Satluj Movie ZEE5 Controversy: पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ की विवादित फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। सरकार ने साफ किया है कि किसी भी फिल्म को जरूरी सेंसर सर्टिफिकेट के बिना दिखाना कानूनी रूप से सही नहीं है। ऐसे मामलों में आपराधिक कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होती है। वहीं, केंद्र सरकार के पास बिना प्रमाणन के ऑनलाइन दिखाई जा रही सामग्री को हटाने का अधिकार है और इस मामले में ऐसा कदम उठाया भी जा चुका है।
फिल्म को स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटाए जाने के बाद अब सरकार उस प्लेटफॉर्म की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिसने बिना प्रमाणपत्र के फिल्म को ऑनलाइन उपलब्ध कराया था। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में ZEE5 के खिलाफ कार्रवाई करने पर भी विचार किया जा रहा है।
OTT फिल्मों के लिए बदल सकते हैं नियम| Satluj Movie ZEE5 Controversy
‘सतलुज’ विवाद के बीच केंद्र सरकार डिजिटल कंटेंट को लेकर नियमों में बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। सरकार इस बात पर मंथन कर रही है कि क्या भविष्य में OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए भी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) का सर्टिफिकेट अनिवार्य किया जाए। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो फिल्मों को ऑनलाइन रिलीज करने से पहले सेंसर बोर्ड से मंजूरी लेनी पड़ सकती है। इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में संशोधन किए जाने की संभावना है। इससे पहली बार OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली फिल्मों को भी प्री-रिलीज प्रमाणन व्यवस्था के दायरे में लाया जा सकता है।
ZEE5 पर हो सकती है कार्रवाई
सरकारी सूत्रों के अनुसार, ZEE5 को ‘सतलुज’ को बिना प्रमाणन के स्ट्रीम करने के मामले में कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि फिल्म अभी CBFC की समीक्षा प्रक्रिया में थी और बोर्ड ने इसमें कई बदलाव और कट लगाने का सुझाव दिया था। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए केंद्र सरकार के निर्देश के बाद ZEE5 ने 3 जुलाई को रिलीज के दो दिन बाद ही फिल्म को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया था।
मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की कहानी पर आधारित है फिल्म
‘सतलुज’ का विवाद इसकी कहानी को लेकर भी जुड़ा हुआ है। हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। खालरा ने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के कथित अवैध अंतिम संस्कार का मुद्दा उठाया था। उनके खुलासों के बाद 1995 में पंजाब पुलिस कर्मियों द्वारा उनका अपहरण और हत्या किए जाने का मामला सामने आया था। बाद में कई पुलिस अधिकारियों को इस अपराध में दोषी ठहराया गया था।
पंजाब में निजी स्क्रीनिंग को लेकर भी विवाद
हालांकि फिल्म को ZEE5 से हटा दिया गया है, लेकिन पंजाब के कई इलाकों में, जिसमें कुछ गुरुद्वारे भी शामिल हैं, इसकी निजी स्क्रीनिंग किए जाने की खबरें सामने आई हैं। विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बन गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, फिल्म की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति ने सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक जारी रखने की सिफारिश की है। समिति ने कथित तौर पर यह चिंता जताई कि फिल्म के कुछ हिस्से भारत की संप्रभुता और अखंडता से जुड़े मुद्दों को प्रभावित कर सकते हैं।
OTT सेंसरशिप पर शुरू हो सकती है नई बहस
मौजूदा नियमों के अनुसार OTT फिल्मों को रिलीज से पहले CBFC प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं होती। डिजिटल प्लेटफॉर्म फिलहाल सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत आते हैं। इन नियमों के तहत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता, रक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था जैसे आधारों पर आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत किसी सामग्री को हटाने का निर्देश दे सकती है।































