US Green Card Guide: अमेरिका में नौकरी कर रहे लाखों भारतीय प्रोफेशनल्स का सबसे बड़ा सपना वहां की परमानेंट रेजिडेंसी यानी ‘ग्रीन कार्ड’ हासिल करना होता है। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से नया वीजा बुलेटिन जारी किया गया है, जिसमें अलग-अलग कैटेगरी के लिए वेटिंग टाइम और कटऑफ डेट्स बताई गई हैं। हालांकि, कई भारतीय वर्कर्स एंप्लॉयमेंट-बेस्ड (EB) कैटेगरी, प्रायोरिटी डेट और स्टेटस एडजस्टमेंट के नियमों को लेकर अक्सर उलझन में रहते हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि अमेरिका में रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने का पूरा प्रोसेस क्या है और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
एंप्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड की मुख्य कैटेगरी कौन-सी हैं?| US Green Card Guide
यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड को मुख्य रूप से तीन प्राथमिकता श्रेणियों में बांटा है:
- EB-1 (प्रायोरिटी वर्कर्स): इस कैटेगरी में एक्स्ट्राऑर्डिनरी एबिलिटी (असाधारण क्षमता) वाले लोग, जाने-माने प्रोफेसर, अंतरराष्ट्रीय स्तर के रिसर्चर्स और मल्टीनेशनल कंपनियों के सीनियर मैनेजर्स व एग्जीक्यूटिव्स शामिल होते हैं।
- EB-2 (एडवांस्ड डिग्री प्रोफेशनल्स): इसमें मास्टर डिग्री या उससे ऊपर की योग्यता रखने वाले प्रोफेशनल्स आते हैं। इसके अलावा, असाधारण योग्यता वाले ऐसे लोग भी इसमें शामिल हैं जो ‘नेशनल इंटरेस्ट वेवर’ (NIW) के जरिए बिना कंपनी स्पांसरशिप के भी आवेदन कर सकते हैं।
- EB-3 (स्किल्ड वर्कर्स और प्रोफेशनल्स): इस श्रेणी में बैचलर्स डिग्री धारक प्रोफेशनल्स, स्किल्ड वर्कर्स (जिनके पास कम से कम 2 साल का अनुभव हो) और अन्य आवश्यक वर्कर्स शामिल होते हैं।
क्या H-1B वीजा धारकों को अपने-आप मिल जाता है ग्रीन कार्ड?
कई लोगों को लगता है कि H-1B वीजा मिलते ही ग्रीन कार्ड का रास्ता अपने-आप साफ हो जाता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। H-1B केवल एक नॉन-इमिग्रेंट वर्क वीजा है, जो कुछ तय समय के लिए अमेरिका में कानूनी रूप से काम करने की इजाजत देता है। ग्रीन कार्ड पाने के लिए आवेदक को अपनी योग्यता के अनुसार सही EB कैटेगरी चुनकर अलग से पूरी इमिग्रेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
क्या हर केस में कंपनी की स्पांसरशिप जरूरी है?
अधिकांश EB-2 और EB-3 मामलों में नियोक्ता (कंपनी) की स्पांसरशिप जरूरी होती है। लेकिन हर मामले में ऐसा होना अनिवार्य नहीं है। उदाहरण के लिए, EB-2 NIW (नेशनल इंटरेस्ट वेवर) और EB-1 की असाधारण क्षमता वाली श्रेणी में योग्य प्रोफेशनल्स बिना किसी कंपनी के जॉब ऑफर या स्पांसरशिप के भी खुद आवेदन (Self-petition) कर सकते हैं।
प्रायोरिटी डेट और वीजा बुलेटिन का क्या रोल है?
- प्रायोरिटी डेट (Priority Date): यह ग्रीन कार्ड की कतार में आवेदक की आधिकारिक जगह तय करती है। आमतौर पर जिस दिन डिपार्टमेंट ऑफ लेबर ‘लेबर सर्टिफिकेशन’ (PERM/LCA) स्वीकार करता है या जब USCIS के पास इमिग्रेंट पिटीशन (फॉर्म I-140) सही तरीके से दर्ज होती है, वही तारीख आवेदक की प्रायोरिटी डेट बन जाती है।
- वीजा बुलेटिन (Visa Bulletin): डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट हर महीने वीजा बुलेटिन जारी करता है। चूंकि भारत जैसे देशों के लिए सालाना ग्रीन कार्ड कोटा सीमित है, इसलिए आवेदकों को अपनी प्रायोरिटी डेट की तुलना भारत के लिए तय कटऑफ डेट से करनी होती है। यह तारीखें मांग के आधार पर आगे बढ़ सकती हैं, स्थिर रह सकती हैं या पीछे (Retrogression) भी जा सकती हैं।
I-140 मंजूर होने के बाद क्या तुरंत फॉर्म I-485 भरा जा सकता है?
नहीं, फॉर्म I-140 का अप्रूवल मिलते ही आप तुरंत फॉर्म I-485 (स्टेटस बदलने का आवेदन) फाइल नहीं कर सकते। इसके लिए वीजा बुलेटिन में आपकी प्रायोरिटी डेट का करंट होना जरूरी है। ‘एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस’ प्रक्रिया के जरिए अमेरिका में पहले से रह रहे प्रोफेशनल्स बिना देश छोड़े परमानेंट रेजिडेंट बन सकते हैं। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया के दौरान आवेदक वर्क परमिट (EAD) और यात्रा के लिए एडवांस पैरोल (AP) भी हासिल कर सकते हैं।













































