ली आने-जाने की भनक पाकर मेरठ से ही उनका पीछा (रेकी) कर रहे थे। घायल बदमाशों को इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया गया है और पुलिस टीम बाकी की रकम व अन्य साथियों की तलाश में जुटी है।
पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की तीसरी खबर एक कथित रोड रेज मामले से जुड़ी है, जहां स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज (25 अगस्त 2026) सुनवाई करेगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई के लिए सहमत हुई है।
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में 18 अगस्त को दर्ज एफआईआर (कथित रोड रेज और SC/ST एक्ट के तहत मामला) को रद्द करने की मांग की है। उपाध्याय का दावा है कि उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में दान प्रबंधन में अनियमितताओं और यूपी में कथित भ्रष्टाचार को उजागर किया था, जिसके कारण उन्हें परेशान करने के लिए यह झूठी एफआईआर दर्ज की गई है।
याचिका में बताया गया है कि 20 अगस्त की रात करीब एक दर्जन पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे थे, जब वे वहां नहीं थे बल्कि केवल उनकी पत्नी और दो बेटियां थीं। पत्रकार ने अपनी तत्काल गिरफ्तारी और शारीरिक नुकसान की आशंका जताते हुए सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि माहौल को देखते हुए वे सुरक्षित रूप से इलाहाबाद हाई कोर्ट नहीं पहुंच सकते। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस के बजाय इस मामले की जांच सीबीआई (CBI) या दिल्ली पुलिस जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने का अनुरोध किया है।
3 दशक पुरानी जर्जर पानी की टंकियों को गिराने की तैयारी (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की चौथी खबर तीन दशक पुराने बड़े प्रशासनिक भ्रष्टाचार और लापरवाही के खुलासे को लेकर है, जहां निर्माण के समय हुए भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए अधिकारियों ने पानी की खराब टंकियों को ठीक करने के बजाय उनके जर्जर होने का 30 साल तक इंतजार किया। अब गाजियाबाद नगर निगम इन टंकियों को ध्वस्त करने की तैयारी कर रहा है।
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, गाजियाबाद के पटेल नगर सेकंड में 30 साल पहले एक टंकी और नंदग्राम में 37 साल पहले दो पानी की टंकियों का निर्माण हुआ था। कमाल की बात यह है कि इन तीनों टंकियों से स्थानीय लोगों को एक दिन भी पानी नसीब नहीं हुआ। पटेल नगर की टंकी में बनने के तुरंत बाद ही परीक्षण (ट्रायल) के दौरान गंभीर लीकेज की समस्या सामने आ गई थी। वहीं नंदग्राम की दोनों टंकियां निर्माण के समय ही एक तरफ झुक गई थीं। हादसे के डर से इनका कभी इस्तेमाल ही नहीं किया गया।
स्थानीय दावों के अनुसार, यदि उस समय इन टंकियों की खामियों को दूर करने या इन्हें तोड़ने का प्रयास किया जाता, तो निर्माण करने वाले ठेकेदारों और इंजीनियरों का भ्रष्टाचार तुरंत उजागर हो जाता। इस बड़ी गड़बड़ी को दबाने के लिए अधिकारियों ने 30 से 37 वर्षों तक समय बीतने का इंतजार किया। इन टंकियों का निर्माण गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने कराया था। बाद में बिना मरम्मत कराए ही इन्हें नगर निगम को हैंडओवर कर दिया गया। अब जब ये टंकियां पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, तब जाकर इन्हें गिराने की कवायद शुरू की गई है।
गरीबों के पक्के मकान के लिए पंजीकरण (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की पांचवीं खबर सरकार की जनकल्याणकारी आवास योजना से जुड़ी है। जिला प्रशासन और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) के अनुसार, पात्र लाभार्थियों के पंजीकरण और फ्लैट आवंटन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। हाल ही में डासना और वेव सिटी इलाके में किफायती फ्लैट्स को लेकर कवायद तेज हुई है, जहां गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को सरकार की तरफ से साढ़े तीन लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जहां खंड विकास अधिकारी (BDO) कार्यालय के जरिए ऑफलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं, वहीं शहरी क्षेत्र के लोग PMAY-U 2.0 पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं।
मुख्यमंत्री आवास योजना के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अनुसार आवेदन के दो अलग रास्ते हैं। पहला ग्रामीण इलाकों के लिए कोई सीधा सार्वजनिक ऑनलाइन फॉर्म उपलब्ध नहीं होता है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सर्वे और सत्यापन किया जाता है। इच्छुक और पात्र ग्रामीण अपने ग्राम प्रधान से संपर्क कर सकते हैं। आप अपने ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी (BDO) या जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (DRDA) के परियोजना निदेशक से मिलकर आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं।
आवेदन के बाद स्थानीय प्रशासन और ब्लॉक के अधिकारी पात्रता, आय और कच्चे मकान का भौतिक सत्यापन करेंगे। इसके बाद आवास सॉफ्ट पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण और स्वीकृति दी जाती है। शहरी बेघर या कम आय वाले लोग इस प्रक्रिया को अपना सकते हैं – आधिकारिक पोर्टल PMAY-MIS पर जाएं। होमपेज पर ‘Citizen Assessment’ पर क्लिक करके संबंधित श्रेणी (EWS/LIG) चुनें। अपना आधार नंबर दर्ज कर उसका सत्यापन पूरा करें। आवश्यक विवरण (आय, बैंक खाता, और व्यक्तिगत जानकारी) भरकर फॉर्म को सबमिट करें। वैकल्पिक रूप से, नगर निकाय या नगर पालिका कार्यालय में जाकर भी ऑफलाइन फॉर्म भरा जा सकता है।













































