Gurudwara in Delhi: दिल्ली को भारत का दिल कहा जाता है.. और वहीं मुगल इतिहात की यादें यहां के कोने कोने में बसती है.. जो पर्यटको के दिल्ली की तरफ आने के लिए आकर्षित करती है.. लेकिन घूमने वाली जगहो में ऐतिहासिक इमारतो के अलावा भी अगर सबसे ज्यादा फेमस कुछ है तो वो है यहां के आलीशान गुरुद्वारें.. जो सिखों के कई गुरुओ के बलिदान की, उनके परोपकार औऱ उनके संगत सेवा की जीवंत कहानी कहते हुए आलीशान से खड़े है। अपने इस लेख में हम दिल्ली के 10 ऐसे ही ऐतिहासिक गुरुद्वारों के बारे में बात करेंगे.. जहां जाने मात्र से ही आपको एक अलग सुख का अहसास होगा.. शांति का अहसास होगा।
1. गुरुद्वारा बंग्ला साहिब..
क्नॉट प्लेस में राजाजय सिंह के महल को बदल कर बनाया गया ऐतिहासिक गुरुद्वारा बंग्ला साहिब… आठवें गुरु गुरु हरकृष्ण जी की स्मृति में 1783 में सिख जनरल सरदार बघेल सिंह द्वारा बनवाया गया था। ये गुरुद्वारा 24 घंटे सातों दिन भक्तो के लिए खुला रहता है।
2. गुरूद्वारा शीशगंज साहिब चांदनी चौक
नौवे गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत की कहानी कहता गुरुद्वारा शीशगंज साहिब.. जिन्हें सिख जनरल सरदार बघेल सिंह ने ही बनवाया था। जिस जगह पर गुरुद्वारा शीशगंज साहिब है उसी स्थान पर गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपनी शीश यानि की कटवा दिया था। ये गुरुद्वारा रोजाना सुबह 5 से रात 10 बजे तक खुला रहता है।
3. गुरुद्वारा माता सुंदरी
दिल्ली के पॉश एरिया में मंडी हाउस में स्थित है बेहद भव्य गुरुद्वारा, गुरुद्वारा माता सुंदरी। दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी की पहली पत्नी माता सुंदरी जी, गुरु साहिब के सचखंड जाने के बाद दिल्ली में यहीं रहा करती थी, और कई दशकों तक उन्होंने सिख धर्म का प्रचार प्रसार किया था। ये गुरुद्वारा 24 घंटे सातो दिन खुला रहता है।
4. गुरुद्वारा बाला साहिब
मात्र 7 साल की उम्र में अपनी सेवा भावना प्रदर्शित करने वाले नन्हे गुरु हरकृष्ण की याद में बनाया गया है गुरु द्वारा बाला साहिब.. जो उनके बाल रूप को याद करके बनाया गया। ये गुरुद्वारा दक्षिणी दिल्ली के आश्रम इलाके में मौजूद है। ये गुरूद्वारा भक्तो के लिए 24 घंटे खुला रहता है।
5. गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर
मेहरौली- सिखों के महान लड़ाका, बाबा बंदा सिंह बहादुर, जिन्होंने दोनो छोटे साहिबजादों की शहादत का बदला लिया और पहले सिख सम्राज्य की नींव रखी थी। जिन्हें तमाम यातनायें देकर शहादत कर दिया गया था.. उनकी ही याद में बनाया गया है गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर। ये गुरुद्वारा मेहरौली में कुतुब मीनार के ठीक पीछे बना हुआ है। सातो दिन खुले रहने वाले इस गुरुद्वारे में वैशाखी के मौके पर काफी भीड़ जमा होती है।
6. गुरुद्वारा दमदमा साहिब
दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में निजामुद्दीन की दरगाह काफी प्रचलित है, लेकिन उसके अलावा यहां मौजूद है प्रसिद्ध गुरुद्वारा दमदमा साहिब। इस गुरुद्वारे की नींव 1783 में सरदार बघेल सिंह द्वारा रखी गई थी.. जो कि मुगल बादशाह हुमायुं टॉम्ब के पास ही बनाया गया है। ये गुरुद्वारा 1707 में सम्राट बाहदुर शाह प्रथम और दसवे गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी की मुलाकात की याद में बनाया गया है। फिलहाल इस गुरुद्वारे की जो संरचना आप देखते है वो 1984 में बन कर तैयार हुई है। ये गुरुद्वारा रोजाना सुबह 3.30 बजे खुलता है और रात को 10 बजे तक खुला रहता है।
7. गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब
नौवे गुरु गुरु तेगबहादुर साहिब ने कश्मीरी पंडितो की धर्म की रक्षा के लिए आनंदपुर साहिब से लेकर दिल्ली की यात्रा की थी.. मुगलो के तमाम अत्याचारों के बाद भी उन्होंने धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा था.. जिसने कश्मीरी पंडितो को मुगलों के दमन के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा दी थी.. जिनकी ही याद में पंडितो ने गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब का निर्माण कराया। यहां एक द वॉल ऑफ़ ट्रुथ भी है जो 1984 में दंगो में मारे गए सिखों के लिए बनाया गया है। ये गुरुद्वारा 24 घंटे खुला रहता है।
8. गुरुद्वारा मोतीबाग साहिब
मोती बाग- दिल्ली के मोती बाग इलाके में मौजूद गुरुद्वारा मोतीबाग साहिब दसवे गुरु गुरु गोबिंदसिंह जी की 1707 में अपनी सेना के साथ दिल्ली की यात्रा का प्रतीक है, कहा जाता है कि इस स्थान से गुरु साहिब ने एक तीर चलाया था जो सीधा लाल किले में सिंहासन को जाकर लगा था। ये तीर केवल मुगल बादशाह बहादुर शाह प्रथम के तरफ मैत्री का प्रतीक था। ये गुरुद्वारा रोजाना सुबह 6 बजे खुलता है औऱ रात 10 बजे तक खुला रहता है।
9. गुरुद्वारा श्री नानक पिआओ साहिब
, राणा प्रताप बाग..सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देव जी के सम्मान में बनाया गया गुरुद्वारा श्री नानक प्याऊ साहिब.. गुरु साहिब के दिल्ली यात्रा का प्रतीक है, वो इसी स्थान पर रूके थे औऱ यहां उन्होंने एक स्थाई जल केंद्र बनवाया था औऱ भूखो को खाना खिलाया था। ये गुरुद्वारा ग्रैंड ट्रंक करनाल रोड पर स्थित है, जो कि 24 घंटे सातो दिन भक्तो के लिए खुला रहता है। पियाओ शब्द गुरु साहिब के निस्वार्थ भाव से संगत सेवा करने के भाव को प्रदर्शित करता है।
10. गुरुद्वारा मंजनू का टीला
चांदनी चौंक के मंजनू का टीला इलाके में मौजूद गुरुद्वारा मंजनू का टीला असल में पहले गुरु गुरु नानक देव जी और मंजनू के नाम से प्रचलित हुए अबदुल्ला की मुलाकात का प्रतीक है। सिख इतिहासकारों के अनुसार 1505 में गुरुसाहिब की इसी स्थान पर अबदुल्लाह से मुलाकात हुई थी, यहां अब्दुल्लाह ने गुरुसाहिब को अपनी नाव पर बिठा कर यमुना नदी की सैर कराई थी.. जिसने गुरु साहिब को काफी प्रभावित किया था। तब से ये स्थान काफी पवित्र हो गया। 1783 में सिख जनरल सरदार बघेल सिंह ने यहां गुरुद्वारा का निर्माण कराया था। ये गुरुद्वारा सुबह 5 बजे से रात को 10 बजे तक खुला रहता है।












































