जानिए सिखों के अंतिम गुरु, गुरु गोबिंद सिंह ने क्यों कहा था – मैं मूर्तिभंजक हूँ

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 26 अक्टूबर 2023, 05:30 AM Updated: 26 अक्टूबर 2023, 05:30 AM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

सिखों के अंतिम गुरु गोबिद जी का जन्म 1666 में पौष माह के शुल्क पक्ष की सप्तमी तिथि को सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेगबहादुर जी और माता गुजरी देवी के घर हुआ था. गुरु गोबिंद सिंह जी की अद्भुत गाथाएं सिखों के इतिहास की शौर्य और अद्भुत गाथाओं में से है. गुरु जी ने सिखों के सभी गुरुओं के वचनों, वाणियो और विचारधारा को मिल आकार श्री गुरु ग्रन्थ साहिब लिखी थी. जिससे सिखों के पवित्र ग्रन्थ के रूप में पूजा जाता है. गुरु गोबिंद जी ने धर्म की रक्षा के लिए कई बार युद्ध किए है. गुरु दशक के समकालीन मुग़ल सम्राट औरंगजेब को गुरु जी ने एक पत्र लिखा था. जिससे हम जफरनामा के नाम से जानते है. इसको को गुरु की अद्भुत व् शौर्य गाथाओं में गिना जाता है. इस लेख से आज हम आपको बताएंगे कि , गुरु गोविंद सिंह ने ‘मैं मूर्तिभंजक हूँ’ ऐसा क्यो कहा था? गुरु गोबिंद सिंह जी ने बहादुर शाह की मदद कैसे की ?

और पढ़ें : औरंगजेब तू ‘धूर्त’, ‘फरेबी’ और ‘मक्कार’ है, जफरनामा में दशमगुरु ने लिखी हैं ये बातें 

गुरु गोविंद सिंह ने की थी बहादुर शाह की मदद

गुरु गोबिंद सिंह जी ने औरंगजेब के जफरनामा के 95वें पद्य में लिखा था गुरु जी ने उन्हें यह पत्र इसीलिए लिखा था, क्यों कि औरंगजेब ने वादा करके धोखा दिया था. उन्होंने गुरु जी के परिवार को सुरक्षित निकलने का वादा किया था. लेकिन इसके बाद भी ‘चमकूर के युद्ध’ में मुग़ल सेना गुरु गोविंद सिंह जी को खोज रही थी, ताकि उनका सिर मुग़ल बादशाह के सामने पेश किया जाए.

इसके बाद जब गुरु जी के बच्चो को औरंगजेब ने दिवार में जिन्दा चिनवा दिया था तब मुग़ल सेना को लगा था कि गुरु जी भी मर गए है. लेकिन उस समय गुरु गोबिंद जी दीने नाम के एक गाँव में अपने एक अनुयायी के यहाँ ठहरे हुए थे, उस समय गुरु जी अपना वेश बदल कर घूम रहे थे. इसी गाव से गुरु जी ने औरंगजेब को पत्र लिखा था, इस पत्र में गुरु जी औरंगजेब को अधार्मिक बता कर उसकी निंदा की थी, गुरु जी औरंगजेब की मौत के बाद जब दिल्ली में गद्दी का संघर्ष शुरू हुआ तो गुरु गोविंद सिंह ने बहादुर शाह का साथ दिया था

इतिहासकारों के अनुसार जब औरंगजेब ने यह पत्र पढ़ा तो उसे ग्लानि हुई, उसने गुरु जी मिलने की इच्छा प्रकट की, जब गुरु जी दिल्ली छोड़ कर जा रहे थे तो रास्ते में उन्हें मुग़ल सम्राट के मरने की खबर मिली. उस समय गद्दी पर क़ानूनी अधिकार बहादुर शाह का था, लेकिन मोहमद आजम ने गद्दी पर कब्जा कर लिया था. जिसके बाद बहादुर शाह ने गुरु गोबिंद जी से सहायता मांगी थी. गुरु जी ने भाई धर्म सिंह के साथ 200-250 लड़ाकू सिखों का एक जत्था बहादुर शाह की सहायता के लिए भी भेजा. गुरु गोबिंद जी बहादुर शाह की गद्दी हासिल करने में सहायता की थी.

मैं मूर्तिभंजक हूँ – गुरु गोविंद सिंह जी

गुरु गोबिंद सिंह जी ने पत्र में औरंगजेब से पूछा था कि वो पहाड़ी सरदारों क असत क्यों दे रहा है? पहाड़ी सरदार हिन्दू थे और मुर्तिपुजन करते थे. गुरु गोबिंद सिंह जी ने खुद को मूर्तिभंजक बताया और कहा था कि ‘मैं मूर्तिभंजक हूँ’. गुरु गोविंद सिंह जी ने कई बार खुद को मूर्तिपूजा का विरोधी बताया था. कई बार ‘पत्थरों की पूजा’ का विरोध किया था, उनका कहना था कि ईश्वर इन पत्थरों में नहीं रहता है.

और पढ़ें : जानिए सिख धर्म में क्या है ‘माथा टेक’ कर्तव्य कर्म 

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

Recent News

Editor's Picks

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds