Omani copilot radicalization probe: दुबई से तेल अवीव (इजराइल) जा रही ‘फ्लाईदुबई’ की फ्लाइट FZ1073 के कॉकपिट में हुए खौफनाक हमले की जांच में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचाने वाला सच सामने आया है। ओमान के रहने वाले को-पायलट ने बीच हवा में भारतीय मूल के कैप्टन पर चाकू से जानलेवा हमला कर पूरे विमान को क्रैश कराने की आतंकी साजिश रची थी। आरोपी को गिरफ्तार कर गहन पूछताछ की जा रही है। इसी बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक टीवी इंटरव्यू में खुलासा किया है कि यह कोई मामूली आपसी विवाद या झगड़ा नहीं था, बल्कि वह पायलट पूरी तरह ‘इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा’ की गिरफ्त में आ चुका था।
पूछताछ में खुली कट्टरपंथ की पोल| Omani copilot radicalization probe
फॉक्स न्यूज को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने जांच से जुड़ी पहली आधिकारिक जानकारी साझा की। नेतन्याहू ने बताया कि आरोपी को-पायलट से लगातार कड़ी पूछताछ की जा रही है और उसके निजी डेटा व बैकग्राउंड की पड़ताल से साफ हुआ है कि वह कट्टरपंथी इस्लामिक ब्रेनवॉशिंग के दौर से गुजर चुका था।
नेतन्याहू के इस बयान ने दुनिया भर की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। लाखों का वेतन पाने वाला, उच्च शिक्षित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रेंड एक कमर्शियल पायलट कैसे किसी चरमपंथी सोच का मोहरा बन गया, यह ग्लोबल एविएशन के लिए बेहद गंभीर सवाल बन चुका है।
30 सेकंड में 14 हजार फीट नीचे आ गिरा था विमान
घटना के वक्त फ्लाइट FZ1073 हवा में थी। कॉकपिट में भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मछार और ओमानी को-पायलट मौजूद थे। अचानक को-पायलट ने चाकू निकालकर कैप्टन पर हमला बोल दिया। हमले में कैप्टन गंभीर रूप से जख्मी हो गए और विमान का संतुलन बिगड़ गया। महज 30 सेकंड के भीतर प्लेन करीब 14,000 फीट नीचे गिर गया, जिससे अंदर बैठे 174 यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।
इस भयानक मंजर के बीच कैप्टन स्मित मछार ने अदम्य साहस दिखाया। खून से लथपथ होने के बावजूद उन्होंने सूझबूझ से कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। दरवाजा खुलते ही केबिन क्रू और यात्रियों ने तुरंत अंदर घुसकर हमलावर को-पायलट को दबोच लिया। उसी फ्लाइट में यात्री बनकर सफर कर रहे फ्लाईदुबई के दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने बिना देर किए कॉकपिट संभाला और विमान को सऊदी अरब में सुरक्षित इमरजेंसी लैंड कराया।
‘लोन वोल्फ’ हमला या बड़ा सिंडिकेट?
नेतन्याहू के खुलासे के बाद एजेंसियां अब इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि क्या आरोपी ‘लोन वोल्फ’ की तरह खुद इंटरनेट के जरिए रेडिकलाइज हुआ था, या फिर उसके पीछे कोई बड़ा आतंकी नेटवर्क काम कर रहा था। सामान्यतः एयरलाइंस में पायलटों की कड़ी बैकग्राउंड और मेंटल हेल्थ जांच होती है, ऐसे में इस स्तर की चूक वैश्विक सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान है।
कूटनीतिक तनाव और सुरक्षा नियमों में सख्ती
इस घटना ने इजराइल, यूएई और ओमान के बीच कूटनीतिक हलचल भी तेज कर दी है। चूंकि ओमान के इजराइल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, इसलिए सवाल उठ रहा है कि इजराइल जाने वाली फ्लाइट में ओमानी नागरिक को क्रू के तौर पर कैसे तैनात किया गया। इजराइल की परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने भी सुरक्षा चूक की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
इस घटना के बाद अब दुनिया भर की एयरलाइंस में पायलटों की सिर्फ मेडिकल नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और वैचारिक बैकग्राउंड की नियमित स्क्रीनिंग, कॉकपिट प्रोटोकॉल और संवेदनशील रूट्स पर क्रू असाइनमेंट के नियमों को और अधिक कड़ा किया जा रहा है।













































