Sikh Equality and Justice Punjab: सबसे पहले एक सवाल… सिखो के पहले गुरु गुरु नानक देव जी का पूरखे को हिंदू धर्म को फॉलो करते थे, वो खुद एक हिंदू खत्री परिवार से थे.. फिर उन्होंने हिंदू धर्म को छोड़ कर सिख पंथ की शुरुआत क्यों की.. वजह साफ है.. सामाजिक समानता और सामाजिक न्याय के लिए.. एक ओर जहां हिंदू धर्म में जात पात उंच नीच के कारण इंसानो को इंसान समझने के बजाय कीड़ो मकोड़ो दैसी जिंदगी जीने पर मजबूर होना पड़ता ता वहीं गुरु साहिब ने हिंदू धर्म को चुनौती देने के बजाय एक ऐसे पंथ की शुरुआत की, जो उन सामाजिक चुनौतियों से परे था.. उन्होंने अंधविश्वास, पाखंड, जातिगत भेदभाव के खिलाफ एक ऐसी विचारधारा को बढ़ावा दिया.. जिसमें सबके लिए समानता और सम्मान था। धीरे धीरे गुरु साहिब की विचारधारा मजबूत हुई.. कारवां जुड़ता गया और ये कारवां ही सिख कहलाया..सिख धर्म की मूल विचारधारा को फॉलो करने वाले आपको अनगिनत सिख मिलेंगे.. जो भारत से लेकर विदेशो तक गुरु साहिब के पद्चिन्हों पर चल रहे है.. जिसमें से एक है ब्रिटेन के एक सिख मानवतावादी सरदार रवि सिंह.. सरदार रवि सिंह दुनिया के उन सिखों में शामिल है जिन्होंने सिख धर्म को पूरी तरह से सार्थक किया है..जानेंगे सरदार रवि सिंह की कहानी.. जो हर सिख का सीना गर्व से चौड़ा कर देती है।
समानता और न्याय से ही मजबूत होगा पंजाब
आपको पता है कि हर सिख गुरुद्वारे में लंगर क्यों किया जाता है। इसके कई कारण… पहला लंगर करने के पीछे का सबसे बड़ा कारण है कि गुरुद्वारे में आने वाला कोई भी भूखा पेट न लौटे, दूसरा किसी भी जाति, किसी भी संप्रदाय का हो.. वो एक कतार में बैठ कर एक साथ खा सकें.. यहां सब गुरु के बंदे है.. जिनकी एक ही जाति है कि वो इंसान है.. संगत सेवा ही सिख धर्म में सबसे बड़ा धर्म है.. यानि की कितना भी धर्म दान कर लिजिए.. लेकिन अगर आपके दरवाजे से कोई भूखा चला जाये तो आपके सारे कर्म व्य़र्थ है। हर सिख के हाथों सबका भला होना चाहिए.. सरबत दा भला की विचारधारा को फॉलो करने वाले सरदार रवि सिंह भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक है..सिख धर्म की मूल विचारधारा समानता और सामाजिक न्याय को ध्यान में रख कर साल 1999 में उन्होंने खालसा एड नाम की शुरुआत की। खालसा ऐड ने सिख सिद्धांतो को वैश्विक धरातल पर पहचान दिलाने में की रोल प्ले किया है।
कौन है सरदार रवि सिंह
खालसा ऐड एक इंटरनेशनल एनजीओ है.. जो दुनिया के खई देशों में आपदा की स्थिति में विक्टिम्स के लिए खड़ा रहता है। वो मानते है कि मानस की जात सभै एकै पहिचानबो यानि पूरी मानव जाति को एक ही समझो.. तो ही भेदभाव खत्म होगा.. 16 सितंबर 1969 को पंजाब के होशियारपुर में जन्मे सरदार रवि सिंह का असली नाम सरदार रविंद्र सिह है। हालांकि उनके पिता कुछ समय के बाद ब्रिटेन शिफ्ट हो गए औऱ रवि सिंह भी परिवार के साथ बिट्रेन चले गए.. जहां उन्होंने स्लो एंड ईटन चर्च ऑफ इंग्लैंड बिजनस एंड एंटरप्राइज कॉलेज से पढ़ाई पूरी की। अपने कॉलेज के दिनो में उन्होंने कई सामाजिक संस्थाओं के साथ काम करने का मौका मिला.. इस दौरान ही उन्हें एक ऐसी संस्था का ख्याल आया जो सिख धर्म के विचारधारा को बढ़ावा देगी और साथ ही संगतो की सेवा भी करेगी। जिसके बाद रवि सिंह ने खालसा एड की स्थापना की। रवि सिंह खालसा ऐड के फाउंडर औऱ सीईओ भी है।
