बाबा साहेब के अंतिम संस्कार की वो कहानी, जो आज तक बताई नहीं गई

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 03 जुलाई 2023, 12:00 AM 🔄 Updated: 03 जुलाई 2023, 12:00 AM
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Cremation Story of Babasaheb in Hindi – बाबा साहेब डॉ. भीम राव आंबेडकर जिन्होंने गुरु बुद्ध को अपना मार्गदाता बताया था क्योंकि हिन्दू धर्म के निचले कुल में पैदा हुए बाबा साहेब के साथ बचपन से जाति के नाम पर भेदभाव हुआ और इस भेदभाव क खत्म करने के लिए बाबा साहेब ने बहुत संघर्ष किया लेकिन अपने संगर्ष में विफल होने के बाद उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया. वहीं इस पोस्ट के जरिए हम आपको इस बात की जानकारी देने जा रहे हैं कि हिन्दू धर्म में पैदा होने के बाद बौद्ध धर्म अपनाने वाले बाबा साहेब का दाह संस्कार किस धर्म के अनुसार हुआ.

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6 दिसंबर 1956 को बाबा साहेब का निधन 

बाबा साहेब की ज़िन्दगी से जुड़ी तीन तारिख सबसे अहम है पहली तारिख उनके जन्म की दूसरी तारिख उनके देहांत की और तीसरी तारिख उनके धर्म बदलने की है. जहाँ बाबा साहेब का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था और उनका देहांत 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में हुआ. तो वहीं 6 दिसंबर 1956 को बाबा साहेब ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया और 7 दिसंबर 1956 को उनका दाह संस्कार हुआ, बाबा साहेब का दाह संस्कार बौद्ध धर्म के अनुसार हुआ क्योंकि अपनी मृत्यु से दो महीने पहले 14 अक्टूबर 1956 को बाबा साहबे ने बौद्ध धर्म अपना लिया था.

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निधन से 2 महीने पहले बाबा साहेब ने अपनाया था बौद्ध धर्म

Cremation Story of Babasaheb in Hindi – डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने नागपुर की दीक्षाभूमि पर अपने 3 लाख 65 हजार फॉलोअर्स के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया. धर्म बदलने से पहले बाबा साहेब ने एक भाषण देते हुए कहा कि सत्ता और समानता चाहते हैं तो धर्म बदलिए. आप एक सम्मानजनक जीवन चाहते हैं तो आपको अपनी मदद खुद करनी होगी और यही सबसे सही मदद होगी. अगर आप आत्मसम्मान चाहते हैं, तो धर्म बदलिए. अगर एक सहयोगी समाज चाहते हैं, तो धर्म बदलिए.

अगर ताकत और सत्ता चाहते हैं, तो धर्म बदलिए. समानता .. स्वराज .. और एक ऐसी दुनिया बनाना चाहते हैं, जिसमें खुशी-खुशी जी सकें तो धर्म बदलिए. इस इस भाषण के बाद जहाँ अंबेडकर चर्चा में आए तो वहीँ 14 अक्टूबर 1956 की तारिख इस बात की शक्सी बनी जब बाबा साहबे ने हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया और धर्म बदलने के दो महीने बाद 6 दिसंबर 1956 को बाबा साहेब की देहांत हो गया.

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7 दिसंबर को हुआ बाबा साहेब का दाह संस्कार

राज्यसभा सदस्य और शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन के नेता डॉ. बी. आर. आंबेडकर का निधन दिल्ली में 6 दिसम्बर को दोपहर एक बजे हुआ और बाबा साहेब की देहांत खबर आग की तरह फैली साथ ही ये खबर भी आई कि 7 दिसंबर को उनक दाह संस्कार होगा और उनकी अंतिम यात्रा मुंबई में उनके घर राजगृह से निकलेगी.

बाबा साहबे का दिल्ली में देहांत होने के बाद उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से विशेष विमान से मुंबई में उनके घर राजगृह लाया गया , जहां भारी संख्या में लोग दादर में हिन्दू कॉलोनी स्थित डॉ. आंबेडकर के निवास ‘राजगृह’ पर इकट्ठे हो गए तो वहीं कई हज़ार लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए एअरपोर्ट पर आए. इसके बाद एक एम्बुलेंस में उनके शव को रखकर उनके निवास स्थान  ले जाया गया जहाँ से करीब 2 बजे उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई.

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4 लाख लोगों की उपस्थिति में बेटे ने दी अग्नि 

Cremation Story of Babasaheb in Hindi – जहाँ बाबा साहबे ने अपने निधन से पहले बौद्ध धर्म अपना लिया था और बौद्ध धर्म में जहाँ मृत शरीर को जलाने और दफनाने दोनों ही परंपरा को मान्यता दी गयी है तो वहीं बाबा साहबे के पार्थिव शरीर को शिवाजी पार्क स्थित चन्दनवाड़ी श्मशान घाट ले जाया गया और 4 लाख लोगों की उपस्थिति में लगभग 7.30 बजे बाब साहेब के बेटे यशवंतराव बी. आंबेडकर ने अपने पिता को अग्नि दी.

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