क्या है Tata Nano केस, जिसमें अब बंगाल सरकार को देना होगा 766 करोड़ रुपये का हर्जाना?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 31 अक्टूबर 2023, 05:30 AM Updated: 31 अक्टूबर 2023, 05:30 AM
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साल 2006 में टाटा मोटर्स और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच शुरू हुए विवाद में टाटा मोटर्स को 17 साल बड़ी राहत मिली है और अब इस विवाद के बीच मुआवाजे के रूप में टाटा मोटर्स को 766 करोड़ रुपए राशि मिलेगी और ये पैसे पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम को देने होंगे.

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जानिए क्या था मामला

सिंगूर प्लांट विवाद साल 2006 में शुरू हुआ था और ये विवाद तब शुरू हुआ जब टाटा नैनो का प्लांट सिंगूर में लगने वाला था और भूमि अधिग्रहण हो रहा था जिसको लेकर विवाद शुरू हो गया. दरअसल, उस समय कि मौजूदा वामपंथी सरकार ने टाटा मोटर्स के नैनो प्लांट (Nano Plant) को लगाने के लिए अनुमति दी थी. वहीं ममता बनर्जी विपक्ष में थीं और वामपंथी सरकार की नीतियों के खिलाफ थीं और इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रही थीं.

पश्चिम बंगाल की तत्कालीन विपक्षी पार्टी की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कृषि भूमि बचाव आंदोलन की शुरुआत की साथ ही कई पर्यावरणविदों ने भी इस प्रोजेक्ट का विरोध किया था. इसी दौरान मई में प्लांट साइट के पास हिंसा भड़क गई थी. पुलिस ने रबर की गोलियां और आंसू गैस के गोले दागे. आंदोलनकारियों ने भी ईंट-पत्थर से पुलिस कर्मियों पर हमला किया लेकिन कुछ समय बाद हिंसा कि आग ठंडी पड़ गयी.

सीएम ममता बनर्जी ने की थी भूख हड़ताल

वहीं इस बीच पश्चिम बंगाल की मौजूदा सीएम ममता बनर्जी ने टाटा नैनो प्लांट के विरोध में कई मार्च निकाले. इसके अलावा उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की थी. इसके बाद जब ममला बनर्जी की सरकार बनी, तो सत्ता पर काबिज होने के साथ ही उन्होंने टाटा ग्रुप को बड़ा झटका दे दिया. इसके बाद टाटा समूह दूसरी जगह इस प्लांट को शिफ्ट करना चाहता था. गुजरात के साणंद में टाटा को भूमि मिली और साल 2008 में इस प्लांट को वहां शिफ्ट किया गया. जिसके बाद टाटा मोटर्स ने टाटा नैनो का प्लांट गुजरात के साणंद में शिफ्ट कर दिया और इस विवाद के बीच टाटा मोटर्स इस प्लांट पर 100 करोड़ रुपए का निवेश कर दिया था.

टाटा मोटर्स को हुआ बड़ा नुकसान

साल 2011 में ममता बनर्जी ने सीएम रहते  सिंगूर भूमि पुनर्वास और विकास विधेयक को पश्चिम बंगाल विधानसभा में पारित किया. इस विधेयक के जरिए 400 एकड़ कृषि भूमि किसान को वापस दी गई थी. इसी के साथ टाटा मोटर्स ने इस प्रोजेक्ट के तहत किए गए निवेश के नुकसान को लेकर पश्चिम बंगाल के उद्योग, वाणिज्य और उद्यम विभाग की प्रमुख नोडल एजेंसी WBIDC से मुआवजे के जरिए भरपाई का दावा पेश और सोमवार को इस मामले में टाटा मोटर्स को बड़ी जीत हासिल हुई. जिसके बाद अब ममता बनर्जी सरकार ग्रुप की ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स को 766 करोड़ रुपये देगी.

पश्चिम बंगाल सर्कार देगी मुआवजा

इसी के साथ इस फैसले की जानकारी देते हुए टाटा मोटर्स की ओर से कहा गया कि तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण ने Tata Motors Ltd के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है. इस मामले में अब टाटा मोटर्स प्रतिवादी ममता बनर्जी सरकार के अधीन पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम से 765.78 करोड़ रुपये की राशि वसूलने की हकदार है. इसमें 1 सितंबर 2016 से WBIDC से वास्तविक वसूली तक 11% प्रति वर्ष की दर से ब्याज भी शामिल है.

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