UPI transaction charges 2026: क्या अब यूपीआई (UPI) करने पर ज्यादा भुगतान करना होगा? सरकार ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को लेकर संसद में एक नया बिल लेकर आई है, जिसने इस चर्चा को तेज कर दिया है। ऐसे में, अगर आप भी Google Pay, PhonePe या Paytm इस्तेमाल करते हैं, तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं कि सरकार के इस नए बिल का आपके यूपीआई पेमेंट पर क्या असर होगा।
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UPI transaction charges 2026 विधेयक
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ में संशोधन के लिए एक नया विधेयक पेश किया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत और सुरक्षित बनाना है। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक जानकारी के अनुसार, संसद में पेश किए गए इस नए विधेयक से आम उपभोक्ताओं (कस्टमर्स) की जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रोज़मर्रा के छोटे-मोटे यूपीआई पेमेंट पहले की तरह ही बिल्कुल मुफ्त रहेंगे।
क्या आपकी जेब से कटेगा पैसा?
मौजूदा नियमों के अनुसार, कोई भी दुकानदार या बैंक किसी सामान्य ग्राहक (कस्टमर) से UPI पेमेंट के लिए अतिरिक्त पैसे नहीं वसूल सकता और यह नियम आगे भी पूरी तरह लागू रहेगा। दरअसल, बिल में जिस चार्ज की बात की जा रही है, वह ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) के रूप में होगा। यह शुल्क बैंकों द्वारा आम जनता से नहीं, बल्कि सिर्फ दुकानदारों और बड़े व्यापारियों (Merchants) से लिया जाता है।
संसद में आए बिल का असली मतलब क्या है?
देखा जाए तो अभी तक कानूनन UPI ट्रांजैक्शन पर किसी भी प्रकार का चार्ज लगाने पर पूरी तरह रोक थी। लेकिन इस नए संशोधन विधेयक के ज़रिए सरकार को अब यह कानूनी अधिकार मिल जाएगा कि वह भविष्य में ज़रूरत पड़ने पर चुनिंदा ट्रांजैक्शंस पर चार्ज तय कर सके।
यहाँ यह समझना बेहद ज़रूरी है कि संसद में बिल पेश होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आज या कल से ही चार्ज लगना शुरू हो गया है। इस बिल के संसद से पास होने के बाद, सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मिलकर ही इस पर कोई अंतिम फैसला लेंगे।
किन ट्रांजैक्शंस पर चार्ज लगाने का है प्रस्ताव?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार सभी UPI पेमेंट्स पर चार्ज लगाने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है। इसके बजाय, शुल्क लगाने के लिए कुछ खास शर्तें तय की जा सकती हैं:
- 2,000 से बड़े भुगतान: यह प्रस्ताव केवल 2,000 से अधिक की बड़ी रकम के भुगतानों पर ही लागू हो सकता है।
- केवल बड़े व्यापारी: यह शुल्क सिर्फ उन बड़े मॉल, शोरूम या आउटलेट्स पर लग सकता है जिनका सालाना टर्नओवर 5 करोड़ से अधिक है।
- संभावित शुल्क दर: इन बड़े व्यापारियों के लिए यह शुल्क 3% से 0.5% के बीच होने की उम्मीद है।
- छोटे दुकानदार पूरी तरह बाहर: आपके आस-पास की किराना दुकान, सब्जी वाले, ऑटो-टैक्सी या दूध की डेयरी पर किए जाने वाले भुगतानों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
पर्सन-टू-पर्सन पर क्या असर होगा?
अगर आप इस बात को लेकर परेशान हैं कि अपने किसी दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने पर भी चार्ज लगेगा, तो बेफिक्र रहिए। Google Pay, PhonePe या Paytm के ज़रिए एक खाते से दूसरे खाते में किया जाने वाला ऐसा हर ट्रांजैक्शन हमेशा की तरह 100% फ्री रहेगा। कुल मिलाकर, सोशल मीडिया पर चल रही ‘जेब खाली होने’ जैसी खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। सरकार का यह कदम केवल बड़े बिजनेस भुगतानों को रेगुलेट करने के लिए है, आम जनता के लिए यूपीआई पहले की तरह ही मुफ्त और आसान बना रहेगा।














































