Supaul Crocodile Rescue: बिहार के सुपौल जिले में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसे देखकर सड़क पर चल रहे लोग कुछ पल के लिए ठहर गए। एक शख्स अपने कंधे पर करीब पांच फीट लंबे मगरमच्छ को उठाए पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा था। किसी ने मोबाइल निकालकर वीडियो बनाना शुरू कर दिया तो कोई दूर खड़े होकर इस अनोखे दृश्य को देखने लगा। हर किसी के मन में एक ही सवाल था कि आखिर यह शख्स कौन है और इतने खतरनाक जीव को लेकर इतनी आसानी से कैसे चल रहा है?
कुछ ही देर में पता चला कि यह शख्स कोई और नहीं बल्कि सुपौल के किसान अमित कुमार हैं। अमित ने धान के खेत में मिले मगरमच्छ को न सिर्फ सुरक्षित तरीके से काबू किया, बल्कि उसे वन विभाग और फिर पुलिस तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी खुद उठाई।
धान के खेत में मगरमच्छ दिखने से मचा हड़कंप| Supaul Crocodile Rescue
पूरा मामला सुपौल जिले के भीमनगर थाना क्षेत्र के लालपुर वार्ड-14 का है। गांव में किसान रोज की तरह धान के खेतों में काम कर रहे थे। खेतों में पानी भरा हुआ था। इसी दौरान अचानक पानी में हलचल हुई। शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद कोई बड़ी मछली होगी, लेकिन कुछ ही समय बाद जब मगरमच्छ दिखाई दिया तो वहां मौजूद किसानों के होश उड़ गए।
मगरमच्छ को देखकर खेत में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव में फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। हर कोई इस खतरनाक जीव को देखना चाहता था, लेकिन उसके पास जाने की हिम्मत किसी में नहीं थी।
डर के माहौल में अमित ने दिखाई हिम्मत
जहां ग्रामीण मगरमच्छ को देखकर घबराए हुए थे, वहीं किसान अमित कुमार ने सूझबूझ से काम लिया। उन्हें डर था कि अगर मगरमच्छ को वहीं छोड़ दिया गया तो वह खेतों से निकलकर आबादी वाले इलाके में पहुंच सकता है, जिससे बच्चों और ग्रामीणों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
अमित ने ग्रामीणों की मदद से मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से पकड़ने की कोशिश की। बिना उसे नुकसान पहुंचाए उसके मुंह को रस्सी से बांधा गया, ताकि वह किसी पर हमला न कर सके। इस दौरान पूरी सावधानी बरती गई कि न मगरमच्छ को चोट पहुंचे और न ही किसी ग्रामीण की जान खतरे में पड़े।
वन विभाग पहुंचने के बाद नहीं मिला कर्मचारी
मगरमच्छ को पकड़ने के बाद अमित कुमार उसे कटैया स्थित वन विभाग कार्यालय लेकर पहुंचे। उन्हें उम्मीद थी कि वहां कर्मचारी मौजूद होंगे और मगरमच्छ को तुरंत अपने कब्जे में ले लेंगे। लेकिन कार्यालय पहुंचने पर उन्हें कोई कर्मचारी नहीं मिला। इसके बाद अमित ने इंतजार करने के बजाय मगरमच्छ को सुरक्षित जगह तक पहुंचाने का फैसला किया। उन्होंने उसे अपने कंधे पर उठाया और पैदल ही भीमनगर थाना की ओर निकल पड़े।
यही वह पल था जिसने इस पूरी घटना को चर्चा का विषय बना दिया। सड़क पर कंधे पर मगरमच्छ लेकर चलते अमित को देखकर लोग हैरान रह गए। किसी ने वीडियो बनाया तो किसी ने उनकी हिम्मत की तारीफ की। खास बात यह थी कि इतने खतरनाक जीव को उठाने के बावजूद अमित के चेहरे पर डर नहीं बल्कि जिम्मेदारी का भाव दिखाई दे रहा था।
थाने पहुंचते ही पुलिस भी रह गई हैरान
जब अमित मगरमच्छ को लेकर भीमनगर थाना पहुंचे तो वहां मौजूद पुलिसकर्मी भी कुछ देर के लिए हैरान रह गए। आमतौर पर लोग थाने में शिकायत लेकर पहुंचते हैं, लेकिन इस बार एक किसान अपने साथ मगरमच्छ लेकर पहुंचा था। पुलिस ने तुरंत वन विभाग को इसकी जानकारी दी। कुछ समय बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मगरमच्छ को अपने कब्जे में ले लिया।
फॉरेस्टर रवि रंजन ने बताया कि मगरमच्छ करीब पांच फीट लंबा था और पूरी तरह स्वस्थ था। जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे सुरक्षित तरीके से कोसी नदी में छोड़ दिया गया, ताकि वह अपने प्राकृतिक वातावरण में वापस लौट सके।
अमित ने बताया कैसे पकड़ा मगरमच्छ
किसान अमित कुमार ने बताया कि वह धान के खेत में काम कर रहे थे, तभी मगरमच्छ दिखाई दिया। ग्रामीणों की मदद से उन्होंने पहले उसे सुरक्षित पकड़ा और उसका मुंह बांधा। इसके बाद वह उसे वन विभाग कार्यालय ले गए, लेकिन वहां कर्मचारी नहीं मिले। इसलिए उन्होंने मगरमच्छ को भीमनगर थाना पहुंचाना बेहतर समझा, ताकि संबंधित विभाग को सूचना मिल सके और उसे सुरक्षित छोड़ा जा सके।
बरसात में वन्यजीवों से सतर्क रहने की अपील
वन विभाग के फॉरेस्टर रवि रंजन ने बताया कि बरसात के मौसम में कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण कई बार मगरमच्छ और अन्य वन्यजीव बहकर खेतों या रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर कहीं मगरमच्छ या कोई अन्य वन्यजीव दिखाई दे तो उसे पकड़ने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें। तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जा सके।
वहीं, ग्रामीणों ने भी अमित कुमार की हिम्मत और सूझबूझ की जमकर सराहना की। उनका कहना है कि अमित ने बहादुरी के साथ-साथ जिम्मेदारी भी दिखाई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।












































