Sonam Wangchuk hunger strike: परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों और NEET पेपर लीक मामले को लेकर शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग कर रहे पर्यावरणविद और शिक्षा सुधार के पक्षधर सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल लगातार जारी है। रविवार को उनका अनशन 18वें दिन में प्रवेश कर गया। इस बीच आंदोलन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार की चुप्पी पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने छात्रों को न्याय दिलाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी, उसे सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबी पोस्ट साझा करते हुए कहा कि लोगों को उन सवालों पर चर्चा करनी चाहिए जो वास्तव में देश और छात्रों के भविष्य से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि यह पूछने से ज्यादा जरूरी है कि विपक्षी दलों ने कितना समर्थन किया या CJP के सभी सदस्य भूख हड़ताल पर क्यों नहीं बैठे, असली सवाल यह है कि सरकार अब तक चुप क्यों है।
सरकार से पूछे कई सवाल| Sonam Wangchuk hunger strike
दीपके ने अपनी पोस्ट में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री से सीधे कई सवाल किए। उन्होंने पूछा कि प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर बातचीत करने से क्यों बच रहे हैं। साथ ही सवाल उठाया कि शिक्षा मंत्री से अब तक जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के हितों के लिए अपनी सेहत दांव पर लगाने वाले व्यक्ति को केवल खामोशी मिली है। उनके अनुसार, सरकार न सिर्फ जवाब देने से बच रही है बल्कि उसका रवैया संवेदनहीन भी दिखाई देता है। दीपके ने कहा कि देश को ऐसे सवालों के जवाब चाहिए जो शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़े हैं, न कि ऐसे मुद्दे जो जवाबदेही से ध्यान भटकाते हों।
जंतर-मंतर से उठी आवाज
सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन का हिस्सा हैं। उनका कहना है कि NEET सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।
आंदोलन के आयोजकों के मुताबिक, लगातार भूख हड़ताल के कारण वांगचुक का वजन करीब 8.5 किलोग्राम तक कम हो चुका है। उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने चिंता भी जताई है।
विपक्षी नेताओं ने की अनशन खत्म करने की अपील
इस आंदोलन को लेकर विपक्षी नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने फोन पर सोनम वांगचुक से बातचीत कर उनकी सेहत की जानकारी ली। उन्होंने वांगचुक से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों के मुद्दे पर उनकी लड़ाई महत्वपूर्ण है, लेकिन उनकी जान भी उतनी ही कीमती है। अखिलेश ने आंदोलन के प्रति अपनी पार्टी का समर्थन भी दोहराया।
वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी वांगचुक से उपवास खत्म करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर संघर्ष जारी रहना चाहिए, लेकिन स्वास्थ्य से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने आंदोलन के प्रति अपना समर्थन भी व्यक्त किया।
20 जुलाई को संसद मार्च की तैयारी
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने आंदोलन को अगले चरण में ले जाने का फैसला किया है। संगठन ने 20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान किया है। आयोजकों का कहना है कि यदि सरकार अब भी कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
CJP का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के साथ न्याय सुनिश्चित करना है। संगठन का दावा है कि लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में ईमानदारी से मेहनत करते हैं और यदि पेपर लीक या अन्य गड़बड़ियों के आरोप सामने आते हैं, तो इससे पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो जाते हैं।
































