Indian Army drone deal: आधुनिक युद्ध के नियम अब पूरी तरह बदल चुके हैं और इसका सबसे बड़ा सबूत आसमान में उड़ते छोटे-छोटे ड्रोन हैं। हाल ही में 20 सितंबर को मॉस्को और रूस के कई दूसरे शहरों पर जिस तरह ड्रोन्स के झुंड ने हमला बोला, उसने दुनिया भर के रणनीतिकारों को चौंका दिया। इस घटना ने साबित कर दिया कि कम लागत वाले ये छोटे हथियार अब जंग के मैदान का पूरा रुख पलटने का माद्दा रखते हैं। भारत के लिए यह अनुभव नया नहीं है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सीमाओं पर जासूसी, सटीक टोह लेने और निगरानी में मानवरहित प्रणालियों की उपयोगिता पहले ही साबित हो चुकी है। अब मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए देश अपनी घरेलू सैन्य ड्रोन क्षमता को एक नए मुकाम पर ले जाने की तैयारी में जुट गया है।
20 हजार करोड़ के रक्षा सौदे की तैयारी| Indian Army drone deal
देश इस वक्त अपनी अब तक की सबसे बड़ी सैन्य ड्रोन खरीद की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। इस महा-परियोजना का कुल आकार 2 अरब डॉलर यानी 20,000 करोड़ रुपये से भी अधिक होने का अनुमान है। इस बड़ी योजना के तहत मुख्य रूप से सीमाओं की रणनीतिक निगरानी, रसद आपूर्ति, आत्मघाती हमले करने वाले लॉइटरिंग म्यूनिशन, स्वचालित ऑटोनॉमस सिस्टम और सटीक मारक क्षमताओं वाले हथियार शामिल किए जाएंगे। यह खरीद हाल ही में हुई लगभग 3,000 करोड़ रुपये की टैक्टिकल ड्रोन खरीद से कहीं ज्यादा बड़ी है। उम्मीद की जा रही है कि अगले 18 से 24 महीनों के भीतर सेना को इन प्रणालियों की आपूर्ति भी शुरू हो जाएगी।
घरेलू उद्योगों और स्टार्टअप्स को मिलेगा बड़ा संबल
यह बड़ा कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब देश का घरेलू विनिर्माण तंत्र पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है। देश में 600 से अधिक कंपनियां इस समय मानवरहित तकनीक के क्षेत्र में सक्रिय हैं, जिनमें से 100 से ज्यादा उपक्रम विशेष रूप से रक्षा जरूरतों पर काम कर रहे हैं। कई बड़े औद्योगिक घराने और तेजी से उभरते स्टार्टअप्स सेना के लिए उन्नत तकनीक, गोला-बारूद ले जाने वाले विमान और हमले से बचाने वाले सिस्टम तैयार कर रहे हैं। बीते दिनों सेना के लिए लॉइटरिंग-म्यूनिशन सिस्टम और 840 गोला-बारूद की आपूर्ति के लिए 1,577 करोड़ रुपये का अनुबंध भी किया गया था। इस प्रस्तावित खरीद से घरेलू स्तर पर काम कर रहे निर्माताओं को एक बहुत बड़ा संबल मिलेगा और देश रक्षा उपकरणों के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ेगा।
हवा में ही खतरा मिटाने वाला संपूर्ण सुरक्षा चक्र
सैन्य बल केवल निगरानी और हमला करने वाले विमान खरीदने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पूरे तंत्र को आधुनिक बनाने पर जोर दे रहे हैं। इसमें बेहतर सेंसर, शक्तिशाली इंजन, लंबी दूरी तक चलने वाली बैटरी, सुरक्षित संचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दुश्मन के विमानों को मार गिराने वाले काउंटर-ड्रोन सिस्टम शामिल हैं। पोखरण में हाल ही में किए गए कड़े फील्ड ट्रायल में यह परखा गया कि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और झुंड में उड़ने वाले विमानों का मुकाबला किस तरह किया जा सकता है। इसके साथ ही हवा में ही 5 किलोमीटर के दायरे में दुश्मन के ड्रोन्स को नष्ट करने वाली 30kW-क्लास लेजर तकनीक को भी तेजी से तैयार किया जा रहा है।
2031 तक तीन गुना विस्तार का अनुमान
सीमाओं की सुरक्षा, सेना के आधुनिकीकरण, भू-राजनीतिक तनाव और आयात पर निर्भरता घटाने के प्रयासों के चलते घरेलू सैन्य ड्रोन बाजार का आकार 2026 के करीब 81 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2031 तक 2.23 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। रक्षा क्षेत्र में देश को ड्रोन निर्माण का वैश्विक हब बनाने की सोच के साथ यह ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है, जिससे देश की सुरक्षा दीवार और भी अभेद्य बनेगी












































