रोहिंग्या से परेशान, पर भारत में बैठे घुसपैठियों पर मेहरबान? यूएन में बांग्लादेश के कबूलनामे से हर कोई हैरान! Bangladesh Rohingya UN crisis

Nandani | Nedrick News Bangladesh Published: 27 सितम्बर 2026, 03:38 AM Updated: 27 सितम्बर 2026, 03:38 AM
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Bangladesh Rohingya UN crisis: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के एक हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। यूएन के मंच से गुहार लगाते हुए उन्होंने कहा कि बांग्लादेश म्यांमार से आए रोहिंग्या मुस्लिमों के संकट से बुरी तरह परेशान हो चुका है और दुनिया को इस मामले में दखल देकर बांग्लादेश को इस भारी संकट से बचाना चाहिए। तारिक रहमान ने साफ कहा कि म्यांमार के ये रोहिंग्या मुस्लिम अब बांग्लादेश के सीमित संसाधनों पर बहुत बड़ा आर्थिक बोझ बन चुके हैं। हालांकि, जिस तरह बांग्लादेश अपने यहां मौजूद शरणार्थियों को बाहर करने के लिए बेचैन है, ठीक उसी मुद्दे पर भारत के प्रति उसका रुख हैरान करने वाला और पूरी तरह दोहरा नजर आता है।

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कॉक्स बाजार में दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी कैंप| Bangladesh Rohingya UN crisis

बांग्लादेश लंबे समय से यह कोशिश कर रहा है कि उसके यहां शरण लिए हुए रोहिंग्याओं को जल्द से जल्द वापस म्यांमार भेजा जाए। ढाका की सरकार सालों से देश में रह रहे इन लोगों को किसी भी सूरत में अपना नागरिक स्वीकार करने को तैयार नहीं है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वक्त बांग्लादेश के कॉक्स बाजार और उसके आसपास के इलाकों में लगभग 12 से 13 लाख रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं, जो आज दुनिया की सबसे बड़ी रिफ्यूजी बस्ती का रूप ले चुका है।

बांग्लादेश की दलील है कि इन शरणार्थियों की मौजूदगी से उसके देश की आंतरिक सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है और उसे भारी सामाजिक व आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसलिए वह लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इनकी म्यांमार वापसी का दबाव बना रहा है।

अपने नागरिकों को वापस लेने से मुकरा, भारत के लिए अलग पैमाना

हैरानी की बात यह है कि बांग्लादेश जो नियम खुद के लिए लागू करता है, वही पैमाना भारत के मामले में पलट देता है। जब भारत अपने देश में गैरकानूनी रूप से रह रहे करोड़ों अवैध बांग्लादेशियों की पहचान कर उन्हें डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू करना चाहता है, तो बांग्लादेश की सरकार अपने ही मूल नागरिकों को वापस स्वीकार करने से साफ इनकार कर देती है।

वहां के राजनीतिक हलकों से अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि जो बांग्लादेशी सीमा पार करके भारत चले गए, अब वे वहीं के होकर रह गए हैं। यानी एक तरफ बांग्लादेश दशकों से अपने मुल्क में पनाह लिए रोहिंग्याओं को नागरिकता देने के बजाय बाहर खदेड़ने पर अड़ा है, वहीं दूसरी ओर भारत में अवैध रूप से घुसे अपने ही लोगों को भारत का नागरिक मान लेने की वकालत करता है।

घुसपैठ, जाली दस्तावेज और सुरक्षा का गंभीर संकट

एक अनुमान के मुताबिक, भारत में इस वक्त डेढ़ से दो करोड़ के करीब अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए मौजूद हैं, और असल आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा भी हो सकता है। इनमें से कई घुसपैठियों के साथ रोहिंग्या शरणार्थी भी भारत की सीमाओं में दाखिल होते रहे हैं।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन अवैध घुसपैठियों ने स्थानीय दलालों और बिचौलियों की मदद से गैरकानूनी तरीके से पहचान पत्र और मतदाता पहचान पत्र तक बनवा लिए हैं। इसके चलते सीमावर्ती राज्यों और देश के कई प्रमुख शहरों में जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) तेजी से बदल रही है।

ये अवैध प्रवासी भारत के सार्वजनिक संसाधनों, सस्ते राशन, सब्सिडी और जनकल्याणकारी योजनाओं का बेजा फायदा उठा रहे हैं, जिसका सीधा असर भारत के वैध और स्थानीय नागरिकों के हकों पर पड़ रहा है। इसके अलावा, सीमावर्ती इलाकों में अपराध, तस्करी और स्थानीय स्तर पर सामाजिक तनाव बढ़ने की घटनाओं में भी घुसपैठियों की भूमिका लगातार सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सिरदर्दी बनी हुई है।

वोट बैंक की राजनीति और भारत का अगला कदम

जब भी भारत कानूनी तरीके से इन अवैध प्रवासियों और घुसपैठियों को बाहर निकालने की दिशा में सख्त कदम उठाता है, तो देश के भीतर ही कई राजनीतिक दल, कुछ संगठन और कथित बुद्धिजीवी इसे मानवाधिकार और अल्पसंख्यकों का मुद्दा बनाकर विरोध शुरू कर देते हैं, जिसके पीछे वोट बैंक की राजनीति साफ झलकती है।

बांग्लादेश के लिए रोहिंग्या जितना बड़ा संकट हैं, उससे कहीं ज्यादा बड़ा राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक संकट भारत के लिए ये अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए बन चुके हैं। ऐसे में अब समय आ गया है कि भारत भी संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों पर पूरी आक्रामकता के साथ यह आवाज उठाए कि बांग्लादेश अपनी जमीन से अवैध तरीके से भारत में घुसे नागरिकों को तुरंत और बिना शर्त वापस बुलाए।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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