Junaid detention claim: जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करने वाले जुनैद ने अपनी कथित हिरासत को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 24 जुलाई की रात कुछ लोग, जिन्होंने खुद को पुलिस अधिकारी बताया, उन्हें रास्ते से अपने साथ ले गए। उनका दावा है कि उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई, मोबाइल फोन ले लिया गया और कई घंटों तक उन्हें ऐसी जगह रखा गया, जहां उन्हें यह तक नहीं पता था कि वे कहां हैं। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अस्पताल से लौटते समय रास्ते में रोके जाने का दावा| Junaid detention claim
जुनैद के मुताबिक, 24 जुलाई की रात वह जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में मौजूद थे और प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था देख रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक कुत्ते ने काट लिया। इलाज कराने के लिए वह अपने एक साथी के साथ राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे। अस्पताल से लौटने के बाद जब दोनों ऑटो से जा रहे थे, तभी एक सफेद स्कॉर्पियो उनके सामने आकर रुकी।
उनका आरोप है कि वाहन से उतरे लोग सादे कपड़ों में थे और उन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया। जुनैद का कहना है कि उनसे कोई वारंट या लिखित आदेश साझा नहीं किया गया। इसके बाद उन्हें और उनके साथी को जबरन गाड़ी में बैठा लिया गया।
‘डर था कि पता नहीं आगे क्या होगा’
जुनैद का कहना है कि गाड़ी में बैठाने के तुरंत बाद उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई और मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए गए। उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूरे रास्ते उनके मन में सिर्फ एक ही डर था कि कहीं यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर न बन जाए। हालांकि, उसी दौरान उन्होंने खुद को यह कहकर संभाला कि यदि छात्रों के भविष्य की लड़ाई में उनकी कोई कीमत चुकानी पड़े तो वह भी मंजूर होगी।
हिरासत में सुनी इस्तीफे की खबर
जुनैद का दावा है कि हिरासत के दौरान कुछ लोग मोबाइल पर सोशल मीडिया रील देख रहे थे। उसी दौरान उन्हें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सुनाई दी। उन्होंने कहा कि यह सुनकर उन्हें लगा कि छात्रों के आंदोलन का असर दिखाई देने लगा है और शायद संघर्ष रंग ला रहा है।
खाने की व्यवस्था और पैसे के स्रोत पर पूछे गए सवाल
जुनैद के अनुसार, अगले दिन उनसे लंबी पूछताछ की गई। सबसे ज्यादा सवाल इस बात को लेकर किए गए कि जंतर-मंतर पर रोजाना सैकड़ों लोगों के लिए भोजन कहां से आता था और उसका खर्च कौन उठाता था। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि यह व्यवस्था किसी एक व्यक्ति की नहीं थी। कई सामाजिक संगठन, किसान संगठन, आम समर्थक और गुरुद्वारों की ओर से लंगर के रूप में भोजन पहुंचाया जाता था। कई लोग ऑनलाइन फूड डिलीवरी के जरिए भी खाने का इंतजाम कर देते थे। जुनैद ने यह भी दावा किया कि उन्होंने कभी किसी से अपने खाते में पैसे नहीं मंगवाए और न ही कोई क्यूआर कोड जारी किया।
मसूरी के पास छोड़ने का आरोप
जुनैद का आरोप है कि पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें कई घंटों तक अलग-अलग रास्तों पर घुमाया गया। बाद में उत्तराखंड के मसूरी के पास उन्हें छोड़ दिया गया। उन्होंने बताया कि वहां उनसे कहा गया कि कुछ देर तक आंखों की पट्टी न हटाएं और मोबाइल फोन भी तुरंत चालू न करें। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्होंने इस घटना की जानकारी सार्वजनिक नहीं की क्योंकि उन्हें दोबारा इसी तरह उठाए जाने का डर था। बाद में उन्होंने पूरी बात मीडिया के सामने रखने का फैसला किया।
परिवार से भी पूछताछ का दावा
जुनैद ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके परिवार को भी पूछताछ का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, 23 और 24 जुलाई को पुलिस उनके घर पहुंची और उनके पिता मुस्तफा को थाने ले जाकर सवाल पूछे गए। परिवार का दावा है कि आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक समेत कई दस्तावेजों की जानकारी ली गई। जुनैद का यह भी कहना है कि मेरठ में रहने वाली उनकी बहन के ससुराल पक्ष से भी पूछताछ की गई।
आंदोलन खत्म हुआ, लेकिन वह मौजूद नहीं थे
जुनैद शुरुआत से जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन में सक्रिय थे और प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था संभाल रहे थे। उनका कहना है कि जिस दिन सरकार की ओर से कुछ मांगें स्वीकार किए जाने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा हुई, उस समय वह कथित तौर पर हिरासत में थे और इसलिए वहां मौजूद नहीं थे।
सुप्रीम कोर्ट में लगाई गुहार
जुनैद ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कथित अवैध हिरासत, बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए कार्रवाई, परिवार से पूछताछ और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच की मांग की है। कानून की पढ़ाई कर चुके जुनैद का कहना है कि वह आगे भी शिक्षा और छात्रों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर काम करते रहेंगे।
































