Harry Lee biography: क्रिकेट के इतिहास में एक से बढ़कर एक जांबाज और जुनूनी खिलाड़ी देखने को मिले हैं, लेकिन इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर हैरी ली की दास्तान किसी फिल्मी चमत्कार से कम नहीं लगती। 26 अक्टूबर 1890 को जन्मे हैरी ली को प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मोर्चे पर मृत मान लिया गया था और उनके घर पर बाकायदा शोक सभा तक हो गई थी। लेकिन दो-दो बार मौत को चकमा देकर लौटे इस खिलाड़ी ने न केवल अपनी छोटी हो चुकी टांग के बावजूद मैदान पर वापसी की, बल्कि 20 हजार से ज्यादा रन ठोके और 40 की उम्र में टेस्ट क्रिकेट भी खेला।
जंग के मैदान में 3 दिन बेहोश, घर में आयोजित हो गई शोक सभा| Harry Lee biography
लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर ग्राउंड स्टाफ के तौर पर शुरुआत करने वाले हैरी ली ने मिडिलसेक्स की काउंटी टीम में जगह बनाई थी। सितंबर 1914 में वे ब्रिटिश सेना में शामिल हुए। 9 मई 1915 को फ्रांस में ‘बैटल ऑफ ऑबर्स रिज’ के दौरान उनकी बटालियन पर भीषण हमला हुआ, जिसमें 550 में से 499 सैनिक मारे गए। जांघ की हड्डी में गोली लगने से हैरी ली तीन दिनों तक युद्ध के मैदान में बेहोश पड़े रहे।
कोई अता-पता न मिलने पर सेना ने उन्हें मृत घोषित कर दिया और परिवार ने घर पर शोक सभा रख ली। हालांकि, जर्मन सेना ने उन्हें घायल अवस्था में उठाकर अस्पताल पहुंचाया। युद्ध बंदी के तौर पर रहने के बाद अक्टूबर 1915 में वे इंग्लैंड लौटे। डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि गोली लगने की वजह से उनकी एक टांग हमेशा के लिए छोटी हो गई है और वे कभी दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे।
टॉरपीडो हमले से बाल-बाल बचे, भारत से भी जुड़ा गहरा नाता
सेना से सम्मानपूर्वक डिस्चार्ज होने के बाद हैरी ली ने हार मानने से इनकार कर दिया। साल 1917 में वे भारत आने के लिए ‘न्यांजा’ जहाज पर सवार होने वाले थे, लेकिन आखिरी वक्त पर उनका जहाज बदलकर ‘नागोया’ कर दिया गया। रवाना होने के कुछ ही देर बाद समंदर में न्यांजा जहाज को टॉरपीडो से उड़ा दिया गया, जिसमें 49 लोगों की जान चली गई। इस तरह वे दूसरी बार सीधे मौत के मुंह से बच निकले।
भारत आकर उन्होंने कूचबिहार के महाराजा के यहां कोचिंग दी और मार्च 1918 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में वापसी की। नवंबर 1918 में बॉम्बे में खेलते हुए उन्होंने भारत के भविष्य के पहले टेस्ट कप्तान सीके नायडू के खिलाफ गेंदबाजी भी की थी।
40 साल की उम्र में टेस्ट डेब्यू और 20 हजार से ज्यादा रन
1919 में काउंटी क्रिकेट की बहाली पर वे वापस इंग्लैंड लौटे और मिडिलसेक्स को लगातार दो साल चैंपियन बनाने में अहम रोल निभाया। उन्होंने 16 में से 13 सीजन में 1000 से ज्यादा रन बनाने का कमाल किया। इसके बाद 13 फरवरी 1931 को जोहान्सबर्ग में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 40 साल की उम्र में उन्हें अपना पहला और एकमात्र टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला। स्कूल कोचिंग से जुड़े एक विवाद की वजह से उन्हें आधिकारिक टेस्ट कैप नहीं मिल पाई, लेकिन महान जैक हॉब्स ने उन्हें इंग्लैंड की टूरिंग टाई गिफ्ट की थी।
संन्यास के बाद वे 1946 तक अंपायरिंग करते रहे और फिर कोचिंग दी। 21 अप्रैल 1980 को 90 वर्ष की उम्र में इस जुझारू खिलाड़ी का निधन हुआ।
शानदार करियर रिकॉर्ड
हैरी ली ने अपने करियर में कुल 437 मैच खेले, जिसमें 29.95 की औसत से 20,158 रन बनाए (38 शतक सहित)। इसके साथ ही उन्होंने 401 विकेट भी चटकाए, जिसमें 12 बार पारी में 5 विकेट और 3 बार मैच में 10 विकेट शामिल रहे। इनमें से 18,594 रन और 340 विकेट उन्होंने सिर्फ मिडिलसेक्स के लिए बनाए। वे क्लब के इतिहास में 10,000 रन और 300 विकेट का डबल पूरा करने वाले चुनिंदा 9 दिग्गजों में शामिल हैं।













































