Russia Iran Alliance: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बार फिर पश्चिम एशिया का संकट सुर्खियों में है। इस बार चर्चा ईरान के उस संभावित रणनीतिक कदम को लेकर है, जिसे लेकर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े एक वरिष्ठ सलाहकार का बयान सामने आया है। इस बयान के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि यदि अमेरिका ईरान पर आर्थिक और समुद्री दबाव बढ़ाता है, तो उसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यूरोप और वैश्विक ऊर्जा बाजार भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
IRGC सलाहकार के बयान से बढ़ी हलचल| Russia Iran Alliance
IRGC प्रमुख के वरिष्ठ सलाहकार हुसैन हमीदरेजा मोघदामफर ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वॉशिंगटन समुद्री मार्गों या आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश करता है, तो इसके गंभीर परिणाम यूरोप को भी भुगतने पड़ सकते हैं। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। हालांकि, इन बयानों को लेकर अभी तक किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी या सरकार की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ऐसे बयान क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकते हैं।
रूस और ईरान के बढ़ते समीकरण पर नजर
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में रूस और ईरान कई मुद्दों पर एक-दूसरे के करीब नजर आ रहे हैं। एक ओर रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा हुआ है और यूरोप के साथ उसके रिश्ते लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। दूसरी ओर, ईरान भी लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दोनों देशों के हित कुछ मामलों में एक दिशा में चलते हैं, तो इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के सामने नई रणनीतिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, इराक और अन्य खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है।
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि किसी कारण से इस समुद्री मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। इससे खास तौर पर यूरोप के कई देश प्रभावित हो सकते हैं, जो पहले से ऊर्जा संकट और महंगाई जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
यूरोप पर बढ़ सकता है दबाव
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस की सप्लाई बाधित होती है, तो जर्मनी, फ्रांस, इटली समेत कई यूरोपीय देशों के उद्योगों और ऊर्जा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। ऐसे हालात में उत्पादन लागत बढ़ने, महंगाई में इजाफा होने और आर्थिक गतिविधियों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से यूरोप इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।
अमेरिका के प्रतिबंधों को लेकर ईरान की चिंता
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान को आशंका है कि अमेरिका भविष्य में उसके तेल निर्यात पर और कड़े प्रतिबंध लगा सकता है। ऐसे में ईरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि यदि उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाया गया, तो इसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित होंगे। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान यूरोपीय देशों पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं, ताकि वे अमेरिका की हर नीति का बिना शर्त समर्थन न करें।
कौन हैं हुसैन हमीदरेजा मोघदामफर?
हुसैन हमीदरेजा मोघदामफर को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े वरिष्ठ रणनीतिक सलाहकारों में गिना जाता है। उन्हें ईरान की सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर प्रभावशाली आवाज माना जाता है। उनके हालिया बयान को इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से देखा जा रहा है।






























