Jagannath Rath Yatra 2026: ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान गुरुवार को बड़ा हादसा हो गया। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ जैसे हालात बन गए। इस घटना में दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक श्रद्धालुओं के बेहोश होने की खबर है। कई अन्य लोग घायल भी हुए हैं, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।
लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच बिगड़े हालात| Jagannath Rath Yatra 2026
भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की रथ यात्रा देखने के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे थे। यात्रा के दौरान ग्रैंड रोड (बड़ा डंडा) पर एक जगह अचानक भीड़ का दबाव काफी बढ़ गया। उमस और भीड़ के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगी और कई श्रद्धालु वहीं बेहोश होकर गिर पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ समय के लिए हालात इतने खराब हो गए कि लोगों को बाहर निकलने तक का रास्ता नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद पुलिस, प्रशासन और आपदा राहत टीमों को तुरंत मौके पर बुलाया गया।
दो लोगों की मौत, कई श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इस घटना में दो श्रद्धालुओं की मौत हुई है। प्रशासन के मुताबिक, एक महिला श्रद्धालु की मौत भीड़ बढ़ने और दम घुटने के कारण हुई, जबकि दूसरी घटना में 35 वर्षीय एक युवक की हार्ट अटैक से जान चली गई। मृतकों में एक की पहचान ओडिशा के क्योंझर जिले के रहने वाले अनिल दास के रूप में हुई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मारिचीकोट छक के पास पुलिस घेरे से करीब 100 फीट दूर भारी भीड़ के बीच उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई और वे अचानक गिर पड़े। उन्हें तुरंत पुरी जिला मुख्यालय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
100 से ज्यादा श्रद्धालु हुए बेहोश
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भीड़ और तेज उमस के कारण 100 से अधिक श्रद्धालु बेहोश हो गए। इनमें बड़ी संख्या में बुजुर्ग और महिलाएं शामिल थीं। मेडिकल टीमों ने घटनास्थल पर ही कई लोगों को प्राथमिक उपचार दिया, जबकि गंभीर रूप से प्रभावित श्रद्धालुओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायलों का इलाज जारी है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।
राहत और बचाव अभियान तुरंत शुरू
घटना की जानकारी मिलते ही ओडिशा स्टेट रिस्पांस यूनिट (SRU) समेत अन्य आपातकालीन टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, कम से कम 33 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस दौरान एम्बुलेंस को जल्दी पहुंचाने के लिए श्रद्धालुओं ने भी रास्ता खाली कर सहयोग किया, जिसके वीडियो भी सामने आए हैं।
प्रशासन ने भगदड़ की बात से किया इनकार
हालांकि घटना के बाद भगदड़ की चर्चा हुई, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह पूर्ण रूप से भगदड़ नहीं थी। अधिकारियों का कहना है कि अत्यधिक भीड़ और उमस के कारण लोगों की तबीयत बिगड़ी, जिससे यह स्थिति बनी। प्रशासन ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।
पहले से किए गए थे कड़े सुरक्षा इंतजाम
रथ यात्रा को देखते हुए राज्य सरकार ने पहले से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। ओडिशा के डीजीपी वाई. बी. खुरानिया ने बताया कि पूरे आयोजन में 19 आईपीएस अधिकारियों के साथ लगभग 13,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके अलावा सीआरपीएफ, बीएसएफ, आरएएफ समेत केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 15 कंपनियां भी रणनीतिक स्थानों पर तैनात थीं।
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए 473 एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन जैमर सिस्टम और दो कमांड एवं कंट्रोल सेंटरों के जरिए बड़ा डंडा और आसपास के इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही थी। वहीं भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और ओडिशा पुलिस की समुद्री इकाइयों द्वारा संयुक्त गश्त भी की जा रही थी।
स्थिति फिलहाल नियंत्रण में, प्रशासन कर रहा समीक्षा
प्रशासन का कहना है कि फिलहाल हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा की जाएगी ताकि रथ यात्रा के आगामी कार्यक्रमों के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।






