सेल्फलेस सिख नाम की डॉक्यूमेंट्री फिल्म
सालों रवि सिंह शांति से लोगो की सेवा करते रहे लेकिन खालसा एड को बड़ी पहचान मिली साल 2014 में.. जब समरसेट को बारिश और तूफान ने अपनी चपेट में ले लिया था और वहां भारी संख्या में लोगो को नुकसान हुआ था.. इस दौरान खालसा ऐड ने बढ़ कर लोगो की मदद की, उनके लिए चैरीटी की.. नतीजा ये हुआ कि लोगो ने एक फेमस टीवी शो सरप्राइज सरप्राइज में बुलाया गया जहां उन्हें सम्मानित किया गया। कहते है कि न अगर आप अच्छा कर रहे है तो उसका फल किसी न किसी रूप में मिलता ही है। 2015 में नेपाल में आये भूकंप में पीड़ितो के लिए उन्होंने समरसेट के लोगो के साथ राहत का कार्य किया था। उनके दोस्तो ने आगे बढ़ कर खालसा ऐड की मदद की थी। उनकी उपलब्धियों के कारण 2016 में बीबीसी (BBC) ने द सेल्फलेस सिख नाम की एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई थी। जुलाई 2016 में यूनाइडेट किंगडम के डोवर शहर में लगा जाम भला कौन भूल सकता है।
आतंकी हमलो की आशंका के कारण डोवर बंदरगाह और यूरोटनल पर फ्रांसीसी सीमा पुलिस सुरक्षा जांच को बढ़ाने के कारण करीब 15 घंटे का लंबा जाम लगा था.. ऐसे समय में वहां जाम में फंसे लोगो के लिए खालसा ऐड ने करीब 6 हजार पानी की बोतले पहुंचाई..रवि सिंह को सोशल मीडिया पर एक बड़ी पहचान मिली थी। रवि सिंह खुद को भारतीय कहलाने के बजाय खालसा या सिख कहलाना पसंद करते है। गुरु नानक देव जी के मूल विचार सरबत दा भला को अपनी लाइफ का मोटो बनाने वाले रवि सिंह दुनिया भर में जाति, नस्ल, धर्म, लिंग या देश की सीमाओं से ऊपर उठकर केवल मानवता की रक्षा और सेवा करने का लक्ष्य रखते है। उनका कहना है कि केवल आप इंसान बनो, इंसानो की तरह सोचो, ये इतना भी कठिन नहीं है।
खालसा एड के जरिये ग्लोबली सीरिया, इराक, अफ्रीका और युद्धसे पीड़ित देशों में रहने वाले गैर-सिख समुदायों के लिए भी उनकी सेवा ने साबित किया कि उनके लिए सब बराबर है. इंडिया हो या इंडिया के बाहर,, वो कभी भी सिखो के साथ होने वाले अन्यायों के खिलाफ जमकर आवाज उठाते है.. वो कहते है कि न्याय सबके लिए समान है.. तो सिखो के साथ भेदभाव होना पूरी तरह से अन्याय है। सिख धर्म में जिस तरह के महिलाओं औऱ पुरुषों को समान समझा जाता है, उस विचारधारा को और मजबूती देने के लिए महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य क्लीनिक, स्वच्छता और शिक्षा परियोजनाओं को लेकर रवि सिंह ने काफी काम किया। रवि सिंह की मेहनत का ही नजीता है कि आज 50 से ज्यादा देशों में खालसा ऐड के ब्रांच है। सही मायने में बराबरी और समानता पर केवल बातें करना ही काफी नहीं है.. उसे करके दिखाना जरूरी है।














































