Gyanesh Kumar पर मुंबई में विशाल ददलानी का तंज, दिल्ली में प्रदर्शन और अब खुलेगा 20 साल पुराना मलेशियन केस!

Rajni | Nedrick News India Published: 03 अक्टूबर 2026, 09:49 PM Updated: 03 अक्टूबर 2026, 09:49 PM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की चौतरफा मांग के बीच, देशभर में भारी विरोध प्रदर्शन और 20 साल पहले मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में हुई एक खुदकुशी के तार आपस में कैसे जुड़े हैं? जिसको लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर शिकंजा कसता जा रहा है। एक तरफ जहां विपक्षी दल और नागरिक संगठन चुनाव प्रणाली में गड़बड़ी को लेकर उनसे पद छोड़ने की मांग कर रहे हैं,

वहीं केरल में उनके प्रशासनिक कार्यकाल के पुराने पन्ने एक बार फिर खुल गए हैं। चुनाव प्रणाली को लेकर मचे देशव्यापी सियासी घमासान के बीच इस अंतरराष्ट्रीय कड़ियों वाले पुराने मामले का दोबारा सामने आना, इस विवाद में एक नया और बड़ा मोड़ ले आया है। तो चलिए, इस लेख के जरिए जानते हैं कि ज्ञानेश कुमार मामले में क्या-क्या अपडेट आ रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की क्या प्रक्रिया है?

और पढ़ें: Drishyam के ग्लोबल रीमेक का बड़ा ऐलान, क्या हॉलीवुड में भी गूंजेगा विजय सलगांवकर का नाम! 

मेरा रंग दे बसंती चोला, ज्ञानू उठा लो झोला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई के शिवाजी पार्क में चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान उस समय माहौल पूरी तरह बदल गया, जब बॉलीवुड के मशहूर म्यूजिक कंपोजर और सिंगर विशाल ददलानी मंच पर पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद भारी भीड़ के सामने देशभक्ति गीत ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ को अपने ही खास और अनोखे स्टाइल में गाया।

इस दौरान वहां मौजूद लोगों का एक बड़ा हुजूम भी सिंगर के साथ सुर में सुर मिलाकर इस देशभक्ति गीत को गाता और झूमता हुआ नजर आया। ददलानी ने अपने इस गाने के जरिए सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा तंज कसा। उन्होंने गाने की लाइनों को बदलते हुए कहा- “मेरा रंग दे बसंती चोला, ज्ञानू उठा लो झोला…”। उनका यह अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इस पूरे आंदोलन का मुख्य आकर्षण बन गया है।

ज्ञानू इस्तीफा नहीं देगा, तो नंदू को देगा इस्तीफा

इसी मुंबई प्रदर्शन के एक अन्य वायरल वीडियो में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके मंच से बेहद आक्रामक अंदाज में यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि, “अगर ज्ञानू (ज्ञानेश कुमार) इस्तीफा नहीं देगा, तो नंदू को इस्तीफा देना पड़ेगा।

जंतर-मंतर 2.0 आंदोलन का ऐलान

इस तरह, जहां एक तरफ मुंबई में विशाल ददलानी का ‘मेरा रंग दे बसंती’ वाला अंदाज और अभिजीत दीपके के बयान सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली का सियासी पारा भी पूरी तरह गरमा गया है। और दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है। वहाँ पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया है। इतना ही नहीं, CJP ने सरकार को चेतावनी देते हुए ऐलान किया है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ने तुरंत इस्तीफा नहीं दिया, तो 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर ‘जंतर-मंतर 2.0’ के तहत देशव्यापी महा-आंदोलन किया जाएगा।

दिल्ली का रिया अहीर मोमेंट वायरल

यही नहीं, इस पूरे प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की बेबाकी भी सुर्खियां बटोर रही है। मुंबई प्रदर्शन के दौरान जिस तरह रिया अहीर पुलिस वैन के आगे खड़ी हो गई थीं, ठीक उसी की तर्ज पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही सनाया यादव ने हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को ले जा रही पुलिस बस के आगे खड़े होकर उसे रोकने की कोशिश की। सनाया का यह साहसिक कदम अब सोशल मीडिया पर ‘दिल्ली का रिया अहीर मोमेंट’ बनकर तेजी से वायरल हो रहा है।

20 साल पुराना मलेशियन केस और केरल सरकार का एक्शन

इन चौतरफा प्रदर्शनों और विपक्षी दलों के भारी हंगामे के बीच केरल के गृह मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने साल 2006 के ‘केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट’ (KSTP) से जुड़ी विजिलेंस ब्यूरो की फाइलों को दोबारा तलब कर लिया है।
गौरतलब है कि साल 2006 में मलेशियन कंपनी ‘पार्टीबेल’ के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर ली बीन सीन ने कुआलालंपुर में खुदकुशी कर ली थी। उनके सुसाइड नोट में केरल के तत्कालीन पीडब्ल्यूडी सचिव और वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर रिश्वत मांगने और गंभीर मानसिक उत्पीड़न के आरोप थे। अब उन अहम दस्तावेजों और सालों से गायब फाइलों की तलाश तेज हो गई है।

मुंबई से दिल्ली तक सियासी संग्राम

मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), विशाल ददलानी और शबाना आज़मी के इस आक्रामक विरोध प्रदर्शन के बाद अब यह आंदोलन पूरी तरह दिल्ली कूच करने के लिए तैयार है। विपक्ष और विभिन्न नागरिक संगठन आगामी 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए एक निर्णायक महा-प्रदर्शन करने जा रहे हैं।

आरोपों पर सत्ता पक्ष और चुनाव आयोग का पलटवार

इस पूरे मामले पर देश का राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। जहां एक तरफ विपक्ष इसे चुनाव प्रणाली और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विपक्ष का “फर्जी नैरेटिव” (Fake Narrative) करार दिया है। इसके साथ ही, चुनाव आयोग ने भी ‘मत चोरी’ और चुनावी अनियमितताओं के इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की क्या प्रक्रिया

भारतीय संविधान में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन्हें पद से हटाने की बेहद सुरक्षित और जटिल प्रक्रिया तय की गई है, जिसके कारण सरकार उन्हें अपनी मर्जी से आसानी से नहीं हटा सकती। संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड 5 के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके निर्धारित कार्यकाल (6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक) से पहले केवल दो ही विशेष स्थितियों में पदमुक्त किया जा सकता है, जिन्हें सिद्ध कदाचार (Proved Misbehavior) यानी भ्रष्टाचार या पद का दुरुपयोग, और अक्षमता (Incapacity) यानी शारीरिक या मानसिक अयोग्यता माना गया है।

उन्हें हटाने की यह पूरी प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाए जाने या महाभियोग (Impeachment) जैसी होती है, जिसकी शुरुआत के लिए लोकसभा के कम से कम 100 सदस्यों या राज्यसभा के कम से कम 50 सदस्यों के लिखित हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।

इसके बाद इस प्रस्ताव का संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में अलग-अलग विशेष बहुमत (Special Majority) से पास होना अनिवार्य है, जिसके तहत सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत होना चाहिए और साथ ही यह संख्या सदन की कुल सदस्य संख्या के 50% से अधिक होनी चाहिए। जब संसद के दोनों सदनों द्वारा एक ही सत्र (Session) में इस विशेष प्रस्ताव को पारित कर दिया जाता है, तब इसे अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है और राष्ट्रपति के आधिकारिक आदेश पर हस्ताक्षर होने के बाद ही मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाया जा सकता है।

Rajni

rajni@nedricknews.com

Recent News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds