वोटर लिस्ट विवाद में बड़ा ट्विस्ट: एक राय से हुआ था डिक्लेरेशन का फैसला, सुप्रीम कोर्ट भी लगा चुका है मुहर| ECINet cyber security attack

Nandani | Nedrick News New Delhi Published: 26 सितम्बर 2026, 08:49 PM Updated: 26 सितम्बर 2026, 08:49 PM
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ECINet cyber security attack: चुनाव आयोग के भीतर आयुक्तों के बीच कथित असहमति और मतभेदों को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं पर अब पूरी तरह विराम लगता दिख रहा है। सामने आए पुख्ता ब्योरों के मुताबिक, आयोग के सभी अहम फैसलों पर तीनों चुनाव आयुक्त पूरी तरह एकमत थे और किसी भी निर्णय में कोई आंतरिक टकराव नहीं था। नए मतदाताओं को जोड़ने और एक राज्य से दूसरे राज्य में वोटर ट्रांसफर कराने के नियमों को लेकर जो विवाद खड़ा किया जा रहा था, उस पर अब स्थिति पूरी तरह साफ हो चुकी है।

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तारीख और पेज नंबर के साथ सामने आए तथ्य| ECINet cyber security attack

आयोग से जुड़े रिकॉर्ड्स के अनुसार, नए वोटर बनने या राज्य बदलने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म 6 और फॉर्म 8 के साथ घोषणापत्र (डिक्लेरेशन) लगाने का फैसला किसी बहुमत के आधार पर नहीं, बल्कि पूर्ण सर्वसम्मति से लिया गया था।

  • बिहार एसआईआर: 24 जून 2025 को बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर सर्वसम्मति से फैसला हुआ था। इसके दस्तावेज के पेज 6 और बिंदु संख्या 15 में साफ लिखा था कि दोनों मामलों में घोषणापत्र देना होगा, जिसमें माता-पिता और दादा-दादी से जुड़ी जानकारियां शामिल होंगी।
  • 12 राज्यों का फैसला: 27 अक्टूबर 2025 को 12 राज्यों के लिए एसआईआर पर हुआ फैसला भी पूरी तरह सर्वसम्मत था।
  • 19 राज्यों का फैसला: इसके बाद 14 मई 2026 को 19 राज्यों में एसआईआर लागू करने के निर्णय (पेज 5, बिंदु 4) पर भी तीनों आयुक्तों ने एक राय होकर दस्तखत किए थे।
  • सुप्रीम कोर्ट की मुहर: इतना ही नहीं, 27 मई 2026 के अपने फैसले में देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने भी फॉर्म के साथ घोषणापत्र जोड़ने की व्यवस्था पर अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी थी।

नए वोटरों की सहूलियत के लिए है व्यवस्था

यह नियम जनप्रतिनिधित्व कानून (रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट 1950) के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करता। बल्कि यह व्यवस्था नए वोटरों की सहूलियत के लिए बनाई गई है। अगर कोई व्यक्ति यह घोषणापत्र दे देता है, तो उसे कई तरह के अन्य कागजात और दस्तावेज जुटाने की जरूरत नहीं रह जाती। यह नियम पूरे देश में सभी राज्यों के लिए एक समान रूप से लागू किया गया है। इन ठोस तथ्यों के सामने आने के बाद विपक्ष के उन आरोपों की धार कुंद पड़ना तय माना जा रहा है, जिन्हें लेकर एक बड़े राजनीतिक अभियान की तैयारी की जा रही थी।

ECINet पर 68 लाख साइबर अटैक, सुरक्षा मानकों पर सफाई

इसके अलावा, आंतरिक नेटवर्क ‘ECINet’ को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की गई है। इस साल विधानसभा चुनाव की मतगणना वाले दिन इस पोर्टल को हैक करने के लिए करीब 68 लाख बार साइबर हमले की कोशिशें की गई थीं।

इसी भारी खतरे को देखते हुए साइबर सुरक्षा के कड़े मानक तय किए गए हैं। हालांकि, फील्ड स्तर पर काम करने वाले बीएलओ, एईआरओ, ईआरओ, डीईओ और सीईओ अपने यूनिक आईडी व पासवर्ड के जरिए आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। बाहरी या अनधिकृत अधिकारियों के लिए इस नेटवर्क की पहुंच पूरी तरह बंद रखी गई है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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