Sarojini Nagar Branded Clothes: दिल्ली की पहचान उसके ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ उसके फेमस बाजारों से भी होती है। जब भी सस्ते और ट्रेंडी फैशन की बात आती है, तो सरोजिनी नगर मार्केट का नाम सबसे पहले लिया जाता है। यहां हर दिन हजारों लोग कपड़े, जूते और फैशन एक्सेसरीज खरीदने पहुंचते हैं। खास बात यह है कि इस मार्केट में कई बार ऐसे कपड़े मिल जाते हैं जिनकी कीमत बड़े ब्रांड्स में हजारों रुपये होती है, लेकिन यहां वही चीज कुछ सौ रुपये में मिल जाती है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सरोजिनी नगर में मिलने वाले ये ‘ब्रांडेड’ कपड़े आखिर आते कहां से हैं? क्या हर कपड़ा सच में किसी बड़े ब्रांड का होता है? हाल ही में एक व्यापारी ने इस पूरे कारोबार से जुड़े कई ऐसे पहलुओं के बारे में बताया, जो आम ग्राहकों को शायद ही पता हों।
विदेशों से शुरू होती है इन कपड़ों की यात्रा| Sarojini Nagar Branded Clothes
सरोजिनी नगर जैसे बाजारों में कपड़ों की सप्लाई करने वाले व्यापारियों के मुताबिक, यहां बिकने वाला काफी माल सीधे भारतीय फैक्ट्रियों से नहीं आता, बल्कि इसकी शुरुआत विदेशों से होती है। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जापान और साउथ कोरिया जैसे देशों में जब फैशन बदल जाता है या लोग अपने पुराने कपड़े दान कर देते हैं, तो ऐसे कपड़ों को इकट्ठा करके बड़ी-बड़ी गांठों यानी बेल में पैक किया जाता है। इसके बाद इन्हें भारत भेजा जाता है।
इन कपड़ों का बड़ा हब हरियाणा का पानीपत माना जाता है। यहां विदेशों से आए कपड़ों को छांटा जाता है और फिर दिल्ली समेत देश के कई बड़े बाजारों में भेजा जाता है।
हर कपड़ा नया और ब्रांडेड नहीं होता
व्यापारियों के मुताबिक, विदेशों से आने वाली एक बेल में हर तरह का माल होता है। इसमें कुछ कपड़े बिल्कुल नए जैसे होते हैं, जबकि कुछ पहले इस्तेमाल किए हुए होते हैं। बताया जाता है कि एक बेल में लगभग 50 प्रतिशत तक माल फ्रेश हो सकता है, जबकि बाकी हिस्सा इस्तेमाल किया हुआ हो सकता है। चीन और साउथ कोरिया से आने वाले कपड़ों की क्वालिटी को बेहतर माना जाता है, क्योंकि वहां लोग फैशन बदलने पर जल्दी कपड़े बदल लेते हैं। कुछ व्यापारियों के अनुसार, विदेशों से आने वाले बड़े कंटेनरों में हजारों कपड़े एक साथ भेजे जाते हैं। इसके बाद इन्हें अलग-अलग क्वालिटी के हिसाब से बाजार में उतारा जाता है।
कपड़ों को सीधे बेचने से पहले होती है तैयारी
पुराने कपड़ों को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उनकी सफाई को लेकर उठते हैं। व्यापारियों का कहना है कि विदेशों से आने वाले कपड़ों को हमेशा दोबारा धोया नहीं जाता। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए पैकिंग के दौरान कुछ केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे लंबे समय तक कपड़ों में खराबी न आए। सरोजिनी नगर पहुंचने के बाद दुकानदार इन कपड़ों को प्रेस करके और अच्छी पैकिंग में सजाकर ग्राहकों के सामने रखते हैं। यही वजह है कि कई बार इस्तेमाल किए हुए कपड़े भी नए जैसे नजर आते हैं।
ब्रांडेड टैग की कहानी भी अलग है
सरोजिनी नगर में अक्सर जारा, मैक्स, टॉमी जैसे बड़े ब्रांड्स के नाम वाले कपड़े नजर आते हैं। लेकिन हर बार इन टैग्स का असली होना जरूरी नहीं है। कुछ व्यापारियों के मुताबिक, बाजार में ब्रांड के टैग आसानी से उपलब्ध होते हैं और कई बार सामान्य कपड़ों पर भी ऐसे टैग लगा दिए जाते हैं। इससे ग्राहक को कपड़ा किसी बड़े ब्रांड का दिखाई देता है। कई बार पैकिंग और टैग लगाने का खर्च भी बहुत कम होता है।
क्या सच में यहां बिकते हैं मरे हुए लोगों के कपड़े?
सरोजिनी नगर को लेकर एक पुरानी अफवाह भी काफी चर्चा में रही है कि यहां विदेशों में मरे हुए लोगों के कपड़े बेचे जाते हैं। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। जानकारों के अनुसार, यह बात शायद इसलिए फैली क्योंकि यहां कुछ जगहों पर विदेशों से आए पुराने और इस्तेमाल किए हुए कपड़े बिकते हैं। लेकिन यह कहना सही नहीं है कि ये कपड़े किसी मृत व्यक्ति के ही होते हैं।
सस्ते कपड़ों के पीछे एक्सपोर्ट सरप्लस भी बड़ी वजह
सरोजिनी नगर में कम कीमतों पर कपड़े मिलने की एक बड़ी वजह एक्सपोर्ट सरप्लस स्टॉक भी है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां जरूरत से ज्यादा कपड़े तैयार कर लेती हैं। बचा हुआ स्टॉक फेंकने के बजाय इसे कम कीमतों पर बेच दिया जाता है। इसके अलावा एक्सपोर्ट फैक्ट्रियों का रिजेक्टेड माल भी बाजार में आता है। इसमें छोटी-मोटी कमियां जैसे सिलाई की समस्या, गलत लेबल, बटन की कमी या रंग में थोड़ा अंतर हो सकता है। ब्रांड अपनी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ऐसे कपड़ों को रिजेक्ट कर देते हैं और फिर ये सस्ते दामों पर बाजारों तक पहुंच जाते हैं।
सरोजिनी नगर की असली पहचान
सरोजिनी नगर मार्केट की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण यही है कि यहां फैशन आम लोगों की पहुंच में आ जाता है। चाहे जैकेट हो, जींस हो या ट्रेंडी टॉप, ग्राहक कम बजट में अपनी पसंद की चीज तलाश लेते हैं। हालांकि अगली बार जब आप यहां किसी ‘ब्रांडेड’ कपड़े की खरीदारी करें, तो यह जरूर याद रखें कि उसके पीछे विदेशों से शुरू हुई एक लंबी सप्लाई चेन हो सकती है, जिसमें एक्सपोर्ट सरप्लस, रिजेक्टेड स्टॉक और इस्तेमाल किए हुए कपड़ों का भी हिस्सा शामिल हो सकता है।
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