Delimitation Bill 2026: केंद्र सरकार के बहुचर्चित और विवादों में रहे परिसीमन (डीलिमिटेशन) बिल को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) ने पहली बार इस बिल पर अपने रुख में नरमी के संकेत दिए हैं। पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले ने साफ किया है कि अगर सरकार लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव में सभी राज्यों के लिए 50 प्रतिशत की सीमा तय करती है, तो उनकी पार्टी इस बिल का समर्थन करने पर विचार कर सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इसका मतलब यह नहीं है कि NCP, NDA में शामिल होने जा रही है। उन्होंने ऐसी सभी अटकलों को महज अफवाह बताया।
50 प्रतिशत की शर्त पूरी हुई तो समर्थन पर होगा विचार| Delimitation Bill 2026
बुधवार को मीडिया से बातचीत के दौरान सुप्रिया सुले ने कहा कि फिलहाल पार्टी के पास बिल का अंतिम मसौदा नहीं है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा, “अगर सरकार 50 प्रतिशत वाली शर्त को लिखित रूप में देती है, तब हम इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे। जब बिल हमारे पास आएगा, उसके प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद ही पार्टी अपनी आधिकारिक राय रखेगी।”
The BJP is planning to bring back the 131st Constitution Amendment Bill that failed in the last session of Parliament in April 2026
The failed Bill purported to reserve for women one-third of the seats in the Lok Sabha and the State Assemblies but its real purpose was to pave…
— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) July 14, 2026
सुले के इस बयान को परिसीमन बिल पर NCP के बदले हुए रुख के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले पार्टी इस मुद्दे पर लगातार सरकार से दूरी बनाए हुए थी।
सर्वदलीय बैठक में हुई थी विस्तृत चर्चा
सुप्रिया सुले ने बताया कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने परिसीमन बिल को लेकर एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। इस बैठक में विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं से सरकार ने अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल हुए थे। सरकार की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके जैसे दलों से भी इस मुद्दे पर बातचीत की जा चुकी है।
सरकार के पास है 50% कैप का प्रस्ताव
सुले का दावा है कि सरकार के पास ऐसा प्रस्ताव मौजूद है, जिसमें सभी राज्यों के लिए लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने में 50 प्रतिशत की सीमा तय करने का विचार शामिल है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक यह प्रस्ताव आधिकारिक बिल का हिस्सा बना है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक का उदाहरण देते हुए कहा कि उस बिल को सभी दलों की सहमति से पारित किया गया था। इसी तरह अगर परिसीमन बिल में भी व्यापक सहमति बनाने की कोशिश होगी, तो सभी पक्षों की राय को महत्व मिलना चाहिए।
सिर्फ आबादी के आधार पर परिसीमन हुआ तो दक्षिण के राज्यों को होगा नुकसान
परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों की चिंताओं का जिक्र करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि केवल जनसंख्या को आधार बनाकर सीटों का पुनर्निर्धारण करना उचित नहीं होगा। उनका कहना था कि जिन राज्यों ने वर्षों तक जनसंख्या नियंत्रण की नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया है, उन्हें इसका राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि परिसीमन सिर्फ आबादी के आधार पर किया गया तो दक्षिणी राज्यों का संसद और विधानसभा में प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। उनके मुताबिक, अमित शाह और किरेन रिजिजू ने भी बैठक में सभी राज्यों के लिए 50 प्रतिशत वाले फॉर्मूले का प्रस्ताव रखा था, ताकि किसी भी राज्य के साथ असंतुलन या अन्याय की स्थिति न बने।
NDA में शामिल होने की अटकलों को किया खारिज
हाल के दिनों में यह चर्चा तेज थी कि शरद पवार की NCP (SP) परिसीमन बिल पर सरकार का समर्थन कर सकती है और भविष्य में NDA के करीब जा सकती है। लेकिन सुप्रिया सुले ने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “हमारे बारे में लगातार तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। अधिकांश खबरें सिर्फ सूत्रों के हवाले से चलाई जा रही हैं। हमारी पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश हो रही है। हम कहीं नहीं जा रहे हैं और मजबूती से INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं।”
उनका कहना था कि किसी विधेयक पर रचनात्मक चर्चा या समर्थन की संभावना को राजनीतिक गठबंधन बदलने से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
चिदंबरम ने भाजपा पर लगाए समर्थन जुटाने के आरोप
इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भी परिसीमन बिल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा संविधान के 131वें संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए NCP (SP) और DMK जैसे क्षेत्रीय दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पहले तृणमूल कांग्रेस में राजनीतिक बदलाव देखने को मिले और अब खबरें हैं कि भाजपा पहले संसद में गिर चुके विधेयक के संशोधित संस्करण के लिए जरूरी समर्थन जुटाने में लगी है। उन्होंने NCP (SP) और DMK से इस बिल का समर्थन नहीं करने की अपील भी की।
अप्रैल में दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने से गिर गया था बिल
गौरतलब है कि परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक अप्रैल में संसद में पेश किया गया था, लेकिन सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सकी। इसी वजह से यह विधेयक पारित नहीं हो पाया था। हालांकि उसके बाद संसद के भीतर राजनीतिक समीकरणों में कुछ बदलाव जरूर हुए हैं। तृणमूल कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना में हुई राजनीतिक उठापटक से NDA की संख्या पहले की तुलना में बेहतर हुई है, लेकिन संविधान संशोधन के लिए जरूरी आंकड़ा अभी भी उसके पास नहीं है।
क्या मॉनसून सत्र में फिर आएगा परिसीमन बिल?
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार आगामी मॉनसून सत्र में परिसीमन बिल को दोबारा पेश करने की तैयारी में है। हालांकि सरकार तभी यह कदम उठाएगी, जब उसे पूरा भरोसा होगा कि बिल को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई समर्थन उसके पक्ष में मौजूद है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे में NCP (SP), DMK और अन्य क्षेत्रीय दलों का रुख बेहद अहम होगा। यदि सरकार 50 प्रतिशत सीट वृद्धि वाले फॉर्मूले को विधेयक में शामिल करती है, तो विपक्ष के कुछ दलों का समर्थन मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

































