SC में SIR पर सुनवाई के दौरान Rahul Gandhi को CJI की फटकार, चुनाव आयोग और केंद्र को नोटिस

Rajni | Nedrick News Delhi Published: 15 अक्टूबर 2026, 11:34 PM Updated: 15 अक्टूबर 2026, 11:34 PM
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Rahul Gandhi: “कोई भी न्यायपालिका को धौंस नहीं दिखा सकता।” सुप्रीम कोर्ट की इस एक टिप्पणी ने साफ कर दिया है कि देश की अदालतें राजनीतिक दबाव से पूरी तरह परे हैं।

चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और दिल्ली में हुए हालिया प्रदर्शनों को लेकर हुई इस बेहद अहम सुनवाई में चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की बेंच ने बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने इससे जुड़ी चारों अलग-अलग याचिकाओं पर केंद्र सरकार, राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस और चुनाव आयोग (ECI) सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

जहां एक तरफ न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिशों को लेकर विपक्ष के आचरण पर कड़े सवाल उठाए गए, वहीं दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम काटे जाने और पुलिसिया कार्रवाई पर भी जवाब मांगा गया है।

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Rahul Gandhi को CJI की फटकार

राहुल गांधी और ‘INDIA’ गठबंधन के नेताओं द्वारा 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर तक मार्च निकालने और रजिस्ट्री दफ्तर में समर्थकों द्वारा नारेबाजी करने को लेकर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया और अन्य अधिवक्ताओं द्वारा अदालत पर दबाव बनाने की कोशिश का मुद्दा उठाए जाने पर CJI सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “कोई भी न्यायपालिका को धमका या धौंस नहीं दिखा सकता (Nobody can browbeat the judiciary)”।

अदालत ने कहा कि हम किसी ‘हाथीदांत की मीनार’ (Ivory Tower) में नहीं बैठे हैं, हमें पता है कि बाहर क्या बयान दिए जा रहे हैं। वकीलों की इस याचिका पर कोर्ट ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खरगे और महुआ मोइत्रा समेत अन्य विपक्षी नेताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और इस घटना से जुड़े CCTV फुटेज व डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।

चुनाव आयोग और CEC से जवाब तलब

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और ‘INDIA’ गठबंधन के 10 प्रमुख नेताओं द्वारा दायर की गई मुख्य याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने देशव्यापी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और इसके तहत बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे जाने की कानूनी वैधता को चुनौती देने वाली इस याचिका पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI), मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार, और दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर जवाब तलब

अदालत ने दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से बाहर करने (De-notify करने) के प्रशासनिक फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में दिल्ली पुलिस कमिश्नर द्वारा 11 अक्टूबर को जारी किए गए उस ‘स्टैंडिंग ऑर्डर’ को चुनौती दी गई है, जिसके तहत जंतर-मंतर की जगह रामलीला मैदान, बुराड़ी और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी (CBD) ग्राउंड को नया प्रदर्शन स्थल घोषित किया गया है।

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मौखिक रूप से कहा कि अदालत इस बात की गंभीरता से समीक्षा करेगी कि पुलिस ने यह कदम उठाते समय अपनी सूझबूझ और ‘विवेक का इस्तेमाल’ किया है या नहीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि प्रदर्शन स्थल ऐसी जगह होना चाहिए जहां आंदोलनकारियों की आवाज ‘सत्तारूढ़ शक्तियों और सरकार’ तक पहुंच सके, जबकि जंतर-मंतर को पूरी तरह हटा देना नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19) का हनन है।

गृह सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर का हलफनामा व माफी

10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान 45 मेट्रो स्टेशन बंद करने और इंटरनेट पाबंदियां लगाने को लेकर कोर्ट ने पहले अवमानना का नोटिस दिया था। इस पर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने अदालत में हलफनामा दायर कर बिना शर्त माफी मांगी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और खुफिया इनपुट के आधार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह अस्थाई कदम एहतियातन उठाया गया था, अदालत के किसी भी निर्देश का जानबूझकर उल्लंघन करने का कोई इरादा नहीं था। इसके साथ ही कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि पिछले हफ्ते दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों और धरनों से जुड़ी सभी CCTV फुटेज और डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखा जाए।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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