IAS Tukaram Mundhe: महाराष्ट्र की नौकरशाही में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है और वह है IAS तुकाराम मुंढे का। आमतौर पर सरकारी दफ्तरों में बैठे अधिकारियों की चर्चा उनके पद और फैसलों तक सीमित रहती है, लेकिन तुकाराम मुंढे अपनी अलग कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। सख्त रवैया, मौके पर जाकर जांच करना और नियमों से कोई समझौता नहीं करने की छवि ने उन्हें ऐसा अधिकारी बना दिया है, जिनसे लापरवाही और भ्रष्टाचार करने वाले लोग सतर्क रहते हैं।
मौजूदा समय में तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पद संभालते ही उन्होंने मिलावटखोरों और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। उनके नेतृत्व में राज्यभर में होटल, डेयरी, रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की जा रही है।
FDA संभालते ही शुरू हुआ बड़ा अभियान| IAS Tukaram Mundhe
तुकाराम मुंढे ने FDA की कमान संभालने के बाद खाद्य सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। उनकी टीम ने कई जगहों पर छापेमारी कर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है। इस अभियान में सिर्फ छोटे दुकानदार ही नहीं, बल्कि बड़े प्रतिष्ठान भी जांच के दायरे में आए हैं।
मुंबई में कई नामी होटल और रेस्टोरेंट पर कार्रवाई की गई है। इसके अलावा BMC की कैंटीन भी जांच के घेरे में आई और उसे सील कर दिया गया। इतना ही नहीं, महाराष्ट्र FDA ने स्कूल परिसरों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला भी लिया है।
25 से ज्यादा बार हो चुका है तबादला
तुकाराम मुंढे का करियर जितना शानदार रहा है, उतना ही उतार-चढ़ाव भरा भी रहा है। करीब दो दशक के प्रशासनिक सफर में उनका 25 से ज्यादा बार तबादला हो चुका है। औसतन हर 9 से 10 महीने में उन्हें नई जिम्मेदारी दी गई। कई बार उनके सख्त फैसलों और राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकने की आदत को उनके तबादलों की वजह बताया गया। हालांकि, बार-बार ट्रांसफर के बावजूद उनके काम करने के तरीके में कोई बदलाव नहीं आया। वह जहां भी गए, वहां व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता लाने की कोशिश की।
क्यों कहा जाता है ‘सिंघम’?
तुकाराम मुंढे को उनके समर्थक और कई लोग ‘सिंघम’ के नाम से भी जानते हैं। इसकी वजह उनका जमीन पर उतरकर काम करना है। वह केवल फाइलों के आधार पर फैसले लेने के बजाय खुद मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेते हैं।
उनकी कार्यशैली में सबसे खास बात यह है कि वह विभाग की व्यवस्था का ऑडिट करते हैं और लापरवाही या गड़बड़ी सामने आने पर तुरंत कार्रवाई करते हैं। उनका मानना है कि सरकारी अधिकारी की पहली जिम्मेदारी जनता के प्रति होती है।
धमकियों से नहीं डरते मुंढे
काम के दौरान दबाव और धमकियों को लेकर भी तुकाराम मुंढे ने अपनी राय साफ रखी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनका काम महाराष्ट्र के लोगों को सुरक्षित भोजन और बेहतर गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि कानून के तहत कार्रवाई करना उनकी जिम्मेदारी है और इसमें डरने की कोई बात नहीं है। उनके मुताबिक, खाद्य पदार्थ तय मानकों के अनुसार होने चाहिए और दवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
साधारण परिवार से निकलकर बने IAS
तुकाराम मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताडसोना गांव में हुआ था। वह एक साधारण परिवार से आते हैं। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई जिला परिषद स्कूल से की और बाद में उच्च शिक्षा पूरी की।
उन्होंने इतिहास में ग्रेजुएशन और राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके बाद साल 2005 में UPSC परीक्षा पास कर IAS बने। उनकी पहली पोस्टिंग सोलापुर में हुई थी, जहां उन्होंने अवैध शराब के ठिकानों पर कार्रवाई कर काफी सुर्खियां बटोरी थीं।










































